बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना...सीजफायर के बाद अब कश्मीर समाधान कराने की बात कर रहे हैं डोनाल्ट ट्रंप
Donald Trump Mediation Offer On kashmir: हमारे भारत में एक बहुत मशहूर कहावत है... ''बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना'' इसका मतलब है...'किसी ऐसे व्यक्ति का बहुत ज्यादा उत्साहित होना, जिसका उस घटना से कोई लेना-देना नहीं है।' अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 'शांति-दूत' और 'विश्व गुरु' बनने के चक्कर में फिलहाल भारत-पाकिस्तान तनाव पर वैसा ही बर्ताव कर रहे हैं।
पहले ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान सीजफायर को लेकर बड़बोलापन दिखाते हुए बयान दिया। फिर अब ट्रंप ने कश्मीर विवाद पर भी समाधान कराने की पेशकश की है। डोनाल्ड ट्रंप ये पेशकश अपने मन से कर रहे हैं, भारत ने ना तो उन्हें भारत-पाकिस्तान तनाव पर मध्यस्थता करने के लिए बुलाया था और ना ही कश्मीर विवाद पर समाधान के लिए उनसे बात की है। भारत के विदेश सचिव ने साफ-साफ कहा था कि भारत-पाकिस्तान में सीजफायर दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) के बातचीत के बाद हुई है।

डोनाल्ड ट्रंप ने 'कश्मीर विवाद' को लेकर क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (11 मई) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर कहा,
''मुझे भारत और पाकिस्तान के मजबूत और अडिग नेतृत्व पर बहुत गर्व है। उन्होंने सही समय पर समझदारी और हिम्मत दिखाते हुए इस संघर्ष को रोकने का फैसला किया है...क्योंकि उनके पास यह जानने और समझने की शक्ति, बुद्धि और धैर्य है कि वर्तमान आक्रामकता को रोकने का समय आ गया है। अगर ये नहीं रूकता तो मृत्यु और विनाश का कारण बन सकता था। मुझे गर्व है कि अमेरिका इस ऐतिहासिक फैसले तक पहुंचने में आपकी मदद कर पाया। मैं दोनों देशों के साथ बिजनेस में बढ़ोतरी करने जा रहा है। इसके अलावा मैं आप दोनों के साथ मिलकर, इसपर भी काम करूंगा कि 'क्या हजार साल'' के बाद कश्मीर के संबंध में कोई समाधान निकाला जा सकता है। भगवान भारत और पाकिस्तान के नेतृत्व को अच्छी तरह से काम करने के लिए आशीर्वाद दें।''
डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से एक बार 'कश्मीर विवाद' को 1000 वर्षों से भी पुराना बताया है। कश्मीर विवाद को दशकों पुराना बताने वाले उनके दावे को तो सोशल मीडिया पर लोगों ने हंसकर टाल दिया है। भारतीय यूजर ने कहा है कि क्या ट्रंप को पता नहीं है कि एक सदी पहले पाकिस्तान था ही नहीं? भारत पाकिस्तान 14-15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को अलग हुआ था...तो ये 1000 वर्षों पुराना विवाद कैसे हो गया..।
'कश्मीर हमारा था, है और रहेगा', ट्रंप की मध्यस्थता भारत कभी नहीं करेगा स्वीकार!
डोनाल्ड ट्रंप की कश्मीर मध्यस्थता कराने वाली बात को भारत कभी नहीं स्वीकार करेगा। ऐसा लगता है कि ट्रंप यह भूल गए कि कश्मीर को लेकर भारत की स्पष्ट नीति रही है कि यह उसका आंतरिक मामला है। चाहे वो केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार हो या फिर भारत के पहले किसी सरकार की बात हो...भारत का हमेशा से यही स्टैंड रहा है कि 'कश्मीर हमारा था, है और रहेगा'। भारत इस मुद्दे पर किसी भी देश की कोई मध्यस्थता कभी नहीं स्वीकार करेगा।
डोनाल्ड ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में भी साल जुलाई 2019 में कश्मीर विवाद को सुलझाने की पेशकश कर चुके हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर भारत-पाकिस्तान चाहेगा तो वो कश्मीर मुद्दे पर जरूर हस्तक्षेप करेंगे। उस वक्त भी भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सरकार की तरफ से ये साफ कह दिया था कि भारत कश्मीर के मामले में किसी भी नहीं सुनने वाला है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था, 'कश्मीर पर कोई भी चर्चा सिर्फ पाकिस्तान के साथ होगी और वह भी द्विपक्षीय तरीके से।'
कश्मीर को लेकर भारत की नीति हमेशा से स्पष्ट रही है -यह देश का आंतरिक और अविभाज्य हिस्सा है। संविधान के अनुच्छेद 1 और 370 (अब हटाया जा चुका है) के तहत जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग माना गया है। भारत की यह स्थिति केवल कूटनीतिक या कानूनी ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से भी मजबूत रही है।
सिर्फ ट्रंप ही नहीं, हाल के वर्षों में जब-जब किसी वैश्विक नेता या संगठन ने कश्मीर मुद्दे पर 'मध्यस्थता' की बात की है, भारत ने सधे हुए स्वर में यह दोहराया है कि यह द्विपक्षीय मामला है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई जरूरत नहीं है। चाहे फिर वो डोनाल्ड ट्रंप हों या संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी कोई आवाज, भारत ने हमेशा कहा है कि ये हमारा आंतरिक मामला है।
1947 में भारत के स्वतंत्र होने के समय से ही कश्मीर भारत का अंग बना, हालांकि पाकिस्तान ने इसके एक हिस्से पर अब तक अवैध कब्जा कर रखा है, जिसे भारत 'पाक अधिकृत कश्मीर' (PoK) कहता है। इसी वजह से यह विषय अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमेशा उठता रहा है, जबकि भारत इसे दो देशों के बीच का मुद्दा मानता है, किसी तीसरे की भूमिका इसमें स्वीकार नहीं की जाती।












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