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राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप और मेलानिया अचानक पहुंचे इराक, बोले अमेरिका दुनिया का 'पुलिसमैन' नहीं बन सकता

बगदाद। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप और फर्स्‍ट लेडी मेलानिया ट्रंप बुधवार को अचानक इराक पहुंचे। यहां पर दोनों ने अमेरिकी सैनिकों से मुलाकात की और उनके हॉलीडे सीजन को और ज्‍यादा खास बनाया। राष्‍ट्रपति ट्रंप हमेशा ही इराक और अफगानिस्‍तान वॉर को अमेरिका के लिए सबसे महंगा करार देते आए हैं। साल 2016 में चुनाव प्रचार के दौरान उन्‍होंने इराक के वॉर जोन का दौरा करने का वादा भी किया था। मेलानिया और डोनाल्‍ड दोनों ही बुधवार की रात बगदाद में थे। यहां पर दोनों ने अल असद एयरबेस पर सैनिकों से मुलाकात की और उनका उत्‍साह बढ़ाया। ट्रंप ने यहां पर सैनिकों से कहा कि अमेरिका अब दुनिया के लिए 'पुलिसमैन' का रोल अदा नहीं कर सकता है।

ट्रंप का पहला इराक दौरा

ट्रंप का पहला इराक दौरा

राष्‍ट्रपति ट्रंप का यह पहला इराक दौरा था। ट्रंप बुधवार को स्‍थानीय समयानुसार करीब 7:15 पर इराक पहुंचे थे। पश्चिमी इराक में स्थित अल असद एयर बेस पर ट्रंप करीब तीन घंटे तक रुके थे। काले कोट में ट्रंप ने लैं‍डिंग की तो वापसी के समय उन्‍होंने सेना की जैकेट पहनी हुई थी। ट्रंप की मानें उनका यह इराक दौरा काफी तनावपूर्ण और सीक्रेट है। राष्‍ट्रपति ट्रंप ने यहां पर स्‍पेशल फोर्सेज के करीब 100 सैनिकों के साथ मुलाकात की। राष्‍ट्रपति ट्रंप और पत्‍नी मेलानिया ने यहां पर सैनिकों के साथ सेल्‍फी, फोटोग्राफ्स क्लिक करवाईं और उन्‍हें ऑटोग्राफ्स दिए। 11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर हुए आतंकी हमलों के बाद से हर राष्‍ट्रपति के लिए कॉम्‍बेट जोन में तैनात सैनिकों से मिलना एक परंपरा की तरह है।

इराकी पीएम से नहीं की मुलाकात

ट्रंप को इराक के प्रधानमंत्री अदेल अब्‍देल माहदेई से भी मुलाकात करनी थी। लेकिन ट्रंप ने उनसे सिर्फ फोन पर ही बात की। इराक के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस बात की जानकारी दी गई। ट्रंप ने जहां सीरिया से अमेरिकी सेनाओं की वापसी के आदेश दे दिए हैं तो उन्‍होंने अभी तक इस बात की कोई जानकारी नहीं दी है कि इराक में मौजूद अमे‍रिकी सैनिकों को कब वापस बुलाया जाएगा। साल 2014 में अमेरिकी सैनिक, आईएसआईएस के खिलाफ मोर्चा संभालने के लिए इराक में वापस लौटे थे। व्‍हाइट हाउस की ओर से भी इसका एक वीडियो जारी किया गया है।

अमेरिका पर दुनिया ने डाला बोझ

ट्रंप ने इस दौरान 'अमेरिका फर्स्‍ट' नीति का भी जिक्र किया। अमेरिकी न्‍यूज चैनल सीएनएन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक राष्‍ट्रपति ट्रंप ने अल असद एयर बेस से कहा, 'अगर दुनिया चाहती है कि अमेरिका उनके लिए युद्ध लड़े तो फिर उन्‍हें उसकी कीमत भी अदा करनी होगी।' ट्रंप के मुताबिक अमेरिका अब दुनिया के देशों की ओर से फायदा उठाने का जरिया नहीं बनना चाहता है। न ही अमेरिका अपनी सेनाओं को उनकी रक्षा के लिए भेजने का इच्‍छुक है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पर सारा बोझ लाद देना सही बात नहीं है। ट्रंप की मानें तो अमेरिकी सेनाएं ऐसे देश में हैं जिनके बारे में लोगों को मालूम ही नहीं है और यह काफी बचकाना है। ट्रंप ने यहां पर भी डेमोक्रेटिक पार्टी की आलोचना की और कहा कि डेमोक्रेट्स उन्‍हें बॉर्डर की सुरक्षा नहीं करने दे रहे हैं।

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