ताइवान पर बोला भी तो विध्वंस मचा देंगे, चीन ने ऑस्ट्रेलिया को दी तबाह कर देने की धमकी

ताइवान की वजह से ऑस्ट्रेलिया और चीन आमने-सामने है। चीनी डिप्लोमेट ने कहा है कि, अगर ऑस्ट्रेलिया ताइवान को बचाने की कोशिश करता है, तो ऑस्ट्रेलिया में तबाही मचा दी जाती है।

बीजिंग, नवंबर 15: ताइवान की रक्षा और स्वतंत्रता की बात करने वाले ऑस्ट्रेलिया को चीन ने बर्बाद करने की धमकी दी है। चीन के एक पूर्व अधिकारी ने धमकी देते हुए कहा है कि, अगर ताइवान को बचाने की कोशिश ऑस्ट्रेलिया की तरफ से किया जाता है, तो फिर ऑस्ट्रेलिया को पूरी तरह से तबाह कर दिया जाएगा। ताइवान को लेकर लगातार चीन पर दबाव बढ़ता जा रहा है और इन सबके बीच चीन काफी ज्यादा आक्रामकता दिखा रहा है और अब देशों को धमकाने का काम कर रहा है।

ऑस्ट्रेलिया को चेतावनी

ऑस्ट्रेलिया को चेतावनी

चीन के कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व नेता विक्टर गाओ, जो कभी कम्युनिस्ट नेता देंग शियाओपिंग के ट्रांसलेटर थे और अब सरकार के लिए एक अखबार के लिए काम करते हैं, उन्होंने विश्व के सभी देशों को धमकी देते हुए कहा है कि, सभी देश ताइवान से दूर रहें। उन्होंने धमकी देते हुए कहा कि, ताइवान की रक्षा करना तो दूर, ताइवान की सीमा से 180 किलोमीटर की दूर सभी देश रहें, नहीं तो तबाही मचा दी जाएगी। आपको बता दें कि, ताइवान, जिसका समर्थन अमेरिका और जापान करता है, वो 1949 में गृहयुद्ध के बाद चीन से अलग हो गया था और खुद को एक स्वतंत्र देश मानता है। ताइवान एक लोकतांत्रिक देश है और इसके सभी नेता चुने हुए हैं, जो बीजिंग के साम्राज्यवाद और अधिनायकवादी शासन का घोर विरोध करते हैं।

ताइवान पर आक्रामक चीन

ताइवान पर आक्रामक चीन

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बार-बार कहा है कि, यदि चीन को जरूरत महसूस हुई तो वो मिलिट्री का इस्तेमाल कर ताइवान को मुख्य चीन में मिलाने के लिए कभी भी तैयार है। आपको बता दें कि, चीन ने प्लान बना रखा है कि उसे 2027 तक ताइवान पर किसी भी हाल में कब्जा करना है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पिछले महीने कसम खाई थी कि, अगर ताइवान को जीतने की कोई कोशिश की गई तो अमेरिकी सैनिक चीन के रास्ते में खड़े होंगे। वहीं, पिछले शुक्रवार को ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री पीटर डटन ने कहा था कि, ये सोचना ही अकल्पनीय होगा, कि अगर चीन ताइवान के ऊपर हमला करेगा तो ऑस्ट्रेलियाई सैनिक इसका विरोध नहीं करेंगे। उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि, ताइवान की रक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया के लिए हमेशा तैयार रहेगा। ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री के इस बयान के बाद चीन की तरफ से काफी सख्त बयान दिया है और हस्तक्षेप करने पर ऑस्ट्रेलिया को बर्बाद करने की धमकी दी है।

अमेरिका से युद्ध करने में परहेज नहीं

अमेरिका से युद्ध करने में परहेज नहीं

अमेरिकन न्यूज शो '60 मिनट्स' में बात करते हुए चीनी नेता विक्टर गाओ वे कहा कि, ''जो लोग चीन के एकीकरण को रोकना चाहते हैं, वो नाकामयाब होंगे''। उन्होंने कहा कि, ''अगर ऑस्ट्रेलिया चीन की मुख्य भूमि और चीन के ताइवान से पुनर्मिलन के लिए चीन के अभियान में अमेरिकी सैनिकों के साथ लड़ने के लिए जाता है, तो आप सबसे बुरी चीज के बारे में बात कर रहे हैं जिसका आप सपना देख सकते हैं, जो चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच युद्ध का अंजाम होगा''। उन्होंने कहा कि, ''अगर ऐसा होता है, तो युद्ध की स्थिति जल्द ही ऑउट ऑफ कंट्रोल हो जाएगा और वहां तबाही मच जाएगी''।

ताइवान के पास कितनी शक्ति?

ताइवान के पास कितनी शक्ति?

ताइवान एक छोटा देश है, लिहाजा उसके पास सैन्य शक्ति तो कम है और चीन के मुकाबले कुछ भी नहीं है, लेकिन ताइवान को अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन का मजबूती से समर्थन मिला हुआ है। ताइवान की रक्षा के लिए हमेशा अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर साउथ चायना सी में रहता है और इस वक्त अमेरिका के साथ साथ जापान और ब्रिटेन के एयरक्राफ्ट कैरियर भी भारी हथियारों के साथ साउथ चायना सी में मौजूद हैं। ताइवान के राष्ट्रपति ये भी मानती हैं कि ताइवान जितनी ज्यादा दूसरे देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करता है, चीन उतना ज्यादा प्रेशर बनाता है। इस बाक राष्ट्रपति त्साई के संबोधन के बाद, ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने मिसाइल लांचर और बख्तरबंद वाहनों सहित हथियारों की एक श्रृंखला दिखाई। वहीं, ताइवान की सेना ने लड़ाकू जेट और हेलीकॉप्टर्स का भी प्रदर्शन किया है।

ताइवान में सर्वे क्या कहता है?

ताइवान में सर्वे क्या कहता है?

ताइवान में एक बार चीन में शामिल होने या नहीं होने को लेकर सर्वे किया गया था, जिसमें ताइवान के लोगों ने स्वतंत्र राज्य के पक्ष में ही वोट दिया था और चीन के साथ एकीकरण की बात को सिरे से खारिज कर दिया था। जिसके बाद चीन लगातार ताइवान को डराने के लिए लड़ाकू जहाजों को भेजता रहता है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग कई बार कह चुके हैं, कि अगर ताइवान शांति से नहीं मानता है, तो उसे सैन्य शक्ति के दम पर चीन में मिलाया जाएगा। आपको बता दें कि, ताइवान एक जीवंत लोकतंत्र के रूप में विकसित हुआ है, जबकि चीन एक गहन सत्तावादी कम्युनिस्ट राज्य बना हुआ है। पिछले साल सितंबर से अब तक चीन ताइवान की तरफ 800 से ज्यादा बार फाइटर जेट उड़ा चुका है।

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