बच्चों को अभी ना लगाएं वैक्सीन, WHO के चीफ ने अमीर देशों से क्यों की ऐसी अपील ?
जिनेवा, 14 मई : शुक्रवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अमीर देशों से बच्चों को अभी टीका नहीं लगाने की अपील की है। डब्ल्यूएचओ ने यह चेतावनी भी दी है कि कोविड-19 महामारी का दूसरा साल ज्यादा जानलेवा साबित हो रहा है, इसे देखते हुए अमीर देशों को फिलहाल बच्चों को वैक्सीन देने की जगह उसे गरीब देशों को दान करना चाहिए। डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर जनरल ट्रेडोस अदनोम ने यह आवाज उस वक्त उठाई है, जब कई अमीर देशों ने बच्चों और किशारों को टीका देना शुरू कर दिया है, जबकि कई गरीब देश मुश्किल से हेल्थ वर्करों और सबसे जोखिम वाले ग्रुपों के लिए भी यह अभियान शुरू करने में परेशानी झेल रहे हैं।

बच्चों को अभी ना लगाएं वैक्सीन, अमीर देशों से अपील
विश्व स्वास्थ्य संगठन के डीजी ट्रेडोस अदनोम का कहना है कि युवा और स्वस्थ लोगों को वैक्सीन लगाने की जगह अमीर देशों को अपनी डोज कोवैक्स ग्लोबल वैक्सीन-शेयरिंग स्कीम में देनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी देशों में जिन्हें सबसे ज्यादा सुरक्षा की जरूरत है, उन्हें वह मिल जाए। एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा है, 'जनवरी में मैंने एक संभावित नैतिक तबाही की बात की थी।' उन्होंने कहा कि, 'दुर्भाग्य से आज हम वह देख रहे हैं। कुछ अमीर देशों ने ज्यादातर सप्लाई खरीद ली है, अब कम-जोखिम वाले ग्रुपों का वैक्सीनेशन हो रहा है।' हालांकि, उन्होंने ये भी कहा है कि 'मैं समझता हूं कि कुछ देश अपने बच्चों और किशोरों को टीका क्यों लगाना चाहते हैं, लेकिन इस समय मैं उनसे गुजारिश करता हूं कि इसपर फिर से विचार करें और उसकी जगह कोवैक्स को दान दें।'

16 फीसदी आबादी तक पहुंची 44 फीसदी डोज- ट्रेडोस
इसका कारण बताते हुए अदनोम ने कहा है कि, 'क्योंकि कम और कम-मध्य आय वाले देशों में कोविड-19 वैक्सीन की इतनी भी सप्लाई नहीं हो पा रही है कि वह अपने हेल्थकेयर वर्करों का भी टीकाकरण कर सकें और अस्पतालों में ऐसे लोगों की बाढ़ आई हुई है, जिनको तत्काल जान बचाने वाली केयर की जरूरत है।' एएफपी के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया के करीब 210 क्षेत्रों में करीब 140 करोड़ कोविड वैक्सीन की डोज लग चुकी है। इनमें से करीब 44 फीसदी डोज अमीर देशों में लगाई गई है, जिनकी आबादी विश्व की कुल जनसंख्या का महज 16 फीसदी है। जबकि, 29 सबसे गरीब देशों में सिर्फ 0.3 फीसदी डोज ही लग पाई है, जहां विश्व की 9 फीसदी जनसंख्या रहती है।
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'जीवन और आजीविका दोनों को बचाना है'
यही नहीं उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि वैक्सीन आने के बावजूद इस साल पिछले साल के मुकाबले दुनिया में कोरोना वायरस की वजह से ज्यादा लोगों की जान जाएगी। उन्होंने कहा कि 'जन स्वास्थ्य उपायों और टीकाकरण के जरिए जीवन और आजीविका दोनों को बचाना है- इसके अलावा और कोई उपाय नहीं है।' आंकड़ों के मुताबिक चीन के वुहान में 2019 के दिसंबर से लेकर अबतक कोरोना वायरस की वजह से विश्व में कम से कम 33 लाख लोगों की जान जा चुकी है। इस बीच 56 वर्षीय ट्रेडोस ने कहा है कि पिछले हफ्ते उन्होंने भी जिनेवा में वैक्सीन ले ली है, जिसे उन्होंने 'खट्टा-मीठा अनुभव की तरह था' बताया है। क्योंकि, उनकी चिंता दुनियाभर में महामारी का सामना कर रहे हेल्थ वर्करों को लेकर है। उन्होंने इस स्थिति पर दुख जताते हुए कहा है कि 'सच ये है कि बहुत सारे अभी तक सुरक्षित नहीं है, जो दुनियाभर में वैक्सीन की पहुंच में बहुत बड़ी दुखद विकृति जाहिर करता है।'
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