ब्लड कैंसर के मरीजों में कम प्रभावी हो सकती है कोविड-19 वैक्सीन: शोध
शोधकर्ताओं द्वारा किए गए दो नए अध्ययनों में दावा किया है कि दो-खुराक वाली एमआरएनए कोविड-19 वैक्सीन (mRNA Covid-19 vaccine) कुछ प्रकार के रक्त कैंसर से जूझ रहे लोगों के लिए कम प्रभावी हो सकती है।
यरूशलेम, 18 अप्रैल। शोधकर्ताओं द्वारा किए गए दो नए अध्ययनों में दावा किया है कि दो-खुराक वाली एमआरएनए कोविड-19 वैक्सीन (mRNA Covid-19 vaccine) कुछ प्रकार के रक्त कैंसर से जूझ रहे लोगों के लिए कम प्रभावी हो सकती है। बल्ड नाम की पत्रिका में छपे इस अध्ययन के अनुसार जो लोग क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (सीएलएल) और मल्टीपल मायलोमा जैसे बल्ड कैंसर के प्रकारों से जूझ रहे हैं उनमें स्वस्थ व्यक्ति के मुकाबले एमआरएनए कोविड-19 वैक्सीन का प्रभाव कम देखने को मिल सकता है।

शोधकर्ताओं ने कहा, 'भले की कोरोना वायरस की वैक्सीन सीएलएल के मरीजों पर कम असर दिखाए फिर भी वे वैक्सीन जरूर लगवाएं और संभव हो सके तो सीएलएल के उपचार से पहले ही वैक्सीन लगवाएं।'
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सीएलएल के मरीजों पर हुआ शोध
शोधकर्ताओं ने वैक्सीन के प्रभाव को जानने के लिए सीएलएल के 167 मरीजों और 53 स्वस्थ वयष्कों को फाइजर की mRNA प्रकार की BNT162b2 लगाई। इस शोध में शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग कैंसर का उपचार करा रहे थे उनमें वैक्सीन की प्रतिरक्षा दर 16 प्रतिशत कम थी। लेकिन जो व्यक्ति सीएलएल से पीड़ित थे लेकिन उन्होंने अभी तक अपना इलाज शुरू नहीं कराया था उनमें वैक्सीन की प्रतिरक्षा दर 55.5 प्रतिशत पाई गई। इसके अलावा जिन लोगों ने सीएलएल का उपचार 1 साल पहले कराया था उनमें वैक्सीन की प्रतिरक्षा दर 94 प्रतिशत पाई गई।
इस शोध के आधार पर शोधकर्ताओं ने कहा कि आम नागरिकों पर वैक्सीन का प्रभाव सीएलएल का इलाज करा रहे व्यक्ति की तुलना में ज्यादा है। इसके अलावा शोधकर्ताओं ने पाया कि सीएलएल वाले रोगियों में एंटीबॉडी भी कम थे, जो कि वैक्सीन की प्रतिरक्षा दर में कमी का कारण हो सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि मल्टीपल मायलोमा से जूझ रहे रोगियों में भी इसी प्रकार के परिणाम सामने आए हैं। मल्टीपल मायलोमा से जूझ रहे बुजुर्गों को जब वैक्सीन दी गई तो उनमें से केवल 20.6 प्रतिशत लोगों में न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज मिलीं












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