रूस में बोले विदेश मंत्री, कहा- भारत और चीन के बीच परमाणु हथियारों की होड़ नहीं
मॉस्को, जुलाई 08: विदेश मंत्री एस. जयशंकर शुक्रवार (9 जुलाई) को मॉस्को में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ मुलाकात करेंगे। इससे पहले गुरुवार को आईएमईएमओ आरएएस में 'भारत-रूस संबंधों में एक बदलती दुनिया' टॉपिक पर विदेश मंत्री ने अपने विचार साझा किए। इस दौरान एस. जयशंकर ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद भारत और रूस के बीच संबंध सबसे मजबूत रहे हैं। समय-समय पर कई बदलाव हुए हैं, लेकिन यह 'भूगोलीय राजनीति' इतनी बरकरार थी कि हमें मुश्किल से ही किसी पतन की याद आए।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि बहुध्रुवीयता की प्रबल भावना है। हमारा अतीत अलग हो सकता है, लेकिन हमारे पास राष्ट्रीय हित और राष्ट्रीय संकल्प की एक मजबूत भावना है। उन्होंने बताया कि हम बड़े मुद्दे जैसे आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन का मुकाबला कर रहे हैं। इन सभी मुद्दों पर भारत और रूस निस्संदेह एक ही पृष्ठ पर हैं, हम कट्टरपंथ के शिकार रहे हैं।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि मैं नहीं मानता कि भारत और चीन के बीच परमाणु हथियारों की होड़ है। चीन 1964 में परमाणु शक्ति बन गया, भारत 1998 में। चीनी कार्यक्रम का विकास हमसे कहीं अधिक गतिशील है। इसके उन्होंने कहा कि हम वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मेजबानी करने के लिए उत्सुक हैं।
वहीं उन्होंने कहा कि स्पूतनिक वैक्सीन से शुरू होने वाले कई सहयोग चल रहे हैं। ऊर्जा क्षेत्र, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि-उद्योग, चिकित्सा उपकरणों में निवेश, रेलवे और जलमार्ग में सहयोग भारत के विकास में अंतर ला सकता है।
आपको बता दें कि 9 जुलाई को मॉस्को में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ भारतीय विदेश मंत्री मीटिंग करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की ओर से राजनीति मसलों के अलावा सुरक्षा, व्यापार, आर्थिक मसलों के अलावा तकनीकी सैन्य सहयोग, विज्ञान, संस्कृति व मानवीय पहलुओं पर विचार साझा होंगे। मालूम हो कि विदेश मंत्री रूस के तीन दिवसीय दौरे पर हैं।












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