चीन में 1961 के बाद पहली बार घट गई जनसंख्या, कुछ महीनों में भारत बन जाएगा सबसे ज्यादा आबादी वाला देश
चीन में वन चाइल्ड पॉलिसी के बाद लोगों का मन परिवार प्रथा से तेजी से टूटा है और नई आबादी की शादी करने की संख्या में भी कमी आई है।

China Population Fall: चीन ने आबादी बढ़ने से रोकने के लिए कई दशक पहले जनसंख्या नियंत्रण कानून अपनी जनता पर थोप दिया था और चीन को आज अपने उस फैसले का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। चीन की जनसंख्या में साल 1961 के बाद से ऐतिहासिक गिरावट देखी गई है, जिसने ड्रैगन के होश उड़ा दिए हैं। चीन अब अपनी जनसंख्या को बढ़ाने के लिए तेजी से हाथ-पैर मार रहा है, लेकिन जनसंख्या बढ़ाने की हर कोशिश नाकाम साबित हो रही है।

चीन की जनसंख्या में भारी गिरावट
चीनी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 1961 के बाद पहली बार चीन की आबादी में पिछले साल गिरावट आई है और चीन के लिए ये एक ऐतिहासिक मोड़ है, क्योंकि चीन में जिस रफ्तार से चीन की जनसंख्या कम हुई है, उसके बाद अगले कुछ महीनों के दौरान भारत दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा। तमाम रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि साल 2023 में दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला देश भारत बन जाएगा। चीन के नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टेटिस्टिक्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि साल 2022 के अंत में चीन में 1 अरब 41 करोड़ 17 करोड़ 50 लाख हो गई है, जबकि एक साल पहले तक ये आबादी 1 अरब 41 करोड़ 17 करोड़ 60 लाख थी। यानि, चीन की जनसंख्या 10 लाख कम हो गई है, जिससे चीन की सरकार गंभीर तौर पर चिंतित हो गई है।

चीन में जनसंख्या दर को समझिए
चीन में साल 2022 में जन्मदर प्रति हजार लोगों पर 6.77 थी, जो साल 2021 में 7.52 थी। यानि, साल 2022 में जन्मदर में कमी आ गई है, जो चीन के लिहाज से एक रिकॉर्ड है। इसके साथ ही चीन ने साल 1976 के बाद से अपनी मृत्यु दर में उच्चतम इजाफा देखा है और साल 2021 में चीन में मृत्युदर एक हजार लोगों पर 7.18 थी, जबकि 1976 में यही आंकड़ा 7.37 थी। चीन की जनसंख्या में आए इस परिवर्तन की वजह डेमोग्राफिक परिवर्तन का परिणाम है, जिसे चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने काफी सख्ती के साथ लागू किया था। चीन में 1980 में एक बच्चे पैदा करने का कानून लागू किया गया था और कम्युनिस्ट पार्टी ने इतनी सख्ती के साथ इस फैसले को लागू किया था, कि धीरे धीरे चीन के लोगों का परिवार के प्रति मोह ही भंग गया। इस फैसले की वजह से चीन के लाखों परिवार हमेशा के लिए खत्म ही हो गये। क्योंकि, जिस परिवार में बेटी पैदा हुई, उस परिवार का वंश आगे नहीं बढ़ पाया। वहीं, अगर किसी परिवार का इकलौता बच्चा किसी बीमारी की वजह से, या किसी हादसे में अपनी जान गंवा बैठा, तब भी वो परिवार खत्म हो गया।
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चीन में बच्चा पैदा करने से मोह भंग
चीन में एक बच्चे पैदा करने की नीति का असर ये हुआ, कि परिवार सिस्टम पर इसका गंभीर असर पड़ा और धीरे धीरे नई आबादी का शादी और बच्चों से मोहभंग होने लगा। वहीं, चीन में शिक्षा व्यवस्था इतनी ज्यादा महंगी कर दी गई, कि लोगों के लिए दो बच्चों को पढ़ाना अत्यंत ही मुश्किल हो गया, लिहाजा नई पीढ़ी ने बच्चे को जन्म देना ही बंद कर दिया। वहीं, कोरोना वायरस ने चीन की जनसंख्या वृद्धि पर गंभीर असर डाला है और चिकित्सा सुविधाएं इतनी मुश्किल हो गईं, कि लोगों के लिए परिवार बढ़ाना और भी ज्यादा मुश्किल हो गया है। लिहाजा, चीन की जनसंख्या में और भी ज्यादा गिरावट आ गई। हालांकि, चीन की स्थानीय प्रांतीय सरकारों ने 2021 से लोगों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने के उपायों को शुरू किया है, जिसमें टैक्स कटौती, मां बनने वाली महिलाओं को लंबी छुट्टी और उनके लिए घर खरीदने पर सब्सिडी भी शामिल है, लेकिन इन उपायों के बाद भी अभी तक सही परिणाम देखने को नहीं मिल रहे हैं।












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