Trump के 'टैरिफ हमले' से हिले भारतीय उद्योग! क्या है भारत का रिएक्शन, अपनाएगा कौन सा रूख?

Donald Trump Tariffs Announcement: अमेरिका द्वारा लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ का असर भारत के कई महत्वपूर्ण उद्योगों पर गहराई से पड़ रहा है। ऑटो कंपोनेंट्स, केमिकल्स, झींगा उत्पादन और स्टील जैसे प्रमुख क्षेत्रों को इस टैरिफ की वजह से बड़ा नुकसान हो रहा है। हालांकि, फार्मास्युटिकल सेक्टर को इस टैरिफ से राहत मिली है।

यह फैसला भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है, क्योंकि यह टैरिफ उन देशों पर लगाया गया है जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है। भारत जैसे उभरते बाजारों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ रहा है। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि इस स्थिति का सामना करने के लिए भारत को सावधानीपूर्वक और संतुलित तरीके से कदम उठाना होगा।

Donald Trump Narendra Modi

भारत का संतुलित रुख

एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि इस नई स्थिति के प्रति भारत का रुख मापी हुई, संतुलित और पेशेवर रहेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अमेरिका से आयात पर जवाबी टैरिफ नहीं लगाएगा, बल्कि इस परिस्थिति का सामना करने के लिए कूटनीतिक और आर्थिक रणनीतियों का सहारा लिया जाएगा।
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श्रम-प्रधान उद्योगों को बढ़त का मौका

हालांकि टैरिफ से कई उद्योग प्रभावित हुए हैं, लेकिन कुछ क्षेत्रों के लिए यह अवसर भी लेकर आ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि श्रम-प्रधान उद्योगों में भारत को चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले बढ़त मिल सकती है। वाणिज्य मंत्रालय और विशेषज्ञ इस समय प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में इस टैरिफ के असर का आकलन कर रहे हैं।

अधिकारियों ने बताया कि 27% के प्रभावी रेसिप्रोकल टैरिफ के साथ, भारत को चीन के मुकाबले 54-79% की बढ़त मिल सकती है। इसी तरह, कपड़ा निर्यात के मामले में भारत को वियतनाम और बांग्लादेश पर भी प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सकता है।

शेयर बाजार पर असर

BSE सेंसेक्स, जो भारत का एक प्रमुख स्टॉक इंडेक्स है, सुबह के समय 806 अंक गिरकर खुला, लेकिन कुछ नुकसान की भरपाई करते हुए 11:07 बजे तक 200.6 अंकों पर ट्रेड कर रहा था। यह बुधवार के बंद स्तर 76,617.44 से 0.26% की गिरावट दर्शाता है। यह संकेत है कि निवेशक भी इस नए टैरिफ के प्रभाव से चिंतित हैं।

व्यापार समझौते से उम्मीदें

टैरिफ की गणना अमेरिका के ट्रेड डेफिसिट को उस देश से आयातित माल के मूल्य से विभाजित कर के की गई है। अमेरिका ने यह भी बताया है कि इस टैरिफ का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को संतुलित करना है। अब भारत की उम्मीदें इस बात पर टिकी हैं कि दोनों देशों के बीच एक व्यापार समझौता हो जाए।

एक सरकारी अधिकारी ने कहा, "जब दो नेता (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प) 2025 के अंत तक एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत हुए हैं, तो तुरंत कोई प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं है।"
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