Twitter खरीदने के बाद शांति उजड़ गई, छिन गया चैन.. G-2O समिट में Elon Musk ने सुनाया दुखड़ा
एलन मस्क का कहना है कि ट्विटर टेकओवर के बाद से उनके पास बेहद काम बढ़ गया है।
एलन मस्क का कहना है कि ट्विटर टेकओवर के बाद से उनके पास बेहद काम बढ़ गया है। इलेक्ट्रिक कार निर्माता टेस्ला सहित चार अन्य कंपनियों को चलाने वाले मस्क ने सोमवार को कहा कि पिछले महीने 44 अरब डॉलर में सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी को खरीदने के बाद से वह सप्ताह में सातों दिन सुबह से लेकर रात तक काम कर रहे हैं।

वर्चुअल रूप से कार्यक्रम में रहे मौजूद
सोमवार को इंडोनेशिया के बाली में जी20 शिखर सम्मेलन से इतर आयोजित एक बिजनेस फोरम को संबोधित कर रहे थे। एलन मस्क को इस कार्यक्रम में मौजूद रहना था मगर वह इसमें वर्चुअल रूप से ही शामिल हो पाए। समिट की तैयारियों में जुटे इंडोनेशिया सरकार के एक मंत्री ने कहा कि मस्क को इस हफ्ते के बाद में एक अदालती मामले के लिए तैयारी करनी है, इसलिए वह सम्मेलन में शामिल नहीं हो पाए।

खुद को ही करता हूं 'प्रताड़ित', बोले एलन मस्क
एलन मस्क इस कार्यक्रम में वीडियो लिंक के माध्यम से शामिल हुए। मस्क ने कहा, "आप जो चाहते हैं उसके लिए समर्पित रहें।" उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि कितने लोग वास्तव में मुझे पसंद करेंगे। मैं खुद को ही 'प्रताड़ित' करता हूं। स्पष्ट रूप से कहूं तो यह अगला स्तर है।" एलन मस्क की ये टिप्पणी ट्विटर टेकओवर के बाद के कुछ हफ्तों की अराजक स्थिति के बाद आई है।

ट्विटर को कुछ वक्त के लिए बंद करनी पड़ी ब्लू टिक सेवा
बतादें कि एलन मस्क के बीते कुछ दिन ठीक नहीं चल पा रहे हैं। ट्विटर में बड़े पैमाने पर हुई छंटनी के बाद कंपनी में इस्तीफे का दौर जारी है वहीं, ब्लू टिक सब्सक्रिप्शिन सेवा को भी ट्विटर को रोकना पड़ा है। दरअसल बिना ग्राउंड वर्क किए कंपनी ने 8 डॉलर की फीस लेकर लोगों को ब्लू टिक देना शुरू कर दिया, जिसके बाद कई सारे चर्चित हस्तियों सहित, बड़ी-बड़ी कंपनियों के फेक एकाउंट बन गए।

एलन मस्क के फैसले से विश्वनीयता को झटका
दरअसल, मस्क के ट्विटर खरीदने से पहले तक ब्लू टिक सिर्फ सेलिब्रिटीज, पत्रकारों, नेताओं आदि को ही दिया जाता था। इसके लिए ट्विटर इन एकाउंट्स को वेरिफाइड करता था। मस्क के नए नियम के अनुसार अब एक फोन, क्रेडिट कार्ड और हर महीने 8 डॉलर खर्च करने की क्षमता रखने वाला कोई भी शख्स ब्लू टिक हासिल कर सकता है। मस्क के इस नए नियम से कई कंपनियों को अरबों का नुकसान उठाना पड़ा। इससे कंपनियों की विश्वसनीयता भी प्रभावित हुई।
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