कनाडा चुनाव में हस्तक्षेप... आखिर जस्टिन ट्रूडो को ही बार बार क्यों जिताता है चीन? समझिए असली वजह
China-Canada News: कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर चुनाव प्रभावित करने के आरोप लगाए थे, लेकिन देश की खुफिया एजेंसी ने दावा किया है, कि चीन ने कनाडा में पिछले दो चुनावों को प्रभावित किया था।
सोमवार को एक आधिकारिक जांच में सुनवाई की गई है, जिसमें कनाडा की राजनीति में संदिग्ध चीनी हस्तक्षेप का अब तक का सबसे पुख्ता सबूत पेश किया गया। सबूतों के आधार पर गया है, चीन ने कनाडा के चुनावों में हस्तक्षेप की है। चीन की संभावित भूमिका पर रिपोर्टों से नाखुश विपक्षी सांसदों के दबाव के बाद प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो को विदेशी हस्तक्षेप पर एक आयोग स्थापित करना पड़ा था, जिसकी जांच में चीनी हस्तक्षेप का खुलासा हुआ है।

सबसे हैरानी की बात ये है, कि चुनाव में चीनी हस्तक्षेप के आरोप लगने के बाद भी जस्टिन ट्रूडो जांच से भाग रहे थे, क्योंकि चीन ने जस्टिन ट्रूडो की पार्टी के कुछ सांसदों को चुनाव में जिताने में मदद की थी। और प्रधानमंत्री को डर था, कि कहीं उनकी पोल ना खुल जाए। इसलिए, वो बार बार भारत का नाम ले रहे थे।
ट्रूडो की लिबरल पार्टी को चीन ने जिताया
जस्टिन ट्रूडो की लिबरल पार्टी ने 2019 और 2021 में हुए दोनों चुनावों में जीत हासिल की थी। आयोग को सोमवार को एक स्लाइड दिखाई गई, जिसमें कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) से फरवरी 2023 की ब्रीफिंग का प्रजेंटेंशन था। इसमें कहा गया, कि "हम जानते हैं कि पीआरसी (पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना) ने 2019 और 2021 दोनों चुनावों में गुप्त और भ्रामक तरीके से हस्तक्षेप किया था।"
रिपोर्ट में कहा गया है, "दोनों मामलों में, ये एफआई (विदेशी हस्तक्षेप) गतिविधियां व्यावहारिक प्रकृति की थीं और मुख्य रूप से पीआरसी सरकार के हित के मुद्दों पर 'पीआरसी समर्थक' या 'तटस्थ' माने जाने वाले लोगों का समर्थन करने पर केंद्रित थीं।" हालांकि, चीन ने अब तक कनाडा की राजनीति में अपनी भागीदारी से इनकार किया है।
कनाडा की मुख्य विपक्षी पार्टियों का आरोप
2021 के चुनावी अभियान के दौरान मुख्य विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी का नेतृत्व करने वाले एरिन ओ'टूल ने आरोप लगाया, कि चीनी हस्तक्षेप से उनकी पार्टी को नौ सीटों तक का नुकसान हुआ, लेकिन उन्होंने कहा कि इससे चुनाव का रुख नहीं बदला है।
खुफिया विश्लेषकों और कंजर्वेटिव पार्टी के सदस्यों का कहना है, कि जस्टिन ट्रूडो की सरकार ने चीनी हस्तक्षेप से निपटने के लिए पर्याप्त काम नहीं किया है। कंजर्वेटिव, जो आम तौर पर उदारवादियों की तुलना में चीन पर ज्यादा सख्त रुख अपनाते हैं, उन्होंने 2021 में उइगर मुस्लिमों पर होने वाले अत्याचार को लेकर चीन के खिलाफ कैम्पेन चलाया था। इसके अलावा, पार्टी ने चीन की 5G कंपनियों के नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने का वादा जनता से किया था।
जबकि, वामपंथी झुकाव वाली न्यू डेमोक्रेट्स पार्टी के एक सांसद ने पूछताछ में बताया है, कि एक बार जब उन्होंने बीजिंग की हांगकांग नीति की आलोचना करना शुरू कर दिया, तो राजनीतिक रूप से प्रभावशाली जातीय चीनी समुदाय द्वारा आयोजित कार्यक्रमों के निमंत्रण कम होने लगे। इस बीच, ट्रूडो को भी बुधवार को विदेशी हस्तक्षेप पर आयोग के सामने गवाही देनी है।
पिछले साल कनाडा ने कहा था, कि कंजर्वेटिव पार्टी के एक सांसद, जिनका मूल हांगकांग से है, उन्हें चीनियों ने ऑनलाइन प्रोपेगेंडा का शिकार बनाया था, जिसको लेकर सरकार ने एक वरिष्ठ चीनी नागरिक को देश से निकाल दिया था।
आपको बता दें, कि कनाडा में करीब 17 लाख चीनी मूल के नागरिक रहते हैं, जो देश की कुल जनसंख्या का 5 प्रतिशत से थोड़ा कम है। और जस्टिन ट्रूडो को चीनी मतदाताओं का समर्थन हासिल रहा है, लिहाजा जस्टिन ट्रूडो चीन के खिलाफ कोई कदम उठाने से कतराते रहे हैं। वहीं, जस्टिन ट्रूडो की पार्टी के टिकट पर जीतने वाले चीनी मूल के सांसद, लगातार चीन के हक की बात करते हैं और जस्टिन ट्रूडो को इससे कोई आपत्ति नहीं होती है।
भारत को बताया गया है बड़ा खतरा
हालांकि, चीन ने कनाडा के दो-दो चुनावों में हस्तक्षेप किया है, लेकिन जस्टिन ट्रूडो की सरकार भारत को बड़ा खतरा मान रही है। ऐसा करने से भी इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर भारत को बदनाम करने की कोशिश करने वाला एक साथी मिलता है और वो साथी जस्टिन ट्रूडो हैं। जबकि, विपक्षी पार्टी अगर सत्ता में आती है, तो चीन के सारे तिकड़म फेल हो जाएंगे। लेकिन, चुनाव जीतने के लिए जस्टिन ट्रूडो दूसरे देशों में आतंकवाद फैलाने वालों का समर्थन करने वालों का समर्थन करने से भी नहीं चूकते हैं और ये चीन के लिए एक बेहतरीन माहौल बनाता है।
फरवरी में, ग्लोबल न्यूज़ की एक रिपोर्ट में कहा गया था, कि कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) की सीक्रेट रिपोर्ट के अनुसार, चीन के साथ-साथ भारत को कनाडा की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए 'संभावित खतरे' के रूप में पहचाना गया था। संघीय आयोग ने दो मतपत्रों को प्रभावित करने में भारत की किसी भी भूमिका की जांच करने के अपने इरादे का संकेत दिया है।
खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की संदिग्ध संलिप्तता के बारे में ट्रूडो के विस्फोटक आरोपों के बाद रिपोर्ट में भारत और कनाडा के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों को और बढ़ा दिया गया है, जिसे ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में उनके आवास के बाहर गोली मार दी गई थी। भारत ने इस आरोप को बेतुका और राजनीति से प्रेरित बताते हुए इनकार किया, जबकि ओटावा से अपने दावों को साबित करने के लिए सबूत उपलब्ध कराने की मांग की। हालांकि, ट्रूडो सरकार ने अभी तक एक भी सबूत सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन दोनों देशों के संबंध काफी खराब हो चुके हैं।












Click it and Unblock the Notifications