अमेरिका का 'बाप' बनने की खौफनाक तैयारी.. चीन में चौबीसों घंटे चल रहा युद्धपोतों का उत्पादन, 'नर्क नीति' से डर?

China-US Military Strength: दुनिया पर कब्जा करने की चीन की नीति ने उसे इस संसार के लिए विनाशक बना दिया है और अब चीन के मिलिट्री एक्सपर्ट्स ने कहा है, कि PLA की युद्धपोतों की निर्माण की क्षमता उसे भारी रणनीतिक बढ़त देने वाला है।

रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि चीन लगातार युद्धपोतों और जहाजों का निर्माण कर रहा है, ताकि वो दुनिया के हर कोने में एक साथ युद्ध लड़ सके, चाहे कितना भी विनाश क्यों ना हो। उसकी एक ही ख्वाहिश है, कि चीन इस दुनिया का सम्राट बने, जैसा चीनी इतिहासकारों ने चीन को लेकर किताबों में कहा है।

china shipbuilding capabilities

चीन इसलिए भी काफी तेजी से सैन्य सामानों का निर्माण कर रहा है, क्योंकि हाल ही में अमेरिका ने उसके खिलाफ "हेलस्केप स्ट्रैटजी" अपनाई थी, यानि 'नरक के समान नजारा वाली नीति' और चीन की कोशिश अब दुनिया में सबसे ज्यादा युद्धपोतों के निर्माण की है और इसके लिए उसने अपने कारखाने पूरी क्षमता के साथ खोल दिए हैं।

थिंक टैंक रैंड कॉर्पोरेशन के ताइवान इनिशिएटिव के डायरेक्टर रेमंड कुओ ने कहा, कि जापान और दक्षिण कोरिया के साथ-साथ चीन के पास "दुनिया का सबसे बड़ा जहाज निर्माण उद्योग" है और वह अमेरिका की तुलना में काफी तेज रफ्तार से जहाजों का उत्पादन कर सकता है। उन्होंने कहा, कि "जबकि अमेरिकी जहाज ज्यादा जटिल होते हैं और उनका विस्थापन ज्यायादा होता है... लेकिन चीन की अपेक्षाकृत तेजी से नौसैनिक जहाज बनाने की क्षमता का मतलब है, कि वह संयुक्त राज्य अमेरिका की तुलना में किसी भी युद्ध नुकसान की भरपाई ज्यादा तेजी से कर सकता है।"

चीन आखिर करना क्या चाहता है?

आज की तारीख में चीन किसी भी देश को शांति के साथ विकास करने नहीं दे सकता है। खासकर भारत जैसे देशों को, जिसने विकास को अपना लक्ष्य बनाया हुआ है और अगर भारत अपने लक्ष्य की तरह बढ़ता रहा, तो फिर चीन के लिए अपना प्रभुत्व बनाना संभव नहीं हो पाएगा।

रेमंड कुओ ने कहा, कि "चीन के लिए सबसे अच्छी बात ये है, कि अगर ताइवान संघर्ष छिड़ता है, या फिर फिलीपींस के साथ उसका युद्ध शुरू होता है, तो ये तमाम समुद्री इलाके उसके करीब हैं।"

मई महीने के अंत में पेरिस स्थित नेवल न्यूज ने सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर विश्लेषण किया है, कि चीन ने हाल ही में टाइप 055 विध्वंसक, जो उसका सबसे एडवांस और प्रमुख युद्धपोत है, उसे लॉन्च किया है। चीन ने ये जहाज अपने डालियान शिपबिल्डिंग में बनाया है।

चीन के पास अब कुल मिलाकर 10 टाइप 055 विध्वंसक युद्धपोत हो गये हैं।

पहला टाइप 055 विध्वंसक युद्धपोत को 2020 में चालू किया गया था और आठ विध्वंसक जहाज का पहला बैच पहले से ही सेवा में आ गया है और दूसरे बैच का निर्माण काफी तेजी से चल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 9वें जहाज को पिछले साल और 10वें जहाज को इस साल कमीशन कर कर दिया गया है।

नेवल न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है, कि डालियान शिपबिल्डिंग ने पांच टाइप 052 विध्वंसक जहाजों को भी कमीशन किया है, जिन्हें ड्राई डॉक में रखा गया है और इसी डॉक में चीन ने अपने पहले एयरक्राफ्ट कैरियर लिओनिंग का आधुनिकीकरण किया था।

इस महीने की शुरुआत में सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज की एक रिपोर्ट में कहा गया था, कि चीन का "विशाल जहाज निर्माण उद्योग कुछ हफ्तों से ज्यादा समय तक चलने वाले युद्ध में उसे रणनीतिक लाभ प्रदान करेगा"। यानि, युद्ध के दौरान चीन लगातार युद्धपोतों का निर्माण कर सकता है, जो उसे दुश्मनों के खिलाफ भारी लाभ देगा।

ऐसा इसलिए, कि मान लीजिए युद्ध के दौरान चीन का कोई युद्धपोक क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो वो उन युद्धपोतों को फौरन बदल सकता है, काफी तेजी से उनकी मरम्मत कर सकता है और उन युद्धपोतों की जगह नये युद्धपोत युद्ध में भेज सकता है।

लेकिन अमेरिका के साथ ऐसा नहीं है, भले ही वो सुपरपावर हो। रिपोर्ट में कहा गया है, कि युद्ध की स्थिति में अगर अमेरिका का कोई युद्धपोत क्षतिग्रस्त होता है, तो उसे बदलने में चीन की तुलना में उसे काफी ज्यादा वक्त लगेगा और यहां वो चीन से पीछे हो सकता है।

और शायद यही वजह है, कि चीन को काउंटर करने के लिए और ताइवान पर हमले की स्थिति में उसे बचाने के लिए अमेरिका ने ताइवान स्ट्रेट में 'नर्क नीति' अपनाई है, जिसकी पुष्टि ताइवान स्ट्रेट में एडमिरल सैमुअल पापारो ने की है। इसके तहत अमेरिका अपने अत्याधुनिक ड्रोन मिसाइलों को विकसित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। यानि, अमेरिका ड्रोन हमलों से चीन के जहाजों को रोकने की कोशिश करेगा।

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चीन को रोकने के लिए अमेरिका क्या कर रहा है?

चीन ने साफ शब्दों में कह रखा है, कि ताइवान पर कब्जा करने के लिए उसे बलप्रयोग से इनकार नहीं है और यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर पापारो ने कहा है, कि युद्ध की स्थिति में उसे समय हासिल हो, और ताइवान की रक्षा हो सके, इसके लिए वो चीनी बेड़े पर घातक ड्रोन हमले करने की योजना बना रहा है, ताकि चीन की सेना को विचलित किया जा सके और चीन इस बात को जानता है, इसीलिए अपनी नेवल क्षमता का तेजी से विस्तार कर रहा है।

लेकिन, अमेरिका की रणनीति को लेकर डिफेंस एक्सपर्ट्स को काफी शक है। सिंगापुर में एस. राजारत्नम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के सीनियर फेलो कोलिन कोह का मानना है, कि वाशिंगटन को इस रणनीति को लागू करने से पहले "बहुत काम करना होगा", जिसमें सैन्य भंडार बढ़ाना और भारी संख्या में ड्रोन का उत्पादन करना होगा।

उन्होंने कहा, कि "आपको भूलना नहीं चाहिए, कि अगर आपको ताइवान को बचाना है, तो फिर चीन की क्षमता को आपको बेसअर करनी होगी और युद्ध जारी रखने की चीन की क्षमता को खत्म करना होगा।"

उन्होंने कहा, कि "आपको चीन के शिपयार्ड को नष्ट करना होगा, ताकि वो नये युद्धपोतों का निर्माण नहीं कर पाए और इसके साथ अमेरिका को युद्धपोतों के निर्माण की अपनी क्षमता में भारी इजाफा करना होगा। इसके अलावा, लंबी दूरी की सटीक गाइडेड मिसाइलें, जैसे क्रूज मिसाइलों का निर्माण करना होगा।"

यूएस नेवल इंस्टीट्यूट ने 2021 में कहा है, कि अमेरिका के पास युद्धपोतों के निर्माण के लिए सिर्फ सात शिपयार्ड हैं, जहां बड़े युद्धपोत बनाए जा सकते हैं, लेकिन चीन के पास 20 शिपयार्ड हैं, जहां वो काफी तेजी के साथ युद्धपोतों का निर्माण कर सकता है। इसके अलावा, चीन के पास दर्जनों कॉमर्शियल शिपायर्ड हैं, जहां आम जहाजों का निर्माण होता है और जरूरत पड़ने पर चीन उसका भी इस्तेमाल करेगा। इसके अलावा, ताइवान क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति भी चीन के लिए अनुकूल है, जबकि अमेरिका को प्रशांत क्षेत्र में चीन के समुद्री मार्गों पर बल लगाना पड़ता है।"

टाइप 055 विध्वंसक कितना खतरनाक

टाइप 055 विध्वंसक को इसके आकार और क्षमताओं के कारण मिसाइल क्रूजर भी कहा जाता है। ये विध्वंसक जहाज 180 मीटर लंबा है, और इसकी चौड़ाई 20 मीटर है। इसका पूर्ण भार पर इसका विस्थापन लगभग 13,000 टन है।

इसमें 112 वर्टिकल लॉन्च सिस्टम सेल हैं - मोबाइल नेवल प्लेटफॉर्म पर मिसाइलों को रखने और फायर करने के लिए ये एक एडवांस सिस्टम है, जिसमें HHQ-9 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और YJ-18 एंटी-शिप मिसाइलें शामिल हैं। अप्रैल 2022 में सामने आए फुटेज में टाइप 055 को चीन की नवीनतम हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल, YJ-21 का परीक्षण करते हुए दिखाया गया था।

कोह का कहना है, कि चीन ने लगातार विदेशी टेक्नोलॉजी आयात किया है और फिर उसका स्वदेशीकरण किया गया, जिसने चीनी शिपयार्ड को काफी ज्यादा आक्रामक और परिवक्व बना दिया, लिहाजा टाइप 055 विध्वंसक युद्धपोत काफी खतरनाक है और कई देशों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

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