Coronavirus Vaccine:टीकाकरण अभियान में दुनिया के मुकाबले कहां है भारत ? जानिए
नई दिल्ली: ब्लूमबर्ग कोविड-19 वैक्सीन ट्रैकर और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के जरिए दुनियाभर से जुटाए गए डेटा के मुताबिक अभी तक विश्व में 58 करोड़ से ज्यादा लोगों को कोरोना वायरस को रोकने वाली वैक्सीन लग चुकी है। अगर इस हिसाब से देखेंगे तो इसमें भारत का हिस्सा 10 फीसदी से ज्यादा है। लेकिन, अगर अपनी आबादी के मुकाबले इसकी तुलना करेंगे तो देश में अभी कोरोना के खिलाफ जंग की बेहतर स्थिति में आने के लिए बहुत ही ज्यादा कोशिशों की जरूरत है। दुनिया में जिन 58 करोड़ लोगों को वैक्सीन की डोज लगने की बात की गई है, उनमें से 12.7 करोड़ लोगों को पूरी खुराक पड़ चुकी है। लेकिन, वैश्विक आबादी के मुकाबले यह 2 फीसदी से भी कम है। क्योंकि, अनेकों देश ऐसे हैं, जहां यह अभियान अभी तक शुरू भी नहीं हो पाया है। लेकिन, कई छोटे-छोटे देश विश्व के कई बड़े देशों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

इजरायल
अपने नागरिकों को वैक्सीन लगाने में इजरायल बहुत ही आगे है। उसने अपने 48 लाख नागरिकों को टीके की पूरी खुराक दे दी है। जबकि, उसकी कुल आबादी के 52.6 फीसदी लोगों को यह टीका दिया जा चुका है। क्षेत्रफल और आबादी दोनों में छोटे होने के बावजूद यह बहुत ही विकसित देश है, जहां का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर काफी दुरुस्त है और इसलिए उसने यह कामयाबी हासिल की है। इंपीरियल कॉलेज लंदन और यूगॉव के सर्वे के मुताबिक इसका कारण यह भी है कि इजरायल के 48 फीसदी लोगों को वैक्सीन में पूरा यकीन है और सिर्फ 4 फीसदी ही ऐसे हैं, जिन्हें उसको लेकर आशंका है। हाई-इनकम ग्रुप वाले देशों में यूके ही है, जहां 52 फीसदी लोग वैक्सीन में यकीन कर रहे हैं। फ्रांस और जर्मनी में यह भरोसा क्रमश: 18 फीसदी और 22 फीसदी है।

सेशेल्स और यूएई
इसी तरह सेशेल्स जैसे छोटे देश ने अपने 37.76 फीसदी नागरिकों को कोरोना का डोज लगा दिया है। वहां अबतक कुल 36,866 लोगों को वैक्सीन की पूरी डोज लग चुकी है। इसी तरह संयुक्त अरब अमीरात में 22.39 फीसदी लोगों को कोरोना की खुराक दी जा चुकी है। 21.9 लाख लोग दोनों टीका लगवा चुके हैं। यूएई में 16 साल से ज्यादा के हर व्यक्ति को कोरोना का टीका लगाया जा रहा है।

मोनाको और चिली
छोटे से देश मोनाको में 8,331 लोगों को वैक्सीन की पूरी डोज दी जा चुकी है। जबकि वहां 21.38 फीसदी लोगों को वैक्सीन लग चुकी है। वहां के राष्ट्रपति 80,000 लोगों को जल्द से जल्द वैक्सीन लगाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। वहीं चिली में अबतक कुल 18.54 फीसदी लोगों को वैक्सीन पड़ चुकी है। इनमें से 30 लाख से ज्यादा लोग ऐसे हैं, जो दोनों डोज ले चुके हैं। लैटिन अमेरिकी देश कोविड-19 के सबसे भयंकर संक्रमण के दौर से गुजर चुका है। वह कई तरह के संकटों से गुजर रहा है, लेकिन फिर भी वैक्सीन के मामले में यह बेहतर प्रदर्शन करके दिखा रहा है।

अमेरिका
अमेरिका में वहां की आबादी के 16.28 फीसदी लोगों को वैक्सीन पड़ चुकी है। वहां 5.34 करोड़ लोग तो ऐसे हैं, जो दोनों डोज ले चुके हैं। अमेरिका कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देश रहा है, लेकिन जबसे वैक्सीन की शुरुआत हुई है, उसने अपनी स्थिति काफी नियंत्रित कर ली है। वहां की नई सरकार ने कई कंपनियों से वैक्सीन के लिए डील की है। पिछले राष्ट्रपति ट्रंप ने इस संबंध में जो कदम उठाकर गए थे, वह भी आज की तारीख में काफी कारगर साबित हो रही है। अमेरिकी सरकार ने वैक्सीनेशन ड्राइव के लिए बहुत बड़े बजट को भी मंजूरी दी है।

ये छोटे-छोटे देश भी टीकाकरण में हैं आगे
बहरीन जैसे देश में 15.42 फीसदी लोगों को टीका लग चुका है। वहां पर 2,53,000 लोगों को इसकी पूरी खुराक पड़ चुकी है। वहीं सर्बिया में भी 14.49 फीसदी आबादी को टीका पड़ चुका है। वहां करीब 10 लाख लोग इसकी पूरी डोज ले चुके हैं। एक और छोटा देश है माल्टा, जहां की 10.41 फीसदी आबादी को कोरोना का टीका लग चुका है। वहीं मोरक्को में भी यह संख्या 9.78 फीसदी तक पहुंच चुकी है।

भारत में क्या हैं हालात ?
भारत और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी आबादी वाले देश ही नहीं हैं, ये दुनिया के दो सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक देश भी हैं। लेकिन, आबादी के हिसाब से यहां औसतन कम लोगों को ही यह टीका लग पाया है। जहां तक चीन का सवाल है तो उसका सही डेटा जुटा पाना किसी के लिए भी लगभग नामुमकिन है। वहीं भारत की बात करें तो यहां पर शुक्रवार सुबह तक के आंकड़ों के मुताबिक 6,34,70,750 लोगों को टीका लगाया जा चुका है। यह देश की आबादी के 10 फीसदी से कम है। इनमें से करीब एक करोड़ लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज पड़ चुकी है।
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