चीन में महीनों से कैद, डिप्रेशन से जान देते लोग, क्या अब कुर्सी बचाने के लिए अत्याचार कर रहे जिनपिंग?

चीन के सबसे बड़े शहरों में से एक शंघाई, पिछले एक महीने से पंगु बना हुआ है और शंघाई के लोग किसी भी तरह से घर से बाहर नहीं निकलें, इसके लिए सड़कों पर वैसे ही बार लगाए गये हैं, जो सरहदों पर लगाए जाते हैं।

हांगकांग, मई 11: दिसंबर 2020 में पहली बार दुनिया को कोविड महामारी के बारे में पता चला था और उस वक्त कोविड का सेंटर था चीन का शहर वुहान। लेकिन, चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने भले ही दुनिया को अंधेरे में रखा, लेकिन उसने बुहान के बाहर कोरोना वायरस को नहीं फैलने दिया और इसका सारा श्रेय गया राष्ट्रपति शी जिनपिंग को। लेकिन, अब हालात बदल चुके हैं और पिछले एक साल में चीन के 40 करोड़ लोग किसी ना किसी तरह से लॉकडाउन में रह रहे हैं और उनकी नाराजदी दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है, जिससे शी जिनपिंग का तीसरी बार राष्ट्रपति बनना मुश्किल होता जा रहा है। आखिर चीन की स्थिति कोविड से कितनी खराब है और शी जिनपिंग कैसे नाकाम हो गये हैं, आइये समझते हैं।

पंगु बना हुआ है शंघाई

पंगु बना हुआ है शंघाई

चीन के सबसे बड़े शहरों में से एक शंघाई, पिछले एक महीने से पंगु बना हुआ है और शंघाई के लोग किसी भी तरह से घर से बाहर नहीं निकलें, इसके लिए सड़कों पर वैसे ही बार लगाए गये हैं, जो सरहदों पर लगाए जाते हैं। कोशिश यह है, कि किसी भी तरह से राजधानी बीजिंग को ऐसी स्थिति से बचाया जाए, लेकिन, शंघाई के लोगों का जीना मुहाल हो गया है। शी जिनपिंग की तरफ से बार बार चीनी कोविड वैक्सीन को लेकर दावे किए गये और अमेरिका समेत भारतीय वैक्सीन पर सवाल उठाए गये, लेकिन अब पता चल रहा है, कि चीन में जिस वैक्सीन का निर्माण हुआ, वो बुरी तरह से फेल साबित हो रहा है, क्योंकि वैक्सीन की तीन-तीन खुराक ले चुके लोग भी गंभीर बीमार हो रहे हैं, जिनमें से कईयों की मौत हो रही है। वहीं, चीन की सरकार में भारत और पश्चिम विरोधी भावना इतनी ज्यादा रही है, कि उसने चीन में किसी भी और देश की वैक्सीन कंपनी को आने की इजाजत नहीं दी, जिसका नतीजा यह हुआ, कि चीन अब एक दुविधा का सामना कर रहा है। अब या तो बड़ी संख्या में लोगों की मौतें होंगी, या देश भर को लंबे समय तक लॉकडाउन में रहना होगा, जिससे आर्थिक और सामाजिक नुकसान होगा।

फेल हो गया है ‘ज़ीरो कोविड पॉलिसी’

फेल हो गया है ‘ज़ीरो कोविड पॉलिसी’

चीन में नियम यह है, कि अगर किसी शहर में कोविड संक्रमित एक भी मरीज पाया जाता है, तो उस शहर में 21 दिनों का अत्यंत सख्त लॉकडाउन लगा दिया जाता है और अगर 10वें दिन नया मरीज मिला, तो फिर वहां से 21 दिनों की गिनती शुरू हो जाती है। जब चीन सरकार की इस नीति की आलोचना शुरू हुई, तो कम्युनिस्ट पार्टी ने अपने भोंपू ग्लोबल टाइम्स के जरिए अमेरिका को धमकी देने से भी नहीं हिचकी। खैर, इससे अमेरिका को तो कुछ नहीं बिगड़ा, लेकिन चीन के करोड़ों लोगों की आर्थिक और मानसिक स्थिति अत्यंत खराब हो चुकी है, क्योंकि वो पिछले कई महीनों से घरों में कैद हैं। लेकिन, सवाल ये उठता है, कि शी जिनपिंग अपने ज़ीरो कोविड पॉलिसी को लेकर इतने सख्त क्यों हैं? तो एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए शी जिनपिंग अब किसी भी हद तक जा सकते हैं और कम्युनिस्ट पार्टी लगातार लोगों को ये संदेश दे रही है, कि दुनिया के किसी भी देश से बेहतर तरीके से शी जिनपिंग ने कोविड मैनेजमेंट किया है और चीन में काफी कम मौतें हो रही हैं।

चीन इस मुकाम तक कैसे पहुंचा?

चीन इस मुकाम तक कैसे पहुंचा?

आखिर चीन इस स्थिति तक कैसे पहुंचा और इस संकट को हल करने के लिए क्या कर सकता है जो न केवल अपने लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए खतरा बन चुका है, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। एशिया टाइम्स से बात करते हुए यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो के 'स्कॉटिश सेंटर फॉर चाइना रिसर्च' का कहना है, वो चीनी सरकार की कोविड रणनीति के रोलरकोस्टर विकास और इसके रोकथाम उपायों के प्रभावों पर नज़र रखे हुए हैं। शोधकर्ताओं की ऑन-द-ग्राउंड रिपोर्ट को नीतिगत दस्तावेज़ों की समीक्षाओं और सोशल मीडिया के प्रसार पर भी बारीक नजर है, जिससे चीन के अतीत, वर्तमान और भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ रहे हैं, उककी भी गंभीरता से आकलन की जा रही है।

ग्राउंडहॉग दिवस

ग्राउंडहॉग दिवस

"हर दिन मैं जागता हूं, तो मुझे पता चलता है कि, मेरे लिए 14 दिनों के क्वारंटाइन दिवस का ये पहला दिन है''। कुछ दिन पहले एक प्रसिद्ध रिपोर्टर, स्तंभकार और शंघाई में लंबे समय से रहने वाले वेई झोउ ने चीन की सोशिल मीडिया वीचैट पर अपने ब्लॉगपोस्ट में ये बात कही थी, जिसे अब हटा दिया गया है। इसमें उन्होंने लिखा था, कि 2 करोड़ 60 लाख लोगों की आबादी वाला शंघाई शहर अब एक महीने से अत्यंत सख्त कोविड लॉकडाउन से गुजर रहा है। स्तंभकार वेई झोउ का यह शीर्षक उस रेग्यूलेशन को संदर्भित करता है, जिसमें कहा गया है कि, अगर कोई भी नया संक्रमित मिलता है, तो 14 दिनों का साइकिल उसी दिन से फिर शुरू हो जाएगा। लिहाजा, 14 दिनों का ये लॉकडाउन खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। लिहाजा, स्थिति ये है, कि शंघाई के लोग अब चिढ़ चुके हैं, उनकी अब अधिकारियों और पुलिसवालों से झगड़े होने लगे हैं, पड़ोसियों के बीच झगड़े होने लगे हैं और उन्हें कुछ नहीं पता है, कि ये 14 दिन कब खत्म होंगे। दूसरी तरफ, कम्युनिस्ट पार्टी का नेतृत्व भी सोच रहा होगा, कि चीन इस महामारी से कैसे बच सकता है? लेकिन, ये तरीका तो बिल्कुल सही नहीं है।

घुटता समाज, घुटती चीन की अर्थव्यवस्था

घुटता समाज, घुटती चीन की अर्थव्यवस्था

चीनी नागरिकों पर अत्यंत सख्त कोविड उपायों का बेहद गंभीर असर पड़ रहा है। शंघाई शहर में सैकड़ों ड्राइवर फंसे हुए हैं, तो छोटे छोटे बच्चे, जो कोविड पीड़ित हुए, उन्हें अकेले ही क्वारंटाइन किया गया है। माता पिता से अलग छोट-छोटे बच्चों का बुरा हाल है और क्वारंटाइन सेंटर्स में भेड़-बकरियों की तरफ शी जिनपिंग की सरकार ने लाखों लोगों को ठूंस रखा है और बाहर सैकड़ों पुलिसवाले मौजूद रहते हैं। यानि, क्वारंटाइन सेंटर जेल बन चुका है। एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चोंगकिंग और शंघाई के बीच करीब 2 हफ्ते तक फंसे रहने के बाद एक ट्रक ड्राइवर जब बाहर निकला, को उसे भी यकीन नहीं हो रहा था, कि वो बाहर निकल चुका है। वहीं, शंघाई के कुछ हिस्सों में, निवासियों को भोजन की कमी का सामना करना पड़ा है। अन्य लोग अस्पताल में इलाज कराने में असमर्थ रहे हैं क्योंकि उन्हें अब पुरानी और लाइलाज बीमारियों के इलाज के लिए जरूरी परमिट नहीं मिल पा रहे हैं।

आत्महत्या कर रहे लोग

आत्महत्या कर रहे लोग

चीनी सोशल मीडिया पर लोग लगातार तस्वीरें डाल रहे हैं, और आत्महत्या से जुड़े मामालों की रिपोर्ट कर रहे हैं, लेकिन उन पोस्ट को हटा दिया जाता है। पिछले हफ्ते शंघाई में एक महिला पत्रकार ने पांचवी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर लीस, क्योंकि वो काफी दिनों से घर में बंद थी और उसके पास खाने-पीने को कुछ नहीं बचा था। वहीं, चीनी सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने के बाद चीन के सरकारी अधिकरी उसे धमकाकर गये थे। वहीं, 13 अप्रैल को जिला कोविड स्वास्थ्य अधिकारी ने आत्महत्या कर ली, क्योंकि वो कई हफ्तों से मरीजों का इलाज कर रहा था और उसे घर जाने नहीं दिया जा रहा था। इस बीच, चीन के लॉकडाउन वाले शहरों में घरेलू हिंसा काफी ज्यादा बढ़ गई है। लैंगिग हिंसा रोकने के लिए काम करने वाले चैरिटी ऑरेंज अम्ब्रेला ने कहा कि, घरेलू हिंसा काफी ज्यादा बढ़ चुकी है और परिवार टूट रहे हैं।

कम्युनिस्ट पार्टी की तानाशाही

कम्युनिस्ट पार्टी की तानाशाही

कम्युनिस्ट पार्टी का दोगलापन देखिए, अभी भी वो चीन में दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले कोविड के मामले काफी कम रिपोर्ट कर रही है, लेकिन इस वक्त जब दुनिया के किसी भी देश में लॉकडाउन नहीं है, तो चीन की 50 प्रतिशत से ज्यादा जनता सख्ततम लॉकडाउन से गुजर रही है। वहीं, शंघाई में 7 मई तक कोविड के कारण 535 लोगों की मौत का आंकड़ा दिया गया, लेकिन हाल ही में बीबीसी की एक रिपोर्ट ने इन नंबरों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गये हैं और कहा गया है कि, कि कोविड से संबंधित कई मौतें बिना रिकॉर्ड की जा रही थीं। असल में शी जिनपिंग और कम्युनिस्ट पार्टी के बाकी नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है, कि उनकी प्राथमिकता कोविड की मौतों को कम करना है, और चूंकि उन्होंने अपनी राजनीतिक व्यवस्था की श्रेष्ठता को चुनौती देने वाले हर रिपोर्ट को खारिज कर दिया है, लिहाजा वो हर हाल में कोविड से होने वाली मौतों के असल आंकड़े को छुपाने की कोशिश करेंगे। इसलिए, अधिकारियों पर राष्ट्रव्यापी मौतों को कम रखने का दबाव है हो सकता है उन्हें अंडर-काउंट या अंडर-रिपोर्ट करने के लिए कहा गया होगा।

शी जिनपिंग फिर बनेंग राष्ट्रपति?

शी जिनपिंग फिर बनेंग राष्ट्रपति?

शी जिनपिंग खुद को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रपति मानते हैं और कम्युनिस्ट विचारधारा को सबसे अच्छी विचारधारा। इसीलिए, उन्होंने कोविड नीति को बदलने की हर सिफारिश को खारिज कर दिया है। लेकिन, क्या वाकई वो जनता के विद्रोह का सामना कर पाएंगे? क्योंकि, जनता की बढ़ती नाराजगी के साथ ही पार्टी के अंदर मौजूद अलग अलग गुटों ने भी शी जिनपिंग की इस तानाशाही नीति के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी है। इसके साथ ही शी जिनपिंग जान गये हैं, कि उन्होंने कई गलतियां की हैं, जिसमें चीन में घटिया चीनी वैक्सीन का इस्तेमाल किया गया है, लिहाजा अब उनके पास सख्ततम लॉकडाउन लगातार लोगों की जान बचाने के लिए देश की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था का गला घोंटने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है। लिहाजा, अब कहना मुश्किल हो रहा है, कि शी जिनपिंग लगातार तीसरी बार भी चीन के राष्ट्रपति बन जाएंगे।

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