तिब्बत के लिए अचानक 'भावुक' हुआ चीन, पहली बार चीनी एयरफोर्स में तिब्बती सैनिकों को मिला प्रमोशन
बीजिंग। 30 अगस्त की रात लद्दाख के चुशुल में चीन की घुसपैठ को फेल किया गया है। इस मौके पर पहली बार सबके सामने ये जानकारी सामने आई कि कैसे स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (एसएफएफ) के तिब्बती सैनिकों ने बहादुरी से चीन का सामना किया। अब चीन एक नई चाल चलते हुए दुनिया के सामने तिब्बत को लेकर अपने भावनात्मक रूप का प्रदर्शन कर रहा है। 31 अगस्त को पहली बार ऐसा हुआ है कि तिब्बती मूल के नॉन कमीशंड ऑफिसर (एनसीओ) को नई रैंक पर प्रमोट किया है। चाइना मिलिट्री की ओर से इस सेरेमनी की तस्वीरें जारी की गई हैं। चाइना मिलिट्री, चीनी सेनाओं का आधिकारिक मुखपत्र है।
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पहले बैच को किया गया प्रमोट
चाइना मिलिट्री ने लिखा है, 'तिब्बत के लोगों को 31 अगस्त को एक नए महान क्षण का साक्षी बनने का मौका मिला। नॉन-कमीशंड ऑफिसर प्रमोशन सेरेमनी पर पहली बार नए प्रमोटेड तिब्बती सैनिकों और कैडर्स के रिश्तेदारों को आमंत्रित किया गया था।' चाइना मिलिट्री की तरफ से बताया गया है कि सेरेमनी का आयोजन वेस्टर्न थियेटर कमांड के तिब्बत स्थित एयरफोर्स स्टेशन पर हुई थी। अखबार के मुताबिक इस मौके पर भारी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। यह पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी एयरफोर्स (पीएलएएएफ) में शामिल तिब्बती सैनिकों का पहला बैच था जिसे प्रमोट किया गया है।

ट्रेनिंग को सरकार ने सफलतापूर्वक किया पूरा
चाइना मिलिट्री ने लिखा है, 'इन तिब्बती युवाओं को एयरफोर्स ने भर्ती किया था, अब ये 'किडनैपिेंग' से आगे बढ़ चुके हैं। मिलिट्री रैंक बदल चुकी है और इन सैनिकों की जिम्मेदारियां भी बदल गई हैं। तिब्बत का हर सैनिक मोर्चे पर सुरक्षा के लिए मुस्तैद है और सेना के साथ शांति कायम करने में काम कर सकता है।' चाइना मिलिट्री के मुताबिक तिब्बती सैनिकों के रिश्तेदार 'पर्दे के पीछे के हीरो' हैं और ऐसे में उन्हें भी इस पल का हिस्सा बनना चाहिए। चाइना मिलिट्री का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार की तरफ से सफलता पूर्वक ऊंचाई वाली जगहों पर ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा किया गया है।

प्रमोशन सेरेमनी में चीन का राष्ट्रगान
जिस समय एनसीओ रैंक सेरेमनी चल रही थी, उस समय चीन का राष्ट्रगान पीछे बज रहा था। तिब्बत के सैनिक जियांग की मां सबसे पहले आईं। वह तिब्बत के नियानिग्शी से आई थीं। अपने बेटे को इस रैंक पर प्रमोट होते देखकर उनकी आंखों में आंसू थे। चाइना मिलिट्री ने बताया है कि भाषा की वजह से जियांग को कभी-कभी पासवर्ड्स समझ नहीं आते थे। इस वजह से उन्हें ट्रेनिंग भी दिक्कतें होती थीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और चीन की मैनड्रिन भाषा सीखी। इसके बाद वह एक बेहतर ऑफिसर बनकर निकले।

तिब्बत पर अमेरिका की नजरें
चाइना मिलिट्री के मुताबिक मिलिट्री रैंक सिर्फ एक सम्मान नहीं है बल्कि महान जिम्मेदारी भी है। चीन की तरफ से प्रमोशन की खबर ऐसे समय में आई है जब भारत में स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (एसएफएफ) की चर्चा है। इसके अलावा चीन इस समय अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में तिब्बत पर अपनी नीतियों को लेकर चर्चा में बना हुआ है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपेयो ने चीन पर तिब्बत के लोगों की इच्छाओं को दबाने का आरोप लगाया है। इसके अलावा उन्होंने जुलाई में बयान दिया था और कहा था कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी हमेशा राजनयिकों और पत्रकारों को तिब्बत में जाने से रोकती है।












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