Explainer: चीन का गुलाम बना इस समुद्री देश का नया 'राजा', भारत को ब्लैकमेल क्यों करते रहते हैं पड़ोसी देश?
Malidives China India: राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने मालदीव में सत्ता संभालते ही अपने सबसे पहले आदेश में नई दिल्ली से अपने सैनिकों को मालदीव से वापस बुलाने के लिए कहा है। जिसका नाम सिर्फ भारत पर, बल्कि इंडो-पैसिफिक और हिंद महासागर में भारत के भागीदारों की बनाई गई रणनीति को भी झटका लगा है।
लिहाजा, सवाल ये उठते रहते हैं, कि आखिर छोटे-छोटे पड़ोसी देश, जिनकी मदद भारत हर सीमा को पार कर करता रहता है, वो अकसर भारत को ब्लैकमेल क्यों करते रहते हैं। चाहे श्रीलंका हो, या फिर बांग्लादेश, या म्यांमार, नेपाल या फिर भूटान, भारत हमेशा इन देशों की मदद करने के लिए खड़ा रहा है, लेकिन ये देश अकसर भारत के खिलाफ चीन के पाले में जाने के लिए कूदते रहते हैं।

इंडो-पैसिफिक में भारत की सबसे बड़ी रणनीति अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के साथ मिलकर क्वाड का निर्माण है, लेकिन मालदीव में चीन समर्थक शासन का आना, भारत और क्वाड के लिए शुभ संकेत नहीं है। हालांकि, फिलहाल ये अंदाजा लगाना मुश्किल है, कि मालदीव का नया शासन भारत के हितों को कितना नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है, कि नई दिल्ली हिंद महासागर में स्थित छोटे से द्वीपसमूह देश मालदीव के घटनाक्रम के प्रति संवेदनशील है, जो भारत के मिनिकॉय द्वीप से बमुश्किल 70 समुद्री मील की दूरी पर स्थित है।
लेकिन, इस बात पर यकीन करना मुश्किल लगता है कि भारत ने वहां अपने सैनिक तैनात कर रखे हैं.
यदि भारतीय सैनिकों को वापस करने का माले का फैसला, राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़ू की प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ मालदीव (पीपीएम) के चीन समर्थक होने की वजह है, तो यह फैसला वास्तव में द्विपक्षीय नहीं है। इसमें नए शासन का व्यापक भू-राजनीतिक एजेंडा शामिल है, जिससे बीजिंग बहुत खुश होगा।
मालदीव में चीन के गुलाम के हाथ कमान!
पूरी संभावना है, कि यह एक मिथक है, कि मालदीव में भारत की सेना तैनात है। दरअसल, भारत ने द्वीप राष्ट्र मालदीव को कुछ विमान उपहार में दिए हैं, और उनके संचालन और रखरखाव के लिए 77 सैन्यकर्मी मालदीव में हैं। क्योंकि, मालदीव के पास वर्तमान में उन कार्यों को करने के लिए आवश्यक जनशक्ति नहीं है।
मावदीव राष्ट्रपति कार्यालय के सार्वजनिक नीति के अवर सचिव, मोहम्मद फिरोजुल अब्दुल खलील ने 19 नवंबर को अपने संवाददाता सम्मेलन में स्वीकार किया था, कि मालदीव में 77 भारतीय सैन्य कर्मियों में से, "24 पहले हेलीकॉप्टर का प्रबंधन करते हैं, 25 भारतीय डोर्नियर विमान का प्रबंधन करते हैं, 26 भारतीय दूसरे हेलीकॉप्टर का रखरखाव करते हैं।"
इन कर्मियों को सैनिक कहा जाना तब और भी अकल्पनीय हो जाता है, जब वे केवल मानवीय मिशनों में लगे होते हैं, जो ज्यादातर हिंद महासागर में दूरदराज के 200 बसे हुए द्वीपों से मरीजों को क्षेत्रीय स्वास्थ्य केंद्रों या राजधानी के अस्पताल तक पहुंचाने और खोज और बचाव अभियान चलाने में चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए समर्पित होते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2019 से अब तक कुल 977 ऐसे मिशन हुए हैं।
दिलचस्प बात यह है, कि यह कोई और नहीं बल्कि तत्कालीन राष्ट्रपति यामीन अब्दुल गयूम (जो अब जेल में बंद हैं और नये राष्ट्रपति मुइज्जू को उनका प्रॉक्सी माना जाता है) के नेतृत्व वाली पीपीएम सरकार है, जिसने 2016 में भारत के साथ एक व्यापक "रक्षा के लिए कार्य योजना" पर साइन किया था।
इस योजना के तहत, भारतीय सैन्य कर्मियों से अनुरोध किया गया था, कि वे भारत द्वारा दान किए गए विमानों को तब तक संचालित करें जब तक कि मालदीव के लोग उन्हें संचालित करने और प्रबंधित करने के लिए उचित रूप से प्रशिक्षित न हो जाएं।
लेकिन, अब राष्ट्रपति मुइज्जू ने कहा है, कि पिछले पांच सालों के दौरान मालदीव की पूर्ववर्ती सरकार ने भारत के साथ जो-जो समझौते किए हैं, उन समझौतों की समीक्षा की जाएगी।
आपको बता दें, कि कंप्रेहेंसिव एक्शन प्लान फॉर डिफेंस के तहत अप्रैल 2016 में भारत और मालदीव ने राष्ट्रीय रक्षा बल (एमएनडीएफ) के लिए एक समझौता साइन किया था, जिसके तहत मालदीव की सेना के लिए 70 प्रतिशत से ज्यादा ट्रेनिंग की व्यवस्था भारत करेगा।
भारत ने पिछले 10 सालों में 1400 से ज्यादा मालदीव के जवानों को ट्रेन किया है। इसके अलावा, भारतीय नौसेना ने एमएनडीएफ (मालदीव की सेना) को हवाई निगरानी, MEDEVAC (चिकित्सा निकासी), SAR और हेलो-जनित ऊर्ध्वाधर प्रविष्टि क्षमता के लिए हवाई संपत्ति भी प्रदान की है।
भारत का रक्षा सहयोग संयुक्त अभ्यास, समुद्री डोमेन जागरूकता, हार्डवेयर का उपहार, बुनियादी ढांचे के विकास आदि के क्षेत्रों तक भी फैला हुआ है। मालदीव के रक्षा क्षेत्र की प्रमुख परियोजनाओं में एमएनडीएफ के लिए समग्र प्रशिक्षण केंद्र (सीटीसी), तटीय रडार प्रणाली (सीआरएस), और नए रक्षा मंत्रालय मुख्यालय का निर्माण शामिल है।
अगस्त 2022 में राष्ट्रपति सोलिह की भारत यात्रा के दौरान, भारत ने पहले दिए गये जहाज-सीजीएस हुरवी को एक दूसरे जहाज से बदल दिया, जबकि इसके अलावा मालदीव की सेना को भारत ने लैंडिंग क्राफ्ट असॉल्ट (एलसीए) और 24 यूटिलिटी गाड़ियों की सौगात थी। इसके अलावा, मालदीव के सैनिक भारत में आयोजित अलग अलग नेवी ट्रेनिंग सेशन में शामिल होते रहते हैं।
MNDF नियमित रूप से मानवीय सहायता और आपदा राहत, खोज और बचाव (एसएआर), प्रदूषण नियंत्रण और नई दिल्ली द्वारा आयोजित अन्य अभ्यासों में भाग लेता रहता है।

भारत ने साल 2021 में रक्षा परियोजनाओं के लिए मालदीव को 50 मिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन भी प्रदान की थी और उथुरु थिला फाल्हू बंदरगाह के निर्माण के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। नई दिल्ली, मालदीव के दक्षिण में अड्डू में भी अपनी उपस्थिति विकसित कर रही है, जिसमें एक नई पुलिस अकादमी का निर्माण और वहां एक भारतीय वाणिज्य दूतावास खोलने की योजना शामिल है।
यह मालदीव में क्षमता निर्माण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप है कि भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस साल मई में अपनी यात्रा के दौरान मालदीव के राष्ट्रीय रक्षा बलों को एक फास्ट पेट्रोल वेसल जहाज और एक लैंडिंग क्राफ्ट उपहार में दिया था।
लेकिन, मालदीव की विपक्षी पार्टी पीपीएम ने देश में चीन के कहने पर भारत विरोधी अभियान चलाया और 'इंडिया ऑउट' को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया।
पीपीएम ने तर्क दिया, कि भारत के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाकर और भारतीय सैन्य कर्मियों और प्लेटफार्मों को देश में लाकर, सोलिह सरकार ने देश की संप्रभुता से समझौता किया और मालदीव को "भारत का गुलाम" बना दिया।
लेकिन, पीपीएम की यह बयानबाजी वास्तविकता से काफी अलग है। दरअसल, सोलिह शासन उन समझौतों को ही लागू कर रहा था, जो चीन समर्थक यामीन ने राष्ट्रपति के रूप में भारत के साथ किए थे।
श्रीलंका-मालदीव-भारत समझौता
भारत का सुरक्षा सहयोग इस अर्थ में खुला और पारदर्शी है, कि मालदीव, भारत और श्रीलंका से जुड़े त्रिपक्षीय समुद्री सुरक्षा सहयोग का भी हिस्सा है। भारत, श्रीलंका और मालदीव के बीच यह त्रिपक्षीय सहयोग समुद्री सुरक्षा पर सामूहिक कार्रवाई शुरू करने के लिए बनाया गया है, जिसमें समुद्री डोमेन जागरूकता, कानूनी व्यवस्था, खोज और बचाव में प्रशिक्षण, समुद्री प्रदूषण प्रतिक्रिया, सूचना साझा करना, समुद्री डकैती, नशीली दवाओं के हथियारों और तस्करी पर अंकुश लगाना शामिल है।
और यह मालदीव के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है, जो अपनी घरेलू खाद्य सुरक्षा और निर्यात (विशेष रूप से मछली और संबंधित उत्पादों) के लिए समुद्र पर गंभीर रूप से निर्भर है।
लेकिन फिर, पूर्व राष्ट्रपति सोलिह की मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) सरकार और नेताओं को यामीन के नेतृत्व वाली पीपीएम ने भारत समर्थक के रूप में देखा और भारत के खिलाफ अभियान चलाया, जिसे अब चीन के नये 'गुलाम' राष्ट्रपति मुइज्जू आगे बढ़ाएंगे, जो निश्चित तौर पर भारत के हितों को नुकसान पहुंचाएगा।
-
Badshah Caste: बॉलीवुड के फेमस रैपर बादशाह की क्या है जाति? क्यों छुपाया असली नाम? कौन-सा धर्म करते हैं फॉलो? -
Gold Silver Rate Today: सोने चांदी में जबरदस्त गिरावट, गोल्ड 8000, सिल्वर 13,000 सस्ता, अब ये है लेटेस्ट रेट -
Silver Rate Today: चांदी भरभरा कर धड़ाम! ₹10,500 हुई सस्ती, 100 ग्राम के भाव ने तोड़ा रिकॉर्ड, ये है रेट -
'Monalisa को दीदी बोलता था और फिर जो किया', शादी के 13 दिन बाद चाचा का शॉकिंग खुलासा, बताया मुस्लिम पति का सच -
Gold Rate Today: सोने के दामों में भारी गिरावट,₹10,000 गिरे दाम, दिल्ली से पटना तक ये है 22k से 18k के भाव -
Mumbai Gold Silver Rate Today: सोने-चांदी की कीमतों में जारी है गिरावट, कहां पहुंचा रेट? -
15289 करोड़ रुपये में बिक गई राजस्थान रॉयल्स, कौन हैं खरीदने वाले काल सोमानी, IPL से पहले मचा तहलका -
Badshah Love Story: ‘टटीरी’ वाले रैपर बादशाह की दूसरी दुल्हन Isha Rikhi कौन हैं? कैसे परवान चढ़ा दूसरा इश्क? -
Iran Vs America: खत्म होने वाला है ईरान-इजराइल युद्ध! ट्रंप के बाद अब मोजतबा खामेनेई भी बातचीत के लिए तैयार -
VIDEO: BJP नेता माधवी लता ने एयरपोर्ट पर क्या किया जो मच गया बवाल! एयरपोर्ट अथॉरिटी से कार्रवाई की मांग -
Badshah Divorce Story: बादशाह ने रचाई थी इस ईसाई लड़की से शादी, 8 साल बाद तलाक क्यों? कौन है बेटी और कहां है? -
Badshah Second Marriage: रैपर बादशाह ने रचाई दूसरी शादी? तलाक के 6 साल बाद कौन बनीं रैपर की 'नई पत्नी'












Click it and Unblock the Notifications