‘अफगानिस्तान से निकलते वक्त सैनिकों ने लड़ाकू कुत्तों को वहीं छोड़ा’, डोनाल्ड ट्रम्प के बयान से भड़की जनता
डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिकी फौज ने वापसी के दौरान लड़ाकू कुत्तों को अफगानिस्तान में छोड़ दिया था। ट्रम्प ने ये भी दावा किया कि वे अफगानिस्तान के कुछ इलाकों पर कब्जा कभी नहीं छोड़ते। बाइडेन ने ऐसा कर गलती की।

अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा किया गए एक खुलासे से देश में हंगामा मच गया है। दरअसल, ट्रम्प ने बीते दिनों फॉक्स न्यूज के एंकर टकर कार्लसन को इंटरव्यू में बताया था कि अमेरिकी सैनिकों ने देश छोड़ते समय अफगानिस्तान में अपने लड़ाकू 'ऑफिसर' कुत्तों को छोड़ दिया था।
ट्रम्प का ये रहस्योद्घाटन इसके बाद से सोशल मीडिया पर वायरल है। अमेरिका में कुत्ते को खूब पसंद किया जाता है। ऐसे में देश की जनता इस बात पर भड़क गई है कि अफगानिस्तान जैसे देश में जो कुत्तों से सख्त नफरत करते हैं, वहां सैन्य कुत्तों को कैसे छोड़ दिया गया?
वायरल वीडियों में ट्रम्प, फॉक्स टीवी के एंकर से कह रहे हैं, सेना ने रात के अंधेरे में उन कुत्तों को छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने चीन के कारण अफगानिस्तान में आत्मसमर्पण किया। ट्रम्प ने कहा, हम 85 बिलियन अमेरिकी डॉलर के उपकरणों को वहां छोड़कर आ गए।
ट्रम्प ने आगे कहा, हमने बगराम (अफगानिस्तान के परवान प्रांत में एक जिला) छोड़ दिया, ये वो इलाका है जहां से एक घंटे की दूरी पर चीन परमाणु हथियार बना रहा था। जबकि मैं बगराम को कभी नहीं छोड़ता, यहां दुनिया का सबसे बड़ा वायु सेना का कैंप है, जहां का रनवे ही सिर्फ 10 हजार फीट लंबा है।
ट्रम्प ने कहा, मैंने अफगानिस्तान से निकलने का फैसला किया मगर मैं बगराम को नहीं छोड़ता। मैं वहां चीन के कारण रुका हुआ था, न कि अफगानिस्तान के कारण। आपको बता दें कि हाल ही में व्हाइट हाउस ने एक 12 पन्नों का दस्तावेज जारी किया था। इसमें अफगानिस्तान से सेना वापस बुलाने के लिए ट्रम्प को दोषी ठहराया गया था।
प्रशासन तरफ से जारी की गई इस रिपोर्ट में कहा गया था कि सरकार ने अफगानिस्तान से सेना वापसी को लेकर जो फैसले लिए उसके पीछे मजबूरी थी। इसमें ये बताया गया है कि 2021 में किन परिस्थितियों में अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना को बाहर निकाला गया।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि अफगानिस्तान से आनन-फानन में अमेरिकी सेना को वापस बुलाने के लिए मजबूर होना पड़ा था। 2020 में ट्रम्प सरकार और तालिबान में हुए समझौते के चलते उनके हाथ बंधे हुए थे। इस रिपोर्ट को कई कांग्रेस कमेटियों को भी भेजा गया।
बाइडेन सरकार के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने अराजकता के लिए अफगानिस्तान में पहले से चल रहे ट्रम्प प्रशासन के कमजोर ऑपरेशन को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा कि जब बाइडेन ने 20 जनवरी, 2021 को पदभार संभाला, उस समय तालिबान सबसे मजबूत सैन्य स्थिति में थे। ये देश के लगभग आधे हिस्से को नियंत्रित कर रहे थे।
जॉन किर्बी ने कहा कि 2021 में अफगानिस्तान में सिर्फ 2500 सैनिक ही बचे थे, जो कि 2001 के बाद का सबसे कम आंकड़ा है। जॉन किर्बी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन के पास च्वाइस थी कि या तो अमेरिकी बलों को वापस ले लिया जाए या तालिबान के साथ लड़ाई फिर से शुरू कर दी जाए। हमने वापसी को चुना। हमें अपने इस फैसले पर 'गर्व' है।












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