52 साल बाद पता चला किसने लूटा था बैंक, फ़िल्म देख बनाया था प्लान

अमेरिका में बैंकों में हुई सबसे कुख्यात लुट की घटनाओं में गिनी जानेवाली एक लूट के 52 साल बाद, आख़िरकार ये पता लगा लिया गया है कि इसके पीछे कौन था. अमेरिकी अधिकारियों ने इसे लेकर जानकारी दी है.

Cleveland bank heist mystery solved after 52 years

टेड कॉनराड ओहायो के क्लीवलैंड में सोसाइटी नेशनल बैंक में बतौर एक टेलर काम करते थे. अधिकारियों के मुताबिक उन्होंने जुलाई 1969 में इस बैंक में बड़ी चोरी की.

उस समय कॉनराड बैंक से 2 लाख 15 हज़ार डॉलर लेकर गायब हो गए थे. आज की तारीख में उस रक़म की क़ीमत 1.7 मिलियन डॉलर होगी.

यूएस मार्शल सर्विस के जांचकर्ताओं ने कहा है कि इस घटना के बाद कॉनराड ने एक शांत और सरल जीवन बिताया. इस साल मई में फेफड़ों के कैंसर के कारण कॉनराड की मौत हो गई. जब उन्होंने बैंक में चोरी की, तब उनकी उम्र सिर्फ 20 साल थी.

माना जाता है कि उन्होंने बैंक की सुरक्षा खामियों का फ़ायदा उठाया और एक शुक्रवार की शाम भूरे रंग के कागज़ के बैग में पैसे भरे और बड़ी शांति के साथ बैंक से बाहर निकले.

दो दिन बाद जब बैंक के बाकी कर्मचारियों को ये पता चला कि पैसे चोरी जा चुके हैं तब तक कॉनराड गायब हो चुके थे. इसके बाद 50 सालों तक जांच एजेंसियां उन्हें खोजती रहीं. उनकी कहानियां टीवी शो 'अमेरिकाज़ मोस्ट वॉन्डेट' और 'अनसॉल्व्ड मिस्ट्री' में दिखाई गई.

मार्शल सर्विस के मुताबिक़, कॉनराड ने कथित तौर पर अपने दोस्तों को बैंक में चोरी करने की अपनी योजना के बारे में बताया था और दावा किया था कि यह करना आसान होगा. उन्हें साल 1968 में आई स्टीव मैक्वीन की रॉबरी फिल्म 'द थॉमस क्राउन अफ़ेयर' बहुत पसंद थी, और बैंक से पैसे उड़ाने की तैयारी के दौरान उन्होंने इस फ़िल्म को दर्जनों बार देखा.

मार्शल का कहना है कि कॉनराड ने अपना नाम बदल कर थॉमस रन्डेल रख लिया था और चोरी के तुरंत बाद वाशिंगटन और लॉस एंजिल्स भाग गए. कुछ वक़्त बाद वह बोस्टन के बाहरी इलाक़े में स्थायी रूप से बस गए. ये जगह बैंक से 100 किलो मीटर की दूरी पर थी.

जांचकर्ताओं का कहना है कि वह बाद में एक शांत और सरल जीवन जी रहे थे. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 40 साल उन्होंने गोल्फ के पेशेवर खिलाड़ी और इस्तेमाल की गई कार के डीलर रूप में काम करते हुए बिताए.

यह मामला दशकों तक ठंडा पड़ा रहा, लेकिन जब जांचकर्ताओं ने एक अख़बार में 'रन्डेल' नाम के साथ उनका मृत्यु संदेश देखा तो जांच तेज़ हुई, 1960 के दशक के दौरान उनके फाइल किए गए दस्तावेजों से उनके हालिया दस्तावेजों के मिलान पर पाया गया कि रन्डेल और कॉनराड दोनों एक ही शख़्स हैं.

मार्शल पीटर एलियट इस केस के मुख्य जांचकर्ताओं में से एक हैं. ऐसे अपराधियों के बारे में पता लगाने का हुनर उन्हें अपने पिता से मिला. उनके पिता ये जानने के लिए उत्सुक रहते थे कि कैसे कोई निडर चोर बनता है और वह इस केस की जांच से भी जुड़े हुए थे.

एलियट कहते हैं, ''मेरे पिता ने कभी कॉनराड की तलाश बंद नहीं की और साल 2020 में अपनी मौत तक वह इस केस का क्लोज़र चाहते थे. उम्मीद है कि आज मेरे पिता की आत्मा को ये जानकर थोड़ी शांति मिलेगी कि मेरी जांच और अमेरिकी मार्शल सर्विस ने दशकों पुराने इस केस को सुलझा लिया है.''

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