चुटकियों में स्पेस में करेगा सैटेलाइट की तैनाती.. चीन का हाइपरसोनिक रेलगन कैसे अमेरिका को छोड़ देगा पीछे?
China building hypersonic railgun: दुनिया में नये और विनाशक हथियार बनाने की होड़ लगी हुई, जिसमें शक्तिशाली देश एक कदम भी पीछे नहीं रहना चाहते हैं। साउथ चायना मॉर्निंग पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है, कि चीन अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स की चुटकियों में तैनाती के लिए हाइपरसोनिक रेलगन का निर्माण कर रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि चीन और अमेरिका, दोनों ही देश भविष्य के युद्ध की तैयारी के लिए हाइपरसोनिक प्लेटफॉर्म का निर्माण कर रहे हैं, जो सेकंड्स में युद्ध को पूरी तरह से बदलकर रख सकता है, खासकर उन लड़ाइयों में ऐसे प्लेटफॉर्म काफी ज्यादा अहम हो जाते हैं, जहां दुश्मन के निशाने पर सैटेलाइट होते हैं।

हाइपरसोनिक रेलगन बना रहा चीन
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की इसी महीने की रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि चीन अपने तेंग्युन स्पेसक्राफ्ट को लॉन्च करने के लिए एक विशाल रेलगन बनाने की योजना बना रहा है, जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक लॉंच और हाइपरसोनिक फ्लाइट को अंतरिक्ष में भेज पाएगा। इस प्लेटफॉर्म से काफी कम कीमत में और काफी कम वक्त में किसी सैटेलाइट या फिर हथियार को अंतरिक्ष में लॉन्च किया जा सकता है।
SCMP रिपोर्ट में कहा गया है, कि चीन का लक्ष्य एक हाइपरसोनिक फ्लाइट को मैक 1.6 तक की स्पीड के साथ ट्रैक से अलग करने, उसके इंजन को स्टार्ट करने और आवाज की गति से सात गुना ज्यादा रफ्तार से अंतरिक्ष में भेजने के लिए एक विशाल विद्युत चुम्बकीय लॉन्च ट्रैक का निर्माण करना है।
तेंगयुन स्पेसक्राफ्ट को चालक दल और कार्गो को ऑर्बिट में ले जाने और सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में छोड़ने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे उपग्रहों के साथ डॉकिंग या कैप्चरिंग या सर्विलांस समेत दूसरे मिशनों को ऑपरेट करने के लिए भी डिजाइन किया जा सकता है।
SCMP की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है, कि तेंगयुन प्रोजेक्ट हाई स्पीड फ्लाइट की क्षमता के साथ तमाम चुनौतियों पर काबू पाते हुए इलेक्ट्रॉमैग्नेटिक लॉंच टेक्नोलॉजी के लिए एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है, कि चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉरपोरेशन (CASIC) ने दातोंग, शांक्सी प्रांत में दो किलोमीटर कम वैक्यूम ट्रैक हाई-स्पीड मैग्लेव परीक्षण फैसिलिटी का निर्माण किया है।
हाइपरसोनिक रेलगन क्या काम करेगा?
- हाइपरसोनिक रेलगन एक तरह का प्लेटफॉर्म होगा, जहां से किसी सैटेलाइट को आवाज की स्पीड से 7 गुना ज्यादा रफ्तार से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।
- इस प्लेटफॉर्म से किसी भारी वस्तु को एक हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भेजा जा सकता है। और चीन की कोशिश आने वाले वक्त में इस स्पीड को बढ़ाकर 5 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड तक ले जाना है।
- अमेरिका के भी स्ट्रैटोलांच के टैलोन-ए (टीए-1) हाइपरसोनिक ग्लाइडर ने हाल ही में कैलिफोर्निया के तट से कई परीक्षण पेलोड ले जाने वाली अपनी पहली फ्लाइट के साथ उड़ान भरी है। द वारज़ोन की इस महीने की रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है।
- वारज़ोन की रिपोर्ट में कहा गया है, कि कंपनी के विशाल रॉक जेट से लॉन्च किए गए मानव रहित विमान ने लगभग 200 सेकंड तक टेस्ट उड़ान भरने में कामयाबी हासिल की है, जो कि मैक-5 के करीब सुपरसोनिक गति तक पहुंच गई, और अमेरिका की कोशिश इस स्पीड को मैक-6 तक ले जाने की है।
- चीन का स्पेसप्लेन रेलगन लॉन्च सिस्टम उसके फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर और यूएस गेराल्ड फोर्ड-क्लास सुपरकैरियर पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम (EMALS) के समान ही है।
- यूक्रेन युद्ध ने अंतरिक्ष से लड़ी जाने वाली लड़ाई के महत्व को दुनिया के सामने रख दिया है, लिहाजा चीन और अमेरिका अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती के साथ साथ अंतरिक्ष के रास्ते बम बरसाने के लिए हाइपरसोनिक प्लेटफॉर्म्स के निर्माण की तरफ से तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे प्लेटफॉर्म से किसी हथियार को पहले अंतरिक्ष में भेजा जाएगा और फिर उससे किसी दुश्मन के ठिकाने पर हमला किया जाएगा। ये प्रोसेस इतनी तेजी के साथ होगा, कि टारगेट के लिए बचना असंभव सरीखा हो जाएगा।
अमेरिका से आगे निकल सकता है चीन
इसके अलावा, हाइपरसोनिक प्लेटफॉर्म का निर्माण स्पेस कम्युनिकेशन, सर्विलांस, इंटेलिजेंस सर्विलांस, टारगेट की पहचान और तत्काल रॉकेट लांच के लिए किया जा रहा है।
अमेरिका के प्रसिद्ध डिफेंस एक्सपर्ट सैम ब्रेस्निक ने अगस्त 2023 के ब्रेकिंग डिफेंस के एक लेख में लिखा है, कि चीन पहले से ही सामरिक रूप से टेक्टिकल रिस्पांस स्पेस लॉंच (TRSL) में अमेरिका से आगे निकल सकता है, जहां से संघर्ष की स्थिति में क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए उपग्रहों को फौरन बदलने की क्षमता है। यानि, अगर युद्ध की स्थिति में चीन के सैटेलाइट को मार गिराया जाता है, तो फिर चीन अपने उस उपग्रह को कुछ मिनटों में ही रिप्लेस कर सकता है। इसीलिए इस प्लेटफॉर्म को युद्ध को बदलने वाला प्लेटफॉर्म कहा जा रहा है, जिसमें महारत हासिल करने की तरफ चीन तेजी से बढ़ रहा है।












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