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भूटान की जमीन पर कब्जा कर चीन ने बसाए तीन गांव, तिब्बत से लोगों को रहने बुलाया, ये तो भारत पर सीधा खतरा है!

चीन और भूटान के बीच सीमा वार्ता जारी है। इसी दौरान चीन कथित तौर पर विवादित इलाके में गांवों का तेजी से निर्माण भी कर रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने भूटान सीमा पर विवादित इलाके में 200 से ज्यादा घर बना डाले हैं।

ये खुलासा हॉन्गकॉन्ग से प्रकाशित अखबार 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' की रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों को अलग करने वाले पर्वतीय क्षेत्र में कम से कम तीन गाँव बनाए गए हैं, जिनका आकार कुछ समय में ही दोगुना हो गया है।

Chinese village construction in disputed zone

रिपोर्ट के मुताबिक तमालुंग नाम का गांव कुछ समय पहले ही बनाया गया है। तमालुंग में बीते साल 28 दिसंबर को 38 लोगों को शिफ्ट किया गया था। ये सभी लोग तिब्बती शहर शिगात्से के रहने वाले थे। इस गांव में शिफ्ट होने वाला ये पहला जत्था था। इसके बाद से लगातार यहां पर लोगों को बसाए जाने का सिलसिला जारी है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि हाल ही में चीनी सरकार ने तमालुंग गांव में 18 लोगों को बसाया है। जब ये गांव में बसने आ रहे थे तो इन सभी लोगों के हाथों में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की जैसी बड़ी तस्वीर थी।

रिपोर्ट में बताया गया है कि ये गांव चीन द्वारा विवादित क्षेत्र के अंदर बनाए गए कम से कम तीन गांवों में से एक है। चीन ने साल 2023 के उत्तरार्ध में तेजी से इन गांवों का विस्तार किया है। दिसंबर में ही एक अमेरिकी सैटेलाइट इमेजरी कंपनी मैक्सार ने सैटेलाइट इमेज के जरिए बताया था कि इस इलाके में 147 नए घर बनाए गए हैं।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि गांव का विस्तार 235 परिवारों को बसाने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके पहले 2022 तक यहां 70 घर बनाए गए थे जिनमें 200 लोग रहते थे।

2023 की फंडिंग रिपोर्ट के अनुसार, तमालुंग गांव को 3.6 मिलियन डॉलर की फंडिंग के साथ विकसित किया गया था, जिसमें नए घरों के विकास, दो पुलों के निर्माण, सड़कों को पक्का करने सहित अन्य कार्यों पर पैसा खर्च किया गया था।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने अधिकारियों के हवाले लिखा है कि इस गांव को शी जिनपिंग सरकार गरीबी उन्मूलन योजना के एक हिस्से के रूप में निर्मित किए गए हैं। हालांकि इसका एक अन्य उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए गढ़ के रूप में विकसित करना भी है।

चीन तेजी से भूटान के उत्तरी इलाकों के पास इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप कर रहा है। चीन का कहना है कि यह उसके तिब्बती क्षेत्र का हिस्सा है और इसका भूटान से कोई संबंध नहीं है। वहीं, अभी तक भूटान सरकार ने इस बारे में आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं दिया है।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने लिखा है कि भूटान ने अब तक इन गांवों से उत्पन्न विवाद को कमतर आंका है, लेकिन इसका सबसे करीबी साझेदार भारत लगभग 495 वर्ग किमी (191 वर्ग मील) के विवादित सीमा क्षेत्र के घटनाक्रम पर कड़ी नजर रख रहा है।

वेबसाइट ने आगे ये भी लिखा है कि चीनी सरकार तमालुंग के पूर्व में, एक और सीमावर्ती गांव, ग्यालाफुग में भी तेजी से विकास कार्यों को अंजाम दे रही है। यहां पर 150 से अधिक घरों के लिए लगभग 16 वर्ग किमी (10 वर्ग मील) को नष्ट कर दिया गया है।

आपको बता दें कि चीन और भूटान के बीच किसी प्रकार का डिप्लोमैटिक रिश्ता नहीं हैं। हालांकि दोनों देशों के अधिकारी बातचीत के चैनल खुले रखते हैं। चीन और भूटान के बीच 1984 से ही सीमा वार्ता चल रही है। चीन अब तक 12 देशों से सीमा विवाद सुलझा चुका है। भारत और भूटान के साथ यह मामला अब तक चल रहा है।

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