चीन लूट रहा था पाकिस्तान, रास्ते में डटकर खड़े रहे इमरान खान.. शी जिनपिंग ने लिया था पूर्व PM से बदला?
Imran Khan China: पिछले साल अप्रैल में सत्ता गंवाने वाले पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान भले ही अमेरिका को जिम्मेदार ठहरा रहे थे, लेकिन उनके राजनीतिक कैरियर और पूरे पाकिस्तान में आग लगाने वाला दरअसल चीन था।
पाकिस्तान में मौजूदा शहबाज शरीफ की सरकार के एक मंत्री ने दावा किया है, कि चीन ने इमरान खान को लेकर पहले ही चेतावनी दी थी, कि वो पाकिस्तान में एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं। उन्होंने बकायदा सीपीईसी का भी नाम लिया, जिसे इमरान खान ने रोक दिया था।

चीन ने दी थी चेतावनी
अरबों डॉलर के चायना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) को नुकसान पहुंचाने के लिए पूर्व पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए, पाकिस्तान के संघीय योजना और विकास मंत्री अहसान इकबाल ने शनिवार को खुलासा किया, कि बीजिंग ने तत्कालीन प्रतिष्ठान को इमरान खान को लेकर चेतावनी दी थी।
अहसान इकबाल ने खुलासा किया है, कि चीन ने साल 2018 के आम चुनावों से पहले पाकिस्तान के तत्कालीन सैन्य प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को आम चुनावों से पहले किसी भी "नए प्रयोग" के खिलाफ चेतावनी दी थी।
असहान इकबाल ने जो खुलासा किया है, दरअसल वो आधा ही सच है।
चीन शुरूआत से ही जानता था, कि इमरान चायना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के खिलाफ हैं। CPEC के खिलाफ पहले भी कई बार इमरान खान बोल चुके थे। इमरान खान जानते थे, कि CPEC भ्रष्टाचार का अड्डा है और पाकिस्तान के कई सैन्य अधिकारियों और नेताओं ने CPEC की आड़ में करोड़ों-अरबों का भ्रष्टाचार किया है।
इसके अलावा, इमरान खान ये भी समझ गये थे, कि चीन ने CPEC की आड़ में कर्ज देकर पाकिस्तान को फंसा लिया है। और इसीलिए, इमरान खान बार बार पाकिस्तान की विदेश नीति को लेकर सेना पर निशाना साधते थे। हालांकि, लगता ऐसा था, कि वो अमेरिका पर हमला बोल रहे हैं, लेकिन असल में उनका निशाना चीन की तरफ होता था।
इमरान खान जब साल 2018 में सत्ता में आए, तो सबसे पहले उन्होंने CPEC को बंद कर दिया था, जिससे चीन आग-बबूला हो गया था, क्योंकि ये शी जिनपिंग का बीआरई प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसका मकसद ही छोटे देशों को कर्ज के जाल में फंसाकर उसका राजनीतिक और सैन्य मकसद के लिए इस्तेमाल करना है। लेकिन, तत्कालीन सेना प्रमुख सीपीईसी को जारी रखना चाहते थे, इसीलिए पाकिस्तान में राजनीतिक बवाल बढ़ता चला गया।
पाकिस्तान, चीन के कर्ज जाल में इतना फंसा हुआ था और पाकिस्तान की सत्ता पर सेना का इतना ज्यादा नियंत्रण है, कि इमरान खान चाहकर भी कुछ नहीं कर पाए। चीन की तरफ से पाकिस्तान को कई बार चेतावनी दी गई और शी जिनपिंग ने इमरान खान के शासनकाल में पाकिस्तान को लोन देना भी बंद कर दिया था, फिर भी इमरान खान ने सीपीईसी प्रोजेक्ट को शुरू नहीं होने दिया और नतीजा.. इमरान खान को अपनी सत्ता गंवाकर चुकानी पड़ी।
चीन पर आरोप लगते रहे हैं, कि वो किसी देश की राजनीति को बर्बाद करने के लिए, वहां के नेताओं को भ्रष्ट कर देता है और पाकिस्तान, जहां के नेता पहले से ही भ्रष्टाचार के दलदल में कंठ तक डूबे हों, वहां चीन को सिर्फ लालच ही देना था, बाकी पाकिस्तान के नेता पैसों के लिए खुद ही अपना घर फूंकने के लिए तैयार रहते हैं।
अहसान इकबाल ने क्या कहा?
जियो न्यूज कार्यक्रम 'जिरगा' के दौरान बोलते हुए, पीएमएल-एन नेता अहसान इकबाल ने कहा, कि "चीन ने, कूटनीतिक तरीके से - तत्कालीन प्रतिष्ठान को किसी भी नए प्रयोग से बचने के लिए [एक संदेश] देने की कोशिश की थी, क्योंकि चीन को लग रहा था, कि इमरान खान सीपीईसी को पटरी से उतार देगा।"
अहसान इकबाल ने आगे कहा, कि हालांकि, तत्कालीन सैन्य प्रतिष्ठान ने बीजिंग को आश्वासन दिया था, कि जो भी सत्ता में आएगा, वह मेगा बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी परियोजना (सीपीईसी) के रास्ते में बाधा पैदा नहीं करेगा।
योजना मंत्री ने कहा, कि "बीजिंग ने सत्ता प्रतिष्ठान से चुनाव में हस्तक्षेप न करने को कहा था, क्योंकि "परिवर्तन का कोई भी प्रयोग पाकिस्तान के लिए फायदेमंद नहीं होगा और सीपीईसी को नष्ट कर देगा।"
पूर्व सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ ताजा हमला बोलते हुए पीएमएल-एन मंत्री अहसान इकबाल ने पीटीआई पर गेम चेंजर प्रोजेक्ट को बदनाम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, कि सीपीईसी परियोजना के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए और पश्चिमी मीडिया ने पीटीआई नेताओं के विवादास्पद बयानों को उजागर किया।
कुल मिलाकर... अहसान इकबाल ने जो कुछ भी कहा, वो इमरान खान के शासनकाल के दौरान पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स ने सीपीईसी प्रोजेक्ट बंद होने के बाद करना शुरू कर दिया था। कई पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स ने सीपीईसी प्रोजेक्ट बंद होने के बाद कहा था, कि अब इमरान खान का सत्ता में रहना बेहद मुश्किल है और हुआ भी ऐसा है। तो सवाल ये हैं, कि क्या इमरान खान को शी जिनपिंग ने साजिश के तहत सत्ता से बाहर करवाया?
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