हवा में पाया गया कोरोना वायरस, कितना खतरनाक है ये, जांच जारी

नई दिल्ली। कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। दुनियाभर के देश कोरोना की चपेट में है। वहीं अब इस वायरस का एक और खतरनाक रूप सामने आया है। कोरोना वायरस का जेनेटिक मटेरियल हवा में पाया गया है। हालांकि कोरोना का ये रूप कितना खतरनाक है इसे लेकर अभी जांच चल रही है। चीन के वुहान में शोधकर्ताओं को हवा में नोवेल कोरोना वायरस के जेनेटिक मटीरियल मौजूद होने के सबूत मिले हैं। इसके बाद मुश्किल और बढ़ सकती है।

 हवा में कोरोना

हवा में कोरोना

चीन के वुहान में वैज्ञानिक के लान और उनकी टीम ने फरवरी और मार्च 2020 के दौरान कोविड-19 के मरीजों का इलाज करने वाले दो सरकारी अस्पतालों के आसपास एरोसोल जाल स्थापित किए। अध्ययन से पता चला कि जिस इलाके में डॉक्टर्स जिन इलाकों में सुरक्षात्मक उपकरण रखते थे, वहां आरएनए की मौजूदगी ज्यादा पाई जाती थी। इसके बाद इसे लेकर जांच शुरू हुई। हालांकि अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि हवा में पाए गए कोरोना वायरस में संक्रमित करने वाले कण हैं या नहीं। चीन के वैज्ञानिक इस पर जांच कर रहे हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक वायरल आरएनए ज्यादातर उन जगहों पर जमा हुआ था जहां मेडिकल स्टाफ को अपने प्रॉटेक्टिव गियर उतारने होते थे। इसी जगह से कोरोना वायरस हवा में फैला है। वहीं गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक वायु प्रदूषण के कणों में नोवेल कोरोना वायरस के पाए जाने का दावा किया गया है।

कितने खतरनाक है हवा में पाए गए कोरोना वायरस

कितने खतरनाक है हवा में पाए गए कोरोना वायरस

हवा में पाए गए ये कण लोगों को बीमार कर सकते हैं या नहीं, इसे लेकर अभी जांच की जा रही है। वहीं ईरान में वैज्ञानिकों को प्रदूषण के कणों पर कोरोना वायरस मिले है। नेचर जर्नल में प्रकाशित इस रिसर्च के मुताबिक कोरोना वायरस पर किए जा रहे इस अध्ययन का सैंपल साइज काफी छोटा है। वैज्ञानिकों ने 31 लोकेशन में से 40 से कुछ ज्यादा सैंपल इकट्ठे किए गए हैं।

 कैसे खुद को कोरोना से बचाए

कैसे खुद को कोरोना से बचाए

कोरोना वायरस पर शोध कर रहे वैज्ञानिकों का मानना है कि सैनिटाइजेशन, अच्छे वेंटिलेशन, भीड़भाड़ से दूरी बरतने और मास्क लगाकर हम हवा में मौजूद कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा कम कर सकते हैं। अभी तक के स्टडी में यहीं बात सामने आई है कि कोरोना का संक्रमण इंसान से इंसान में फैलता है या रेस्पायरेटरी सिक्रेशन से फैलता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि सार्स-कोव-2 के हवा से फैलते सा संभावना बेहग कम है। इस पर अध्ययन जारी है।

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