सैटेलाइट तस्वीरों ने खोली चीन की झूठ की पोल, श्मशान घाट के बाहर दिखी लाशें ही लाशें, हर दिन 25 हजार मौत?
चीन ने दिसंबर महीने में हुए भारी विरोध प्रदर्शन के बात तमाम कोविड गाइडलाइंस हटा लिए थे, जिसके बाद से ही कोविड मरीजों की संख्या में तूफान की रफ्तार से इजाफा हुआ है।

China Corona Death: कोरोना वायरस ने पूरे चीन को जगड़ रखा है और पिछले एक महीने में चीन में कोरोना वायरस के कितने लोग शिकार बने हैं, इसकी कोई सटीक रिपोर्ट चीन की सरकार ने बाहर नहीं आने दिया है, लेकिन चीन का सबसे बड़ा झूठ छिप नहीं पाया है। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में कोविड महामारी ने किस कदर हाहाकार मचाया है और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने लोगों से कोविड की असलियत को कैसे छिपाया है, उसकी पोल सैटेलाइट तस्वीरों ने खोल दी है। वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, कई चीनी शहरों की सैटेलाइट छवियों ने श्मशान और अंतिम संस्कार सेंटर्स के सामने लगी भीड़ को कैद किया है।

अंतिम संस्कार स्थलों के बाहर भीड़
वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, चीन के चेंगदू में एक अंतिम संस्कार सेंटर के बाहर इतने लाश लाए गये थे, कि वहां के प्रशासन ने लोगों को अपने प्रियजनों को अलविदा कहने के लिए सिर्फ 2 मिनट का समय देना शुरू कर दिया। परिजनों को इतना ही वक्त दिया जाता था, कि वो शव को वहां रख पाते, और फिर फौरन वहां से उन्हें हटा दिया जाता। वहीं, राजधानी बीजिंग के बाहरी इलाके में एक फ्यूनरल पार्लर ने एक नए पार्किंग स्थल के लिए जल्दी से जगह खाली कर दी। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, शंघाई में स्कैलपर्स ने श्मशान घाटों पर लाइन में लगे जगहों को 300 डॉलर प्रति पॉप के हिसाब से बेच दिया। जबकि, चीन ने आधिकारिक तौर पर कहा है, कि 7 दिसंबर के बाद से पूरे चीन में कोरोना वायरस की वजह से सिर्फ 40 लोगों की ही मौत हुई है।

हकीकत छिपा रहा है चीन
हकीकत ये है, कि चीन में हर दिन 3 करोड़ के करीब लोग कोविड संक्रमित रहे हैं और खुद हेनान प्रांत के स्वास्थ्य अधिकारी कह चुके हैं, कि प्रांत के 90 प्रतिशत लोग कोविड संक्रमित हो चुके हैं, फिर भी सिर्फ 40 मौत की बात कहना, चीन का सबसे बड़ा फरेब है। अमेरिकी अखबार ने मैक्सर टेक्नोलॉजीज की सैटेलाइट तस्वीरों को जारी करते हुए खबर दी है, उत्तर में बीजिंग से लेकर पूर्व में नानजिंग तकल और दक्षिण-पश्चिम में चेंगदू और कुनमिंग तक, छह अलग-अलग शहरों में अंतिम संस्कार सेंटर्स के बाहर लाशों की भरमार देखी गई है। सोशल मीडिया पर भी कई ऐसी तस्वीरें पोस्ट की गई हैं, जिनमें श्मशान सेंटर्स के बाहर लाशों की कतारें देखी गईं हैं।

क्या कहते हैं चश्मदीद?
दक्षिण-पश्चिम चीन के चोंगकिंग में जियांगन फ्यूनरल होम में एक रिसेप्शनिस्ट ने क्रिसमस से ठीक पहले और बाद के दिनों में श्मशान सेंटर्स में आने के लिए कारों की लंबी कतारों की बात करते हुए कहा कि, "मैंने यहां छह साल तक काम किया है और यह इतना व्यस्त कभी नहीं रहा।" उसने कहा कि, "फ्रीज़र भरे हुए थे और सभी आठ चिता लगातार 24 घंटे चल रहे थे।" वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम चार अंतिम संस्कार घरों ने परिजनों को अंतिम क्रिया से पहले आखिरी परंपरा निभाने की इजाजत देनी बंद कर दी है। श्मशान सेंटर्स पर सिर्फ अब लाशों का अंतिम संस्कार किया जाता है और उनके अवशेष को सुरक्षित रखा जाता है, जिन्हें बाद में परिजनों को सौंपा जाएगा।
Recommended Video


चीन की स्थिति क्यों बिगड़ी?
कोविड संक्रमण के दौरान पिछले दो सालों से चीन ने सख्त कोविड पॉलिसी की वजह से ज्यादा लोगों को मौत से बचा रखा था, जैसा पश्चिमी देशों ने देखा था। चीन इस दौरान कोविड संक्रमण को लेकर अपनी श्रेष्ठता साबित करता रहा। चीनी सरकार लगातार इस बात पर जोर दे रही है, कि 7 दिसंबर के बाद से चीन में कोविड से 40 से कम लोगों की मौत हुई है। लेकिन, हकीकत इसके ठीक उलट है। महामारी की शुरुआत से ही चीनी अधिकारी कोविड मौतों की गिनती कैसे करते हैं, यह विवाद का विषय रहा है। वाशिंगटन पोस्ट ने बताया, कि दिसंबर के बाद से सिर्फ सांस लेने में तकलीफ से मरने वाले लोगों को ही कोविड से हुई मौतों की लिस्ट में शामिल किया जाता है। जबकि, कोविड की वजह से हुई अन्य मौतों को इसमें शामिल नहीं किया जाता है। चीन सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अभी तक चीन में सिर्फ 5200 लोगों की ही मौत हुई है।

चीन में कोविड से कितनी मौतें?
ग्लोबल हेल्थ एनालिटिक्स फर्म एयरफिनिटी ने दावा किया है, कि चीन में 1 दिसंबर 2022 के बाद से करीब 5 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, एयरफिनिटी का दावा है, कि 23 जनवरी के बाद से चीन में कोविड से हर दिन कम से कम 25 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो सकती है। वहीं, मैक्सार लैब की सैटेलाइट तस्वीरों ने चीन के झूठ की पोल खोलकर रख दी है। चीन में मौत की सबसे बड़ी वजह ये है, कि ज्यादातर लोगों ने कोविड का बूस्टर डोज तो नहीं ही लिया है, इसके साथ ही चीन का वैक्सीन भी काफी कमजोर है, लिहाजा अब चीन ने विदेशी वैक्सीन को भी मंजूरी दे दी है।












Click it and Unblock the Notifications