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मिस्र में खुदाई के दौरान मिले 18 हजार दुर्लभ नोट्स, टाइम कैप्सूल से खुलेगा प्राचीन सभ्यता को लेकर अनगिनत राज

अथ्रीबिस शहर मिस्र की सभ्यता में काफी महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक स्थान रखता है और ये शहर एक वक्त निचले मिस्र के इलाके की राजधानी हुआ करता था।

काहिरा, फरवरी 07: मिस्र की धरती रहस्यमयी पिरामिडों से भरी पड़ी है और मिस्र में खुदाई के दौरान पुरातत्वविदों के हाथ अकसर ऐसी ऐसी चीजें लगती हैं, जो अपने आप में अतिदुर्लभ होता है। इस बार पुरातत्वविदों को खुदाई के दौरान प्राचीन कैप्सूल मिला है, जिसमें 18 हजार नोट्स भरे हुए हैं। इन नोट्स में प्राचीन मिस्र को लेकर ऐसी ऐसी जानकारियां लिखी हुई हैं, जो प्राचीन सभ्यता को लेकर कई रहस्यमयी राजों का खुलासा करेंगे।

कहां मिला है टाइम कैप्सूल?

कहां मिला है टाइम कैप्सूल?

पुरातत्वविदों ने ये खोज मिस्र के प्राचीन शहर अथ्रीबिस में की गई है, जो मिस्र के आधुनिक शहर सोहाग के पास स्थिति है। पुरातत्वविदों ने खुदाई के दौरान हजारों ओस्ट्राका की खोज की है, जो मिट्टी के बर्तनों पर लिखे हुए हैं। विशेषज्ञों ने कहा है कि, जो नोट्स उन्हें खुदाई के दौरान मिले हैं, वो काफी दुर्लभ हैं और ये नोट्स असल में एक तरह की चिट्ठियां हैं, जो प्राचीन मिस्रवासी साहित्यिक कार्यों के लिए करते होंगे।

हजारों साल पुराने हैं नोट्स

हजारों साल पुराने हैं नोट्स

विशेषज्ञों का कहना है कि, निजी पत्रो को बर्तनों के टूटे हिस्सों पर लिखा गया है और हजारों साल पहले इनका इस्तेमाल नोटपैड के रूप में किया जाता था। इंस्टीट्यूट फॉर एंशिएंट नियर ईस्टर्न स्टडीज के एक शोधकर्ता प्रोफेसर क्रिश्चियन लेट्ज ने कहा कि, "प्राचीन समय में ओस्ट्राका का उपयोग बड़ी मात्रा में लेखन सामग्री के रूप में किया जाता था''। उन्होंने कहा कि, 'इन बर्तनों पर स्याही से बड़े पैमाने पर लिखा जाता है या फिर उसपर कलाकारी की जाती थी।' प्रोफेसर ने कहा कि, 'ईख या खोखली छड़ी के जरिए टूटे बर्तनों पर संदेश लिखा जाता था'।

प्राचीन सभ्यता के बारे में जानकारियां

प्राचीन सभ्यता के बारे में जानकारियां

प्रोफेसर क्रिश्चियन लेट्ज ने कहा कि, 'ये लिखाई अथ्रीबिस शहर की प्राचीनतम सभ्यताओं के बारे में है और इनकी स्टडी करने से अथ्रीबिस शहर के प्राचीन इतिहास के बारे में कई जानकारियां मिलेंगी।' प्रोफेसर ने कहा कि, इनके बारे में विस्तृत अध्ययन से मिस्र की प्राचीन सभ्यता के बारे में कई ऐसी जानकारियां मिलेंगी, जिनसे इंसानी इतिहास के बारे में जानकारियों का पिटारा खुलेगा।

बर्तनों पर रोजमर्रा के सामानों की लिस्ट

बर्तनों पर रोजमर्रा के सामानों की लिस्ट

प्रोफेसर क्रिश्चियन लेट्ज ने कहा कि, 'जो टुकड़े मिले हैं, उनमें से 80 फीसदी पर डेमोटिक भाषा में लिखा गया है, जो टॉलेमिक और रोमन काल में शासन की भाषा थी।' शोधकर्ताओं के मुताबिक, ये भाषा ईसा पूर्व करीब 600 साल पहले बोली जाती थी और कई ऐसे पत्थर मिले हैं, जिनपर यूनानी भाषा में लेख लिखे हुए हैं। वहीं, कई ऐसे टुकड़े मिले हैं, जिनपर चित्रों के साथ शब्द लिखे हैं, जिन्हें अभी पढ़ने में कामयाबी नहीं मिल पाई है।

प्राचीन शैली में लिखावट

प्राचीन शैली में लिखावट

शोधकर्ताओं ने कहा है कि, कई ऐसे टुकड़े मिले हैं, जिनके दोनों तरफ लिखावट की गई है। शोधकर्ताओं ने कहा है कि, ये काफी हैरानी की बात है कि, उस समय के लोग बर्तन के टुकड़ों पर रोजमर्रा की जरूरत की सामानों की लिस्ट बनाते थे। वैज्ञानिकों ने कहा कि, सबसे ज्यादा टुकड़ों पर लिखावट के लिए लिखावट की प्राचीन शैली का इस्तेमाल किया गया है। कई टुकड़ों पर हिराटिक और चित्रलिपि का भी इस्तेमाल किया गया है। इन टुकड़ों पर गणित भी लिखे गये हैं, जो गलत हैं, वहीं ग्रामर लिखे हुए टुकड़े भी पाए गये हैं।

ऐतिहासिक स्थान है अथ्रीबिस

ऐतिहासिक स्थान है अथ्रीबिस

आपको बता दें कि, अथ्रीबिस शहर मिस्र की सभ्यता में काफी महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक स्थान रखता है और ये शहर एक वक्त निचले मिस्र के इलाके की राजधानी हुआ करता था। अथ्रीबिस शहर मिस्र की वर्तमान राजधानी काहिरा से करीब 40 किलोमीटर दूरक नील नदी के पूर्वी किनारे पर स्थिति है। प्रोफेसर ने कहा कि, बर्तन के टुकड़ों पर शुतुरमुर्ग की भी तस्वीरें मिली हैं, जिनके साथ कुछ शब्द लिखे हुए हैं। शोधकर्ताओं ने कहा है कि, इन 18 हजार नोट्स को पढ़ने और समझने में कई महीनों का वक्त लगेगा और फिर मिस्र की इतिहास से संबंधित कई नई जानकारियों का पता चल पाएगा।

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