क्या अफगानिस्तान के पास रह गए हैं सिर्फ 30 दिन ?
काबुल, 11 अगस्त: अफगानिस्तान सरकार के दिन गिनती के नजर आने लगे हैं। यह आशंका वहां से 20 साल बाद बोरिया-बिस्तर समेट कर लौट रहे अमेरिका की इंटेलिजेंस एजेंसी ने जाहिर की है। इसके मुताबिक तालिबान ने जिस तरह से काबुल की ओर बढ़त बनानी शुरू की है, महज 30 दिनों में वह काबुल शहर से अशरफ गनी की सरकार को किनारे कर देगा। इस अमेरिकी चेतावनी के बीच अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अपनी सेना की हौसला अफजाई के लिए बुधवार को मजार-ए-शरीफ पहुंच गए, जो इस वक्त तालिबान का पहला बड़ा टारगेट है। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में तालिबान को बहुत ज्यादा कामयाबी मिली है और उसने उसके आठ प्रांतों की राजधानियों पर कब्जा कर लिया है और बड़ी संख्या में अफगान सैनिको अपने सामने हथियार डालने को भी मजबूर कर रहा है।

30 दिन में काबुल पर दबदबा बना लेगा तालिबान!
तालिबान अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के करीब पहुंचता जा रहा है और यूं ही चलता रहा तो महज 30 दिनों में काबुल शहर को अलग-थलग कर देगा और आने वाले 90 दिनों में उसपर पूरी तरह से कब्जा कर लेगा। न्यूज एजेंसी रायटर्स के मुताबिक अमेरिकी इंटेलिजेंस ने यह अनुमान जताया है और उसने अमेरिका के एक रक्षा अधिकारी के हवाले से ये भी कहा है कि 'लेकिन यह अंतिम निष्कर्ष नहीं है।' उन्होंने कहा है कि अफगानिस्तानी फौज बाजी पलट भी सकती है। अमेरिकी इंटेलिजेंस की ओर से यह चेतावनी उन रिपोर्ट्स के बीच आई है, जिसके मुताबिक तालिबान अफगानिस्तान के 8 प्रांतों की राजधानियों पर कब्जा कर चुका है। अंतिम दो शहर जिस पर तालिबान ने नियंत्रण किया है, वे हैं- फराह की राजधानी फराह और बघलान की राजधानी पुल-ए-खुमरी।

मजार-ए-शरीफ पर कब्जा करना चाहता है तालिबान
अब तालिबान की नजर उत्तरी अफगानिस्तान के सबसे बड़े शहर मजार-ए-शरीफ पर है। खबरें हैं कि तालिबान के हाथों लगातार अहम शहरों को गंवाने के चलते राष्ट्रपति अशरफ गनी ने आर्मी चीफ को हटा दिया है। बता दें कि तालिबान ने अबतक की सभी शांति वार्ताओं के प्रति आमतौर पर उदासीन रवैया ही दिखाया है और वह ताकत के बल पर 20 साल बाद काबुल पर फतह करना चाहता है। यूएन इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन ने मंगलवार को कहा था कि अफगानिस्तान में जारी हिंसक संघर्ष की वजह से अबतक 3,59,000 से ज्यादा लोग सिर्फ इस साल विस्थापित हो चुके हैं।

तालिबान के सामने सरेंडर कर रही है अफगान सेना
एक हफ्ते से भी कम वक्त में जिस तरह से तालिबान के आतंकियों ने अफगानिस्तान के एक-चौथाई प्रांतीय राजधानियों को कब्जे में लिया है, उसके बाद अशरफ गनी सरकारी की सबसे पहली चुनौती मजार-ए-शरीफ बचाने की है, जिसके लिए बुधवार को वे खुद वहां पहुंचे हैं। वे अफगानी सुरक्षा बलों का हौसला बढ़ाने गए हैं। लेकिन, उनकी इस कोशिश को तालिबान ने तब और बड़ा झटका दे दिया कि पड़ोस के ही कुंदुज में अफगान सेना के सैकड़ों जवानों ने उसके सामने इकट्ठा हथियार डाल दिए। अफगानी सेना के एक अफसर ने नाम नहीं जाहिर होने देने की शर्त पर कहा कि कुंदुज एयरपोर्ट पर उन्होंने मोर्टार हमले का सामना किया था, उनके पास सरेंडर के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी को बताया कि 'मेरे यूनिट के 20 जवानों ने अभी-अभी सरेंडर किया है। हम सब भी माफीनामा लेने का इंतजार कर रहे हैं। बहुत लंबी लाइन है।'












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