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China में कैसे मर गए 76 युवा वैज्ञानिक? क्या फिर महामारी फैलाने वाला है ड्रैगन?

China: युवा वैज्ञानिकों की मृत्यु दर को ट्रैक करने वाले एक नए डेटाबेस ने शिक्षाविदों और समाज में बड़ी चिंता पैदा कर दी है। इस डेटा ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या वास्तव में वैज्ञानिकों में कोई चिंताजनक पैटर्न उभर रहा है। हालांकि, इस सूची को लेकर कई लोगों ने आलोचना भी की है- उनका कहना है कि इस तरह के डेटा के उपयोग से नैतिक मुद्दे उठते हैं और यह जरूरी नहीं कि यह पूरी तस्वीर सामने लाता हो।

एक साल में 76 युवा शोधकर्ताओं की मौत

कंप्यूटर प्रोग्रामरों के लिए बनाए गए ऑनलाइन मंच CSND पर पिछले सप्ताह एक फाइल पोस्ट की गई थी। इस फाइल के अनुसार, साल 2025 में अब तक 60 वर्ष से कम उम्र के कम से कम 76 शोधकर्ताओं की मृत्यु हो चुकी है, जबकि पिछले पूरे साल यह संख्या 44 थी।

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इस सूची में सबसे कम उम्र की वैज्ञानिक डॉन्ग सिजिया थीं- वे नानजिंग विश्वविद्यालय में समुद्र विज्ञान (Oceanography) की सहायक प्रोफेसर थीं और उनकी मृत्यु सिर्फ 33 वर्ष की उम्र में हो गई। इस बीच, हांगकांग में युवाओं की आत्महत्या दर लगातार बढ़ रही है, जिसने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है।

सरकार को चेताने के लिए खोली पोल

गुआंग्डोंग प्रांत के एक गुमनाम संकलक ने यह डेटा तैयार किया है। उनका कहना है कि यह सूची सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है और इसका मकसद लोगों को जागरूक करना, क्षेत्रीय असमानता को दिखाना, और सरकार को नीति निर्माण में मदद देना है।

डेटा इकठ्ठा करने वाले के मुताबिक, यह डेटा शोध के लिए एक सहायक उपकरण बन सकता है जो चीन में अकादमिक तनाव और क्षेत्रीय विषमता को बेहतर समझने में मदद करेगा। इसके अलावा सरकारी तंत्र कैसे लोगों से काम करा रहा है उसकी भी पोल खोलना जरूरी है।

छेड़ी नई बहस

हालांकि, इस डेटा ने चीन में नैतिक बहस को जन्म दे दिया है। कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या इन मृत वैज्ञानिकों के परिवारों से अनुमति ली गई थी या नहीं। कुछ ने यह भी कहा कि यह तरीका संवेदनहीनता (insensitivity) को दर्शाता है, क्योंकि मृत व्यक्तियों की निजी जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा की गई है।

केवल युवा वैज्ञानिकों पर ध्यान क्यों?

कई आलोचकों ने यह भी सवाल उठाया कि केवल युवा शिक्षकों और शोधकर्ताओं को ही इस सूची में क्यों शामिल किया गया है। उनका कहना है कि अगर उद्देश्य मृत्यु दर को समझना है, तो अन्य पेशों जैसे मजदूरों, ड्राइवरों या फैक्ट्री वर्करों के आंकड़ों की तुलना भी की जानी चाहिए। इससे स्पष्ट होगा कि क्या वैज्ञानिकों की मृत्यु दर वास्तव में अधिक है या नहीं।

वैज्ञानिकों में बढ़ता तनाव और आत्महत्या की घटनाएं

मई 2024 में Preventive Medicine Reports जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में भी इसी तरह की चिंताएँ जताई गई थीं। रिसर्च में पाया गया कि एकेडमी में आत्महत्याओं की संख्या बढ़ रही है, जबकि देश के अन्य हिस्सों में यह घट रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश पीड़ित युवा पुरुष वैज्ञानिक थे, जो साइंस और इंजीनियरिंग जैसे कठिन विषयों से जुड़े थे। इनमें से लगभग 65% मामलों में काम का अत्यधिक दबाव (Work Pressure) मुख्य कारण बताया गया था।

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