चीन में बेरोजगारी ने तोड़े रिकॉर्ड, पढ़े-लिखे डिग्रीधारियों को नहीं मिल रही नौकरी, हर पांचवां युवक बरोजगार
चीन में लगभग 1.16 करोड़ छात्र नौकरी करने के लिए तैयार हैं। चीन की ताजा हालत देख इतनी बड़ी तादाद के लिए नौकरी मिलना मुश्किल होने वाला है।
दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने के लिए अमेरिका को टक्कर दे रहा चीन अब एक अभूतपूर्व रोजगार-संकट का सामना कर रहा है। चीन में लाखों पढ़े-लिखे युवा नौकरियों की तलाश में भटक रहे हैं।
नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टेटिस्टिक्स के मुताबिक चीन में मई में बेरोजगारी दर 5.2 फीसदी रही। जबकि 16 से 24 साल के युवाओं की बेरोजगारी दर 20.8 फीसदी रही। ठीक एक महीने पहले ये आंकड़ा 20.4 फीसदी था।

हाल ही में चीन की यात्रा पर गए जेपी मॉर्गन के सीईओ जेमी डिमन ने इस आंकड़े पर चिंता जताई है। उन्होंने ब्लूमबर्ग टीवी को दिए गए साक्षात्कार में कहा कि यह एक डरावनी संख्या है। जेमी जिमन ने कहा कि चीन को [आर्थिक] विकास की आवश्यकता है।
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में लगभग 1.16 करोड़ छात्र नौकरी करने के लिए तैयार हैं। चीन की ताजा हालत देख इतनी बड़ी तादाद के लिए नौकरी मिलना मुश्किल होने वाला है। हालांकि, बढ़ती बेरोजगारी को देखते हुए चीनी सरकार द्वारा नजरअंदाज नहीं किया गया है, और वह इस मुद्दे को हल करने के लिए सरकार अपने स्तर से प्रयास कर रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक सुस्त पड़ी इकोनॉमी को फिर से रफ्तार देने के लिए चीन ने ब्याज दर में कटौती करने का फैसला किया है। पीपल्स बैंक ऑफ चायना ने अपनी प्रमुख नीति दर - मध्यम अवधि की उधार दर को 10 बेसिस प्वाइंट घटाकर 2.75% से 2.65% कर दिया है।
ब्याज दरों में ये कटौती अगस्त 2022 के बाद पहली बार हुई है। 10 महीने के बाद उठाए गए इस कदम से माना जा रहा है कि चीन की बैंगिंग प्रणाली में तरलता को बढ़ावा मिलेगा और अल्पकालिक ऋण सस्ता हो जाएगा। क्योंकि इस नवीनतम कटौती के बाद चीन के बैंक ब्याज दरें घटाएंगे और लोन बांटने की रफ्तार तेज होगी।
यह ब्याज दरों में कटौती का फैसला ऐसे वक्त पर आया है, जब चीन के आधिकारिक आंकड़े ये बताते हैं कि मई में चीन की आर्थिक गतिविधियां धीमी हुई हैं। अप्रैल में औद्योगिक उत्पादन 5.6 फीसदी से घटकर 3.5 फीसदी रह गया है। जबकि रिटेल बिक्री 12.7 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी है, जो कि उम्मीद से काफी कम है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि चीन में ब्याज दरों में कटौती यहीं नहीं रुकेगी बल्कि केंद्रीय बैंक आगे भी दरों में कटौती को जारी रखेगा जिससे सुस्त पड़ी इकोनॉमी में थोड़ी जान आएगी।












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