हैकिंग के खिलाफ सख्त हुए डोनाल्ड ट्रंप, 90 दिन में मांगा एक्शन प्लान
ट्रंप ने कहा, 'दूसरे देश और हैकिंग ग्रुप हम पर नजर बनाए हैं वे हमारे सरकारी संगठनों के साइबर स्पेस की सुरक्षा को तोड़ने की कोशिश करते हैं। ऐसे में हमारे लिए यह खतरा है।'
वाशिंगटन। अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप साइबर सिक्योरिटी को लेकर काफी चौकन्ने हैं। कार्यभार ग्रहण करने से पहले ही उन्होंने शुक्रवार को अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसियों के सदस्यों की एक खास बैठक बुलाई जिसमें उन्होंने एक ऐसी गठित करने का प्लान बनाया जो उन्हें साइबर सिक्योरिटी की खामियों और साइबर हमलों से निपटने की योजना बता सकें। उन्होंने इसके लिए 90 दिनों की समय सीमा तय की है। ट्रंप ने मीटिंग कहा कि उनके कार्यभार ग्रहण करने के 90 दिनों के भीतर उन्हें यह प्लान चाहिए।

रूस और चीन लगातार कर रहे हैं साइबर हमले
दरअसल, रूस, चीन और दूसरे देश और कई अन्य ग्रुप अमेरिकी के साइबर स्पेस पर सेंध लगाने की कोशिश करते रहे हैं। ट्रंप ने कहा, 'दूसरे देश और हैकिंग ग्रुप हम पर नजर बनाए हैं वे हमारे सरकारी संगठनों के साइबर स्पेस की सुरक्षा को तोड़ने की कोशिश करते हैं। ऐसे में हमारे लिए यह खतरा है।' उन्होंने टीम को जल्द एक्शन मोड में आने की भी सलाह दी। ट्रंप का मानना है कि उनके कार्यभार ग्रहण करने के बाद चीजें तेजी से हों ताकि उनके प्रशासन का असर दिखे।
अमेरिकी चुनाव में भी हैकिंग का आरोप
मीटिंग में ट्रंप ने कहा कि साइबर हमलावर सरकारी संस्थाओं, बिजनेस और डेमोक्रेट नेशनल कमेटी जैसे संस्थानों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि वोटिंग मशीनों से छेड़छाड़ करके चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है। ट्रंप ने खुफिया प्रमुखों को संबोधित करते हुए यह कहा। खुफिया अधिकारियों ने रूस पर आरोप लगाया कि 2016 के अमेरिकी चुनाव में हैकर्स ने अमेरिकी इंटरफेस में घुसने की कोशिश की। हालांकि रूस ने आरोपों से इनकार किया है।












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