Explainer: एलन मस्क के स्वागत में मोदी सरकार बिछाएगी रेड कार्पेट, भारतीय बाजार में हिट होगी Tesla?

Elon Musk India Visit: दुनिया की नंबर-1 इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला के मालिक एलन मस्क अपनी निवेश योजनाओं की घोषणा करने के लिए इस महीने भारत आ रहे हैं, जहां मोदी सरकार ने उनके स्वागत के लिए रेड कार्पेट बिछाने का पूरा इंतजाम कर लिया है। दिल्ली में एलन मस्क का भव्य स्वागत किया जाएगा।

लेकिन, सवाल ये है, कि क्या एलन मस्क की टेस्ला भारतीय बाजार में वो दमखम दिखा पाएगी, जैसा कारोबार उसने चीन, अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों में किया है? क्या टेस्ला के आगे भारतीय बाजार में लाल रेखाएं भी हैं?

Elon Musk India Visit

टेस्ला के लिए पिछले कुछ महीने चीन में अच्छे नहीं रहे हैं और कई चीनी स्थानीय कंपनियों ने टेस्ला को तगड़ी चुनौती देनी शुरू कर दी है, इसके अलावा चीन और अमेरिका के बीच चल रहे व्यापार युद्ध की वजह से एलन मस्क की कंपनी को टेक्नोलॉजी समस्या के साथ साथ कई दूसरी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है। लिहाजा, एलन मस्क के लिए भारत की यात्रा ठीक वैसी ही है, जैसे भारत की इलेक्ट्रिक गाड़ियों की दिशा में यात्रा शुरू हुई है।

नई दिल्ली को उम्मीद है, कि भारतीय बाजार में टेस्ला का प्रवेश, जैसा कि चीन में हुआ था, उसके घरेलू इलेक्ट्रिक चार-पहिया वाहन को बढ़ावा देने के लिए उत्प्रेरक का काम करेगा। सिर्फ दो साल पहले भारत सरकार ने टेस्ला के भारतीय बाजार में लाने के लिए आयात शुल्क में छूट देने की मांग को ठुकरा दिया था और भारत ने साफ कर दिया था, कि अगर टेस्ला को भारत आना है, तो या तो उसे भारत में फैक्ट्री बनानी होगी या फिर सौ फीसदी आयात शुल्क देने के बाद ही भारतीय बाजार में एंट्री मिलेगी।

हालांकि, अब जब टेस्ला का भारत आना तय हो गया है और टेस्ला प्रमुख एलन मस्क भारत आ रहे हैं, तो आइये जानते हैं, कि टेस्ला की भारत में यात्रा कैसी होने वाली है?

टेस्ला के लिए भारत ने बदली नीति?

- भारत सरकार की इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर नई पॉलिसी में 35,000 डॉलर से ज्यादा कीमत वाली गाड़ियों के मॉडलों पर आयात शुल्क को 100 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है, लेकिन इसके लिए पहली शर्त ये है, कि ऑफर का लाभ उठाने के लिए इसके निर्माता को भारत में स्थानीय कारखाना स्थापित करना होगा, जिसमें कम से कम 500 मिलियन डॉलर का निवेश करना होगा।

- माना जा रहा है, कि टेस्ला के लिए ये स्वागत ऑफर है। और भारत सरकार की कोशिश, किसी गतिरोध में नहीं उलझना, बल्कि भारत में टेस्ला को लाने के लिए गंभीर कोशिश है। टेस्ला के आने से भारत में गाड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग नीति को बदल दिया गया है, क्योंकि आयात शुल्क में कटौती का उद्देश्य, एक कार निर्माता को विदेशी देश में बनी पूरी तरह से निर्मित कारों को देश में बेचने में सक्षम बनाना है।

- टेस्ला ने अपने शंघाई कारखाने में बनी कारों को भारत में बेचने के लिए वकालत की थी, लेकिन नई दिल्ली के आग्रह पर इसकी पहली खेप बर्लिन-ब्रैंडेनबर्ग कारखाने से भारत भेजे जाने की संभावना है।

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टेस्ला के लिए सब्सिडी स्ट्रक्चर क्या होगा?

भारत सरकार ने विदेशों में बनाकर भारत में बेचने को लेकर जो नई शर्तें तय की हैं, उसके मुताबिक 35 हजार डॉलर से ज्यादा कीमत वाली कारों पर ही छूट दी जाएगी। इससे ज्यादा की कीमत वाली कारों पर ही माल ढुलाई और इंश्योरेंस पर कोईआ छूट दी जाएगी। इसके अलावा, एक साल में सिर्फ 800 कारें ही बेची जा सकती हैं, ताकि भारत में फैक्ट्री खोलने से पहले टेस्ला भारतीय बाजार की क्षमता की जांच परख कर सके।

वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, सरकार की नई नीति दुनिया की प्रतिष्ठिक इलेक्ट्रिक कार कंपनियों को भारत में निवेश करने के लिए आकर्षत करने के लिए डिजाइन की गई है। जिसका मकसद भारतीय उपभोक्ताओं को नई टेक्नोलॉजी को लाना है और मेक इन इंडिया को बूस्ट करना है।

ऐसा माना जाता है कि पिछले साल जुलाई में, केंद्र सरकार ने हैदराबाद स्थित मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के साथ साझेदारी में एक अरब डॉलर का ईवी प्लांट बनाने के चीन स्थित बीवाईडी के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। बीवाईडी, चीन की एक प्रसिद्ध इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली कंपनी है, जो बैटरी असेंबल करने से लेकर गाड़ियों के निर्माण और असेंबल का काम करती है।

इलेक्ट्रिक कारों का उद्योग बदल पाएगा?

ईवी उद्योग वर्तमान में काफी कठिन दौर से गुजर रहा है। वैश्विक ईवी क्षेत्र पर इसके व्यापक प्रभाव को देखते हुए टेस्ला विशेष रूप से भारत में आने की कोशिश में है। कम उत्पादन और डिलीवरी में देरी की वजह से 2022 के बाद से कंपनी का स्टॉक सबसे धीमी तिमाही की राह पर है। उत्तरी अमेरिका और पश्चिमी यूरोप सहित प्रमुख बाजारों में ईवी की मांग में लगातार मंदी ने शंघाई और बर्लिन जैसे कारखानों में एक बड़ी क्षमता की समस्या को उजागर करना शुरू कर दिया है। निश्चित रूप से, मंदी केवल टेस्ला तक ही सीमित नहीं है। अक्टूबर में, जीएम ने घोषणा की थी, कि वह धीमी मांग का हवाला देते।

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टेस्ला के सामने तीन चुनौतियां

1- टेस्ला के पास एक बड़ी आबादी को टारगेट करने वाली कारें नहीं हैं, जो भारत के मिडिल क्लास को अपनी तरफ आकर्षित कर सके। हालांकि, एलन मस्क ने 2006 में सस्ती कारों का निर्माण करना अपना मिशन बताया था, लेकिन अभी टेस्ला का मॉडल-3 सबसे सस्ती कार है, जिसकी कीमत अमेरिका में करीब 40 हजार डॉलर यानि करीब 34 लाख भारतीय रुपये है। जाहिर तौर पर ये मिडिल क्लास के बजट से काफी ज्यादा है।

2- चीन की इलेक्ट्रिक कार कंपनियां ने तेजी से एलन मस्क की टेस्ला का मुकाबला किया है। शेन्ज़ेन स्थित BYD ने 2023 के आखिरी तीन महीनों में इलेक्ट्रिक कारों के शीर्ष विक्रेता के रूप में टेस्ला को पछाड़ दिया, जो चीनी कार निर्माता के छोटे, कम लागत वाले ईवी जैसे कि सीगल और डॉल्फिन मॉडल की बिक्री में वृद्धि से बढ़ा। चीनी इलेक्ट्रिक कार, टेस्ला के मुकाबले काफी सस्ती हैं, जो एक विशाल बाजार को कवर करती हैं।

3- टेस्ला, जिसके पास यूरोप और चीन के कुछ हिस्सों के साथ-साथ अमेरिका में सबसे व्यापक और भरोसेमंद चार्जिंग नेटवर्क है, उसने अब तक इस नेटवर्क का उपयोग सिर्फ अपनी ही कार को चार्ज करने के लिए किया है। लेकिन, अमेरिकी सरकार से 7.5 अरब डॉलर की सब्सिडी प्राप्त करने वाली टेस्ला को अपने 45 हजार सुपर फास्ट चार्जिंग नेटवर्क को हर तरह की इलेक्ट्रिक कार कंपनियों के लिए खोलना पड़ा। इसकी वजह से टेस्ला को अपने सुपर चार्जिंग नेटवर्क से जो बढ़त हासिल हुई थी, वो मिट्टी में मिल गई। लोगों ने सस्ती इलेक्ट्रिक कारें खरीदना शुरू कर दिया और चार्ज के लिए टेस्ला प्वाइंट पर पहुंचने लगे।

बैट्री के मोर्च पर भारत में कामयाब होगी टेस्ला?

लिथियम-आयन बैटरी टेक्नोलॉजी ने भारत के ईवी सेगमेंट के निचले स्तर (इलेक्टिक ऑटो) पर एक बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन चार-पहिया वाहन सेगमेंट के बारे में फिलहाल ऐसा नहीं कहा जा सकता है। वर्तमान में, केंद्र सरकार, मुख्य रूप से कारों की एक श्रेणी के लिए ही टैक्स में छूट देकर प्रोत्साहन दे रही है, लिहाजा महंगी बैट्री के इस्तेमाल से कारों की कीमत ज्यादा होगी।

भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी योजना मुख्य रूप से डीजलड-पेट्रोल इंजन वाहनों की जगह लेने वाले बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (बीईवी) पर केंद्रित है, जिसमें ली-आयन को इसके सबसे व्यवहार्य बैटरी विकल्प के रूप में देखा जाता है। तो क्या टेस्ला, अपनी महंगी बैट्री की जगह क्या भारत के लिए कम कीमत वाली बैट्री के विकल्प की तरफ आ पाएगी।

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