‘साथी होने का मतलब जागीरदार होना नहीं’, 3 दिनों में दूसरी बार US पर हमलावर दिखे फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों

चीन ने मैक्रों के बयान की तारीफ की है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि कुछ देश हैं जो बाकी देशों को आजाद और आत्मनिर्भर नहीं देखना चाहते हैं। ऐसे देश बाकी देशों को उनकी इच्छा का पालन करने के लिए मजबूर करते रहते हैं।

Macrons Jab At US

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ताइवान पर अपनी विवादास्पद टिप्पणियों बचाव किया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिकी सहयोगी होने का मतलब "जागीरदार" होना नहीं है। इससे पहले मैंक्रो ने एक इंटरव्‍यू में कहा था कि फ्रांस को अमेरिका और चीन के बीच होने वाले टकराव में फंसने से बचना चाहिए।

मैंक्रो के इस बयान को लेकर उनकी काफी आलोचना भी हो रही है। नीदरलैंड्स दौरे पर एक बयान में उन्होंने कहा कि वो चीन दौरे के वक्त कही गई अपनी बातों पर कायम हैं। मैक्रों ने कहा- अमेरिका के सहयोगी होने का मतलब उनका जागीरदार होना नहीं है। इसका मतलब ये नहीं है कि हम अपने बारे में नहीं सोच सकते।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैंक्रो ने यह भी कहा कि ताइवान की यथास्थिति पर फ्रांस के समर्थन में कोई बदलाव नहीं हुआ है। साथ ही उनका देश वन चाइना पॉलिसी का समर्थक है मगर चाहता है कि स्थिति का शांतिपूर्ण निवारण हो। मैक्रों के बयान पर व्हाइट हाउस ने कहा कि हमें फ्रांस के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों पर पूरा भरोसा है।

मैंक्रो के इस बयान के बाद पूर्व अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रम्प ने बेहद आक्रामक प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा कि मैक्रों शी जिनपिंग की चमचागिरी करने में लगे हैं। इसपर मैंक्रो ने कहा कि उन्‍हें इन टिप्‍पणियों का जवाब देने की जरूरत नहीं है।

आपको बता दें कि मैक्रों 5 अप्रैल को 3 दिवसीय दौरे पर चीन पहुंचे थे। इस दौरान उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई थी। यहां से लौटने के दौरान मीडिया से बातचीत में मैक्रों ने कहा था कि यूरोप को अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए।

पॉलिटिको को दिए एक इंटरव्यू में मैक्रों ने कहा- यूरोप हमेशा उन लड़ाइयों में फंस जाता है जो उसकी है भी नहीं। इस वजह से हम कभी भी अपने रणनीतिक हितों को देखते हुए फैसले नहीं ले पाते हैं। यूरोप के लीडर्स को ये सोचना चाहिए कि ताइवान से जुड़े विवाद को और बढ़ाना हमारे हित में नहीं है।

मैक्रों ने कहा कि ये विडंबना है कि यूरोप ये मानता है कि वो अमेरिका का अनुयायी है। मैक्रों ने कहा कि हम यूक्रेन संकट का हल नहीं निकाल पा रहे हैं। ऐसे में हम ताइवान से ये किस बुनियाद पर कहेंगे कि अगर कुछ गलत होता है तो हम उनके लिए मौजूद रहेंगे। ये सिर्फ तनाव बढ़ाने का तरीका है।

फ्रांसीसी नेता ने कहा कि "हमें स्पष्ट होना चाहिए कि हमारे विचार अमेरिका के साथ कहां तक हैं,चाहे वह यूक्रेन के बारे में हो, चीन से संबंध के बारे में हो या फिर प्रतिबंधों बारे में हो, हमारे पास एक यूरोपीय रणनीति होनी चाहिए।"

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