नेपाल को दोनों हाथों से लूट रहा है चीन! ड्रैगन के रहस्यमयी जाल में उलझ गया पर्यटन उद्योग
नई दिल्ली, 7 जुलाई: श्रीलंका का हाल देखने के बाद नेपाल के लोग भी चीन के रहस्यमयी हथकंडों से सहमे हुए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन बहुत ही गोपनीय तरीके से नेपाल के पर्यटन उद्योग पर कब्जा करता जा रहा है। कोरोना महामारी ने उसे और भी ज्यादा मौका दे दिया है। चीनी व्यापारियों की वजह से नेपाल को कई तरफा चपत लग रही है। एक तो पर्यटन व्यवसाय उसके हाथों से निकलता जा रहा है, ऊपर से चीन की संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का तरीका भी उसके खजाने को नुकसान पहुंचा रहा है।

नेपाल के पर्यटन उद्योग पर ड्रैगन का डाका!
न्यूज एजेंसी एएनआई ने खबर हब की एक रिपोर्ट के हवाले से जो कुछ बताया है, उससे लग रहा है कि हिमायली देश नेपाल के पर्यटन उद्योग को चीन ने पूरी तरह से अपनी गिरफ्त में लेने की साजिश रच दी है। इसके मुताबिक चीन भारत के पड़ोसी मुल्क के टूरिज्म और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में गैर-कानूनी निवेश में लगा हुआ है। गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी की वजह से नेपाल का पर्यटन उद्योग पहले ही दबाव में है, उसपर से नेपाल के पूर्व शासकों की ड्रैगन से दोस्ती अब भारी पड़ने लगी है। दरअसल, चीन के निवेशकों ने काठमांडू समेत नेपाल के प्रमुख पर्यटन स्थलों के बेहतरीन होटलों और कई सारी निर्माण परियोजनाओं में हाथ लगा दिया है, जिसकी वजह से बीजिंग के इरादों को लेकर संदेह पैदा होने लगा है।

400 से ज्यादा नेपाली होटलों में निवेश
रिपोर्ट के मुताबिक चीनी व्यापारियों ने काठमांडू समेत ललितपुर, भक्तपुर, कास्की और चितवन में 400 से ज्यादा होटलों और रेस्टोरेंट में निवेश किया है। अकेले पोखरा में चीनी व्यवसायियों ने 50 से ज्यादा रेस्टोरेंट और दूसरे कारोबार में पैसे लगाए हैं। दरअसल, चीनी कारोबारी नेपाल को दोनों हाथों से लूटने में लगे हुए हैं। क्योंकि, होटल एसोसिएशन ऑफ नेपाल के अधिकारियों की शिकायत है कि सरकार को बिना टैक्स दिए नेपाल में बिजनेस करने का चीनी ट्रेंड और मनपसंद कमरे बुक करने के लिए ऑनलाइन सिस्टम का इस्तेमाल ने नेपाल के पर्यटन उद्योग की समस्याओं को बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक चाइनीज प्लेटफॉर्म वीचैट और अली पे के जरिए भुगतान पारदर्शी नहीं है।

बिना अनुमति होटल कारोबार में जुटे चाइनीज-रिपोर्ट
पर्यटन कानून के मुताबिक होटलों और लॉजों के लिए विदेशी पर्यटकों को कमरे देने और विदेशी मुद्रा में कारोबार के लिए पर्यटन विभाग से अनुमति लेना आवश्यक है। नेपाल के पर्यटन कारोबारी मानते हैं कि अब नेपाल में चीनी पर्यटकों की संख्या अब फीसदी से ज्यादा हो चुकी है। इसलिए रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि नेपाल को चीन के भारी निवेश को लेकर उसके इरादों के प्रति सतर्क रहना होगा। आलम ये है कि काठमांडू घाटी के अलावा वह चीनी नागरिक जो या तो पर्यटक या फिर निवेशक बनकर घुसे थे, उन्होंने चितवन और लुंबिनी में लॉज, निजी घरों, अपार्टमेंट और फ्लैट में निवेश करके विदेशी पर्यटकों को ठहाना शुरू कर दिया है। जबकि, इसके लिए उनके पास पर्यटन विभाग की अनुमति नहीं होती।

नेपाली खजाने को भी लगा रहे हैं चूना- रिपोर्ट
खबर हब ने बताया है कि क्योंकि ऐसी चीनी कंपनिया नेपाल में किसी भी अथॉरिटी के पास रजिस्टर्ड नहीं हैं, उनपर टैक्स की कोई जिम्मेदारी नहीं है। जबकि,वह टूरिस्ट को होटलों में भी ठहरा रहे हैं और घरों और अपार्टमेंट में भी रख रहे हैं। जिससे नेपाली खजाने को भी चूना लगाया जा रहा है। हालांकि, अब नेपाल की मौजूदा सरकार में सत्ताधारी पार्टी भी नेपाल में चीन के बढ़ते दखल से परेशान लग रही है। खासकर श्रीलंका की माली हालत देखकर नेपाल के हुक्कमरानों के भी हाथ-पैर फूलने लगे हैं। (ऊपर की तस्वीरें- प्रतीकात्मक)

श्रीलंका की स्थिति देखकर घबराया नेपाल!
मई 2017 में जब पुष्प कमल दहल नेपाल के प्रधानमंत्री थे तो उनके समय में नेपाल और चीन ने ड्रैगन की महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को लेकर एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। नेपाली शासकों को लगा कि इससे उनके यहां विदेशी निवेश बढ़ेगा। चीन ने कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया और कुछ पूरे भी किए। लेकिन, जब चीन की मंशा को लेकर शक होना शुरू हुआ तो नेपाल थोड़ा सजग होने लगा। लेकिन, अब चीन, नेपाल में काफी पांव फैला चुका है। नेपाल को सबसे ज्यादा चीन की वित्तीय पारदर्शिता को लेकर संदेह है। नेपाल भी चीन के सॉफ्ट लोन के चक्कर में पड़ा है। लेकिन, श्रीलंका जिस तरह से उसका कर्ज वापस लौटाने के चक्कर में तबाह हुआ है, उसने नेपाल को बीजिंग के साथ ऐसी डील करने को लेकर सावधान किया है। लेकिन, बड़ा सवाल है कि ड्रैगन अपना जाल काफी हद तक फैला लिया है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के इस महाजाल से निकलना नेपाली शासकों के लिए आसान नहीं होगा।
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