SCO Summit: उज्बेकिस्तान में पीएम मोदी की SCO बैठक का आर्थिक महत्व
एससीओ के आठ पूर्ण सदस्य हैं, जिनमें इसके छह संस्थापक सदस्य, चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान शामिल हैं। भारत 2017 में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल हुआ।
नई दिल्ली/समरकंद, 15 सितंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज उज्बेकिस्तान के समरकंद में शुरू होने वाले दो दिवसीय शंघाई सहयोग संगठन (SCO Summit) शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। दुनिया के वर्तमान हालात को देखते हुए भारत के लिए और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण से यह शिखर सम्मेलन काफी महत्वपू्र्ण माना जा रहा है। रूस और यूक्रेन युद्ध के बाद से विश्व में खाद्य और ईंधन का संकट उत्पन्न हो गया है। इन समस्याओं से निपटने के लिए एससीओ समिट की बैठक काफी महत्वपूर्ण है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस बैठक में हिस्सा लेंगे और उनके बैठक में शामिल होने से उत्पन्न समस्याओं के उचित समाधान को गति मिल सकती है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एससीओ बैठक में शामिल होना आर्थिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है। आइए इस पर विस्तार से चर्चा करते हैं।
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आज से समरकंद में एससीओ की बैठक
आज से (15-16 सितंबर) उज्बेकिस्तान के समरकंद में शुरू हो रहे शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री की अन्य द्विपक्षीय बैठकें भी होंगी। उज्बेकिस्तान में भारतीय राजदूत मनीष प्रभात ने पहले ही कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। बता दें कि, जून 2001 में शंघाई में शुरू किया गया, एससीओ के आठ पूर्ण सदस्य हैं, जिनमें इसके छह संस्थापक सदस्य, चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान शामिल हैं। भारत 2017 में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल हुआ। भारत की ओर पीएम मोदी इस बैठक का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्था वाले देश
विश्व की तीन प्रमुख अर्थव्यवस्था वाले देश भारत, चीन और रूस एससीओ में शामिल हैं। जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के क्षेत्र में देखा जाए तो दुनिया के लगभग एक चौथाई हिस्सा इन देशों के पास है और "स्टैन्स", जिसमें ऊर्जा-समृद्ध कजाकिस्तान भी शामिल है। वहीं, किर्गिस्तान, उज़्बेकिस्तान एक अन्य ऊर्जा संपन्न राष्ट्र ईरान के इस वर्ष औपचारिक रूप से समूह में शामिल हो रहे हैं।

एससीओ सदस्यों की व्यापार में बढ़ोतरी
एक चीनी अध्ययन के अनुसार, एससीओ सदस्यों की कुल व्यापार मात्रा 2001 में $667.09 बिलियन से बढ़कर 2020 में $6.06 ट्रिलियन हो गई। इसके अलावा, क़िंगदाओ सीमा शुल्क और चीन के क़िंगदाओ स्थित महासागर विश्वविद्यालय द्वारा संकलित रिपोर्ट में कहा गया है कि एससीओ की हिस्सेदारी वैश्विक व्यापार में सदस्य 2001 में 5.4 प्रतिशत से बढ़कर 2020 में 17.5 प्रतिशत हो गए।

मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाने का इरादा
सितंबर 2003 में, एससीओ सदस्य-राज्यों के प्रमुखों ने 20 वर्षीय 'बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम' पर हस्ताक्षर किए। कार्यक्रम एक दीर्घकालिक लक्ष्य के रूप में एससीओ क्षेत्र के भीतर एक मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाने का इरादा रखता है। हालांकि, अभी तक ऐसी कोई योजना नहीं बन पाई है।

अच्छे व्यापार संबंधों को प्रोत्साहन
एससीओ के तत्वावधान में, एससीओ बिजनेस काउंसिल एक ऐसी संस्था है जो बहुपक्षीय समूह के भीतर व्यापारिक समुदायों के बीच अधिक संबंधों को प्रोत्साहित करती है। एक अन्य मंच, एससीओ इंटरबैंक कंसोर्टियम, "एससीओ सदस्य राज्यों की सरकारों द्वारा प्रायोजित निवेश परियोजनाओं के लिए धन और बैंक सेवाएं प्रदान करने के लिए" स्थापित किया गया है। इसके अलावा, एक 'एससीओ विकास बैंक' के लिए बातचीत चल रही है।

एससीओ एक साथ जुड़ने का बड़ा मंच
विदेश नीति विशेषज्ञ एससीओ को भारत के लिए मध्य एशियाई गणराज्यों के साथ जुड़ने के लिए एक मंच के रूप में देख रहे हैं, जिसे "स्टैन" भी कहा जाता है। वास्तव में, 2021 के एससीओ की बैठक में , प्रधान मंत्री मोदी ने ईरान में चाबहार बंदरगाह के साथ क्षेत्र को जोड़कर मध्य एशिया के साथ अधिक व्यापार संबंधों पर जोर दिया।उन्होंने कहा था भारत बंदरगाह विकसित कर रहा है। अगर क्षेत्र जीवाश्म ईंधन या इंट्रा-एससीओ व्यापार से लाभ उठाना चाहता है, तो हमें कनेक्टिविटी पर अधिक जोर देने की आवश्यकता होगी।












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