Cursed Diamonds: भारत से चुराए गए शापित हीरे, जिनकी कहानियां कोहिनूर से भी अधिक दिलचस्प हैं
कोहिनूर के किस्से के बारे में अमूमन हर भारतीय जानता है लेकिन दुनिया में दो और ऐसे हीरे हैं जिनकी कहानी कोहिनूर से कहीं अधिक हैरत से भरी हैं।

जैसे-जैसे किंग चार्ल्स-3 की ताजपोशी का दिन नजदीक आ रहा है। ठीक वैसे-वैसे कोहिनूर की चर्चा तेज होती जा रही है। क्वीन एलिजाबेथ के निधन के बाद से कोहिनूर बेहद सुर्खियां बटोरने लगा था इसलिए आगे कोई विवाद न हो बकिंघम पैलेसे ने घोषणा कर दी है कि क्वीन कंसर्ट कैमिला इस हीरे को नहीं पहनेंगी। हालांकि कोहिनूर के किस्से के बारे में अमूमन हर भारतीय जानता है लेकिन दुनिया में दो और ऐसे हीरे हैं जिनकी चर्चा सबसे कीमती और आकर्षक आभूषणों में होती है। ये हीरे भी कोहिनूर जितने ही अधिक शापित हैं और इनकी कहानियां भी उतनी ही दिलचस्प हैं।
कोहिनूर क्यों कहलाया शापित?
इन हीरों की कहानी बताने से पहले हम बताएंगे कि कोहिनूर को शापित क्यों कहा जाता है? कहा जाता है कि कोहिनूर की वजह से कई राजाओं का साम्राज्य तबाह हो गया। इसे हासिल करने के बाद कई सुल्तानों के चमकते सितारे गर्दिश में चले गए। इतिहास में दर्ज है कि जिनके पास कोहिनूर पहुंचा है, शुरू में उनका वर्चस्व खूब परवान चढ़ा, लेकिन बाद में उनका बेहद दर्दनाक अंत हुआ। स्थापत्यकला का स्वर्णिम दिनों में शाहजहां ने बड़े ही शौक से कोहिनूर हीरे को अपने मयूर सिंहासन में जड़वाया लेकिन इसका अंजाम भला नहीं हुआ। शाहजहां को पहले तो पत्नी ने छोड़ा, फिर बेटे में उत्तराधिकार की लड़ाई शुरू हो गई। और एक दिन बेटे ने शाहजहां को नजरबंद कर सत्ता हथिया ली।
नादिरशाह ने दिया कोहिनूर नाम
इसके बाद ये नादिर शाह के पास पहुंचा। कोहिनूर को पहले सामंतिक मणि के नाम से जाना जाता था। नादिरशाह ने ही इसे कोह-ए-नूर यानी कि प्रकाश का पर्वत का नाम दिया। कोहिनूर को पर्शिया ले जाने के कुछ साल बाद नादिर शाह की हत्या कर दी गई। नादिर शाह के बाद कोहिनूर दुर्रानी वंश के पास आया, लेकिन इनका भी साम्राज्य तबाह हो गया। शुजा दुर्रानी के पास से यह हीरा महाराजा रंजीत सिंह के पास पहुंचा। कुछ ही साल बाद रंजीत सिंह की भी मौत हो गई।
अंग्रेजों ने बदला नियम
इस सदियों के युद्ध, विद्रोह, हत्या और यातना के साथ कोहिनूर को एक घातक अभिशाप माना जाने लगा। कोहिनूर के साथ कहानी जुड़ गई कि यह अपने मालिक को दुनिया पर राज करने की शक्ति और शक्ति प्रदान करेगा, लेकिन उसे बड़ी दुर्भाग्य और परेशान करने वाली मौत का सामना करना पड़ेगा। इसके शापित होने की खबर से डरकर अंग्रेजों ने यह नियम बनाया कि इसे कोई भी पुरुष नहीं पहनेगा। हालांकि इसे पहनने के बाद किसी अंग्रेज रानी को दुर्दिन नहीं देखने पड़े लेकिन इससे कोहिनूर हीरे की मनहूसियत खत्म नहीं हुई और दुनिया भर में फैली अंग्रेजों की हुकूमत का अंत हो गया।
आगे उन दो शापित हीरे की कहानी जिनका अतीत भारत से जुड़ा है।
ब्लैक ओर्लोव डायमंड
ब्लैक ओर्लोव डायमंड को ब्रह्मनेत्र के नाम से भी जाना जाता है। यह एक मंदिर में ब्रह्मा की आंख में सजाया गया था। लेकिन इसे 19वीं शताब्दी की शुरुआत में पांडिचेरी में मंदिर से चुरा लिया गया। इस हीरे का मूल वजन 195 कैरेट था लेकिन अब इसका वजन 67.50 कैरेट है। इसे जिस साधू ने चुराया था कुछ ही समय के बाद उसने आत्महत्या कर ली थी। एक साधु ने इसे चुरा लिया और तभी से कहा जाता है कि जिसके पास हीरा होता है वह आत्महत्या कर लेता है।
इसके बाद इसे एक हीरा कारोबारी जे.डब्ल्यू. पेरिस ने हासिल कर लिया और इसे 1932 में अमेरिका लेकर आया। लेकिन इसके तुरंत बाद उसने न्यूयॉर्क में एक गगनचुंबी इमारत से कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। इसके बाद यह रूसी राजकुमारी नादिया आर्लोव के पास पहुंचा। यही इसका नाम ब्लैक आर्लोव रखा गया। लेकिन नादिया की भी मौत हो गई। इसके बाद यह हीरा लियोनिला गैलिस्टाइन के पास पहुंचा और उसने भी नादिया की तरह रोम के किसी इमारत से कूदकर जान दे दी।

इसके बाद इस हीरे को 1947 में चार्ल्स एफ विंसन द्वारा खरीदा गया। उसे पता था कि ये हीरा अभिशप्त है और जिसने भी इसे खरीदा उसकी समय से पूर्व मौत हो गई। इसलिए उसने इसे इस हीरे को तीन हिस्सों में काटा दिया ताकि अलग-अलग हीरे बनाए जा सकें और इसका शाप खत्म किया जा सके। आखिरी बार इसे 2004 में डेनिस पेटिमेजस द्वारा खरीदा गया था। हालांकि हाल की कुछ रिसर्च ने इन दावों पर प्रश्चचिन्ह लगाए गए हैं। अब विशेषज्ञ तो ये भी कह रहे हैं कि इसमें भी संदेह है कि हीरा भारत से चोरी हुआ था। हालांकि जब से हीरे को काटा गया है तब से इसके किसी भी मालिक की मौत नहीं हुई है।
'द होप'
सीता के माथे से चुराया दो होप डायमंड
भारत में आज भी लोग कोहिनूर को सबसे प्रसिद्ध हीरा मानते हैं लेकिन असल में द होप को दुनिया में सबसे प्रसिद्ध हीरा होने का गौरव हासिल है। होप डायमंड अपने उल्लेखनीय रंग, आकार और सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। इसके साथ ही ये अपने मालिकों के लिए दुर्भाग्य लाने के लिए भी बदनाम है। नीले रंग के इस हीरे का वजन 45.52 कैरेट है और यह एक सुंदर पेंडुलम में स्थापित है जो 16 सफेद हीरे से घिरा हुआ है। कहा जाता है कि कि सोलहवीं शताब्दी में टैवर्नियर नाम के एक व्यक्ति ने अपनी भारत यात्रा के दौरान एक मंदिर में देवी सीता की मूर्ति के माथे से यह हीरा चुरा लिया था। उसने हीरा बेच दिया लेकिन देवी के क्रोध से बच नहीं सका क्योंकि रूस में यात्रा के दौरान जंगली कुत्तों ने उसे काटकर मार डाला।
फ्रांस के सम्राट और महारानी को लगा शाप
इसके बाद ये हीरा फ्रांस के राजा लुई सोलहवें के पास पहुंचा और इस पेंडेंट को प्रिंसेस डी लैम्बल्ली और मैरी एंतोनेत ने भी पहना था। फ्रांसीसी क्रांति के दौरान, क्रांतिकारियों द्वारा मैरी और किंग लुइस दोनों का सिर काट दिया गया था और भीड़ द्वारा राजकुमारी लैम्बल्ली को पीट-पीटकर मार डाला गया था। यह हीरा बाद में जैक्स कोलेट के पास पहुंचा जिसने आत्महत्या कर ली। एक अन्य मालिक सुरबाया को उसके शाही प्रेमी ने चाकू मार कर मार डाला, जिसने उसे होप हीरा उपहार में दिया था। एक अन्य मालिक साइमन मोंथाराइड का एक गाड़ी दुर्घटना में दुखद अंत हुआ जिसमें उनके पूरे परिवार की भी मृत्यु हो गई।

बाद में ज्वेलरी ब्रांड कार्टिए ने द होप हीरे को सफेद हीरों के एक हार में मढ़कर इसे एवेलिन वॉल्श मैकलीन को साल 1912 में बेच दिया। लेकिन वह भी इसके अभिशाप से नहीं बच सकीं क्योंकि उनके बेटे की कार दुर्घटना में मौत हो गई और उनकी बेटी की ड्रग ओवरडोज से मौत हो गई। उसके पति ने उसे दूसरी महिला के लिए छोड़ दिया और वह एक सैनिटेरियम में अकेली ही मरी। 1958 में ये हीरा जौहरी हैरी विंस्टन के पास पहुंचा। लेकिन अभिशाप से डरकर उन्होंने इसे इसी वर्ष स्मिथसोनियन म्यूज़ियम को दान कर दिया था। तब से ये हीरा वहीं राष्ट्रीय संग्रहालय की शोभा बढ़ा रहा है।












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