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ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ चीन में बनी वैक्सीन फ्लॉप साबित, दुनियाभर के करोड़ों लोगों को बहुत बड़ा झटका

चायनीज वैक्सीन लेने वाले करोड़ों लोगों को बड़ा झटका लगा है। प्रयोगशाला में रिसर्च के दौरान पता चला है कि, ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ चायनीज वैक्सीन सिनोवैक बेअसर हो गई है।

हांगकांग, दिसंबर 15: पूरी दुनिया में इस वक्तो ओमिक्रॉन वेरिएंट फैल रहा है और कोरोना वायरस के नये वेरिएंट को लेकर पूरी दुनिया में टेंशन हैं। दुनियाभर के वैज्ञानिक हर वैक्सीन का परीक्षण ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ कर रहे हैं और जांच रहे हैं, कि ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ किस देश का वैक्सीन कितना कारगर है। लेकिन, उस वक्त दुनिया भर के करोड़ों लोगों को गहरा झटका लगा है, जब रिसर्च में पता चला है कि, ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ चीन की वैक्सीन पूरी तरह फ्लॉप हो गई है।

ओमिक्रॉन के खिलाफ चीनी वैक्सीन बेअसर

ओमिक्रॉन के खिलाफ चीनी वैक्सीन बेअसर

सिनोवैक बायोटेक लिमिटेड द्वारा बनाया गया टीका, जो दुनिया में सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया गया है, वो कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ पूरी तरह बेअसर हो गया है। रिसर्च में पता चला है कि, ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलफ एंटीबॉडी बनाने में नाकामयाब रहा है। रिसर्च के दौरान पता चला है कि, चीन में बनाई गई वैक्सीन का ओमिक्रॉन वेरिएंट पर कोई असर नहीं हो रहा है। वैज्ञानिकों के इस रिसर्च रिपोर्ट के बाद उन करोड़ों लोगों को बहुत बड़ा झटका लगा है, जिन्होंने चायनीज वैक्सीन लिया हुआ है। कोविड 19 के खिलाफ चायनीज वैक्सीन पूरी तरह से बेअसर साबित हुआ है।

हांगकांग विश्वविद्यालय में रिसर्च

हांगकांग विश्वविद्यालय में रिसर्च

मंगलवार देर रात हांगकांग विश्वविद्यालय द्वारा जारी रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि, ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ चायनीज वैक्सीन बेअसर साबित हुई है। शोधकर्ताओं की एक टीम के एक बयान में कहा है कि, 25 लोगों के समूह में सिनोवैक के शॉट के साथ पूरी तरह से टीका लगाया गया है, जिसे कोरोनवैक कहा जाता है, लेकिन, आश्चर्यजनक तौर पर जिन लोगों को भी चायनीज वैक्सीन दिया गया है, उनके अंदर ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ एंटीबॉडी डेवलप नहीं हो पाया।

फाइजर वैक्सीन बनाम चीनी वैक्सीन

फाइजर वैक्सीन बनाम चीनी वैक्सीन

हांगकांग यूनिवर्सटी ने अपनी रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि, चीनी वैक्सीन सिनोवैक के बेअसर रहने के बाद 25 लोगों की एक दूसरी टीम पर अमेरिका में बनी वैक्सीन फाइजर के टीकों के साथ टेस्ट किया गया। जिसमें पता चला है कि, ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ फाइजर की वैक्सीन काफी असरदार है और फाइजर का टीका लेने वाले लोगों के शरीर में पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडी का निर्माण हुआ है, जिसका दावा फाइजर वैक्सीन बनाने वाली कंपनी ने किया था। हांगकांग विश्वविद्यालय में संक्रामक रोगों में अत्यधिक सम्मानित प्रोफेसर क्वोक-युंग यूएन के नेतृत्व में किए गये रिसर्च के बाद मेडिकल जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ चायनीज वैक्सीन फ्लॉप साबित हुई है।

पूरी तरह बेअसर चायनीज वैक्सीन

पूरी तरह बेअसर चायनीज वैक्सीन

रिसर्च में शामिल वैज्ञानिकों ने कहा है कि, चायनीज वैक्सीन सिनोवैक का डोज ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ किस तरह की प्रतिक्रिया करता है, उसके बारे में अभी तक बहुत कुछ पता नहीं चल पाया है। खासकर टी कोशिकाएं, वायरस से संक्रमित कोशिकाओं के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रणाली पर वैक्सीन किस तरह से प्रतिक्रिया देती है, इसका पता भी नहीं चल पाया है। लेकिन, वैक्सीन को लेकर जो निष्कर्ष निकला है, वो उन लोगों के लिए बहुत बड़ा झटका है, जिन्होंने चीन की वैक्सीन का टीका लगवाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की वैक्सीन सिनोवैक की 2.3 अरब खुराक दी गई है। यानि, चीनी वैक्सीन की 203 करोड़ खुराक दी गई है। यानि, करीब 100 करोड़ लोगों को वैक्सीन की खुराक दी गई है। जो अब बीच मझधार में फंस गये हैं।

चीनी वैक्सीन दुनिया से बड़ा धोखा?

चीनी वैक्सीन दुनिया से बड़ा धोखा?

वैज्ञानिकों का कहना है कि, चीन की वैक्सीन के ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ बेअसर रहने के बाद पूरी दुनिया में कोविड के खिलाफ लड़ाई को बहुत बड़ा झटका लगा है। क्योंकि, डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ ओमिक्रॉन वेरिएंट चार गुना तेज रफ्तार से फैलता है, लिहाजा जिन लोगों ने चायनीज वैक्सीन की खुराक ली है, उनका शरीर एक बार फिर से कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ एक्सपोज हो चुका है और उनके अदर वायरस के इस वेरिएंट से लड़ने की क्षमता नहीं बची है। लिहाजा, आशंका इस बात को लेकर है, कि क्या दुनिया ने अभी तक कोरोना वायरस के खिलाफ जो लड़ाई लड़ी है, वो व्यर्थ साबित होने वाली है। विशेषज्ञों ने कहा है कि, पूरी दुनिया के करीब 140 करोड़ लोगों को चीनी वैक्सीन दिया गया है, लिहाजा अब उन लोगों को फिर से वैक्सीन लेना होगा, तभी वो ओमिक्रॉन वेरिएंट से खुद को बचा पाएंगे।

बुरी तरह फंस गया चीन?

बुरी तरह फंस गया चीन?

हांगकांग विश्वविद्यालय में महामारी विज्ञान के प्रोफेसर बेंजामिन काउलिंग ने कहा कि, जो नतीजे मिले हैं, वो चीन के लिए ही सबसे खतरनाक और चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि, "चीनी अधिकारियों ने देश भर में उच्च टीकाकरण दर के लिए कड़ी मेहनत की है, लेकिन वायरस का ये म्यूटेंट ओमिक्रॉन अब चीन के लिए मुसीबत बन सकता है, क्योंकि अब संभावना इसी बात की है, कि देश में नये सिरे से वैक्सीनेशन की प्रक्रिया को अंजाम देना हो सकता है।'' उन्होंने कहा कि, "चीन के सामने अब दो गुना चुनौती यह है कि यह कैसे सुनिश्चित किया जाए कि उनकी आबादी फिर से ओमिक्रॉन और भविष्य के किसी भी नये वेरिएंट से सुरक्षित रहे और बिना किसी परेशानी के दूसरे देशों के साथ व्यापार कर सके।''

डेल्टा वेरिएंट ने किया चीन को परेशान

डेल्टा वेरिएंट ने किया चीन को परेशान

कोरोना वायरस की पहले लहर के दौरान बच निकलने वाला चीन डेल्टा वेरिएंट के आगे पूरे साल संघर्ष करता रहा और डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ भी चायनीज वैक्सीन आंशिक तौर ही असरदार साबित हो पाई थी, लिहाजा, अब जबकि चीन में भी ओमिक्रॉन वायरस के मामले पहुंचने लगे हैं, तो चीन की परेशानी काफी बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय अधिकारियों ने शंघाई डिजनीलैंड में हजारों लोगों को क्वारंटाइन कर रखा है, वहीं जियांग्शी प्रांत में भी हजारों लोगों को क्वारंटाइन रखा गया है। संक्रमण की रफ्तार को रोकने या कम करने के लिए मुख्यभूमि चीन और हांगकांग में भी सबसे सख्त यात्रा प्रतिबंध हैं। हांगकांग में, यू.एस. और यू.के. जैसे स्थानों से लौटने वाले लोगों को अब 21 दिनों के सख्त क्वारंटाइन से गुजरना होगा और व्यापारियों का कहना है कि, चीन सरकार के इस नियम से चीन में व्यापार को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचेगा।

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