एक-एक निवाले के लिए तरस रहा है किम जोंग उन का उत्तर कोरिया, UNSC पहुंचे चीन और रूस

उत्तर कोरिया सामानों की बढ़ती कीमतों, दवा और अन्य आवश्यक आपूर्ति की कमी से निपटने के लिए संघर्ष कर रहा है और देश में भुखमरी के कगार पर हजारों लोग पहुंच चुके हैं।

प्योंगयांग, नवंबर 03: हथियार बनाने की सनक के चलते सनकी तानाशाह किम जोंग उन ने उत्तर कोरिया की आर्थिक हालत को धूल में मिला दिया है और अब स्थिति ये है कि, उत्तर कोरिया में भूखमरी जैसे हालात बन गये हैं। पिछले महीने यूनाइटेड नेशंस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि, उत्तर कोरिया में हजारों लोगों की मौत भूख की वजह से हो सकती है और अब रूस और चीन ने उत्तर कोरिया की मदद करने की अपील यूनाइटेड नेशंस से की है।

उत्तर कोरिया की आर्थिक हालत खराब

उत्तर कोरिया की आर्थिक हालत खराब

चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से उत्तर कोरिया के खिलाफ समुद्री भोजन और वस्त्रों के निर्यात के साथ साथ रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर लगे प्रतिबंधों को हटाने की मांग की है। इसके साथ ही चीन और रूस ने यूएनएससी से मांग की है, कि विदेश में रहने वाले उत्तर कोरियाई लोगों को अपने घर पैसे भेजने की इजाजत दी जाए। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन और रूस की तरह से एक मसौदा तैयार कर यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल के सदस्य देशों को दिया गया है, जिसमें उत्तर कोरिया की खराब स्थति और कठिनाइयों का जिक्र किया गया है और कहा गया है कि, नागरिक आबादी अपनी आजीविका बढ़ा सके, लिहाजा कई तरह के प्रतिबंधों को हटा लिया जाना चाहिए।

2006 में लगाया गया था प्रतिबंध

2006 में लगाया गया था प्रतिबंध

उत्तर कोरिया ने 2006 में परमाणु परीक्षण किया था, जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगा दिए थे और फिर उत्तर कोरिया ने आगे जाकर जब और भी कई बैलिस्टिक मिसाइलोंका का परीक्षण किया, तो उन प्रतिबंधों को और भी ज्यादा सख्त कर दिया गया था। संयुक्त राष्ट्र की पूर्व राजदूत निक्की हेली ने 2018 में कहा था कि, प्रतिबंधों ने सभी उत्तर कोरियाई निर्यात और उसके व्यापार को 90 फीसदी तक खत्म कर दिया है। प्रतिबंधों का असर कम पड़े, लिहाजा उत्तर कोरिया ने बड़े पैमाने पर लोगों को विदेशों में कमाने के लिए भेजा था, लेकिन उसपर भी जब सख्ती बढ़ा दी गई, तो फिर उत्तर कोरिया और ज्यादा चालाकी नहीं दिखा पाया।

चीन और रूस ने दिया मसौदा

चीन और रूस ने दिया मसौदा

इससे पहले भी चीन और रूस ने कुछ इसी तरह का मसौदा 2019 में भी यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल में पेश किया था, लेकिन पश्चिमी देशों के विरोध की वजह से कभी इस मसौदे को औपचारिक वोटिंग के लिए भी पेश नहीं किया गया, जबकि उसके बाद भी उत्तर कोरिया लगातार परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहा है। पिछले हफ्ते भी उत्तर कोरिया ने हाइपरसोनिक क्रूज परमाणु मिसाइल का परीक्षण करने का दावा किया है।

अमेरिका रहेगा खिलाफ

अमेरिका रहेगा खिलाफ

संयुक्त राष्ट्र के कई राजनयिकों ने नाम ना छापने की शर्त पर बोलते हुए कहा कि, ''हालांकि, मसौदे के अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन इस मसौदे को भी उसी तरह के संघर्ष का सामना कर पड़ सकता है, जैसा पहले हुआ था, क्योंकि उत्तर कोरिया बिना किसी की परवाह किए लगातार परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहा है''। वहीं, संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी मिशन ने कहा कि, उत्तर कोरिया अपने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों पर नियमों का पालन करने में विफल रहा है और बाइडेन प्रशासन भी "प्रतिबंध बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं" और सभी सदस्य राज्यों से वो ऐसी ही अपील करेंगे।

बैलिस्टिक मिलाइलों का परीक्षण

बैलिस्टिक मिलाइलों का परीक्षण

19 अक्टूबर को भी उत्तर कोरिया ने पनडुब्बी से एक नव विकसित बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था और वो भी संयुक्त राष्ट्र के नियमों का पूरी तरह से उल्लंघन करके। वहीं, अक्टूबर 2019 के बाद से यह उत्तर का पहला अंडरवाटर-लॉन्च किया गया परीक्षण था और जनवरी में राष्ट्रपति जो बाइडेन के पदभार संभालने के बाद से यह सबसे हाई-प्रोफाइल परीक्षण था। चीन-रूस के मसौदा प्रस्ताव में मिसाइल परीक्षणों का कोई जिक्र नहीं है। इसके बजाय, मसौदे में कहा गया है कि उत्तर कोरिया ने सितंबर 2017 से परमाणु परीक्षण करने से परहेज किया है और 21 अप्रैल 2018 से आगे के परमाणु परीक्षणों और मध्यवर्ती दूरी और इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइलों के परीक्षण पर भी रोक लगा दी है।

मानवीय सहायता की जरूरत

मानवीय सहायता की जरूरत

उत्तर कोरिया सामानों की बढ़ती कीमतों, दवा और अन्य आवश्यक आपूर्ति की कमी से निपटने के लिए संघर्ष कर रहा है। इसके साथ ही उत्तर कोरिया में इस वक्त टाइफाइड बुखार से भी लोग भारी परेशान हैं। उत्तर कोरिया ने हालांकि, अभी तक कोरोनावायरस के किसी भी मामले की रिपोर्ट नहीं की है, जबकि, विशेषज्ञों ने इसके सही रिकॉर्ड के दावे पर सवाल उठाया है। चीन-रूस के मसौदे में संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों से मानवीय सहायता प्रदान करने के अपने प्रयासों को तेज करने का आह्वान किया गया है, जिसमें "भोजन, उर्वरक और चिकित्सा आपूर्ति शामिल है।

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