Special Report: अमीरों की लिस्ट के साथ चीन का ‘फ्रॉड’, क्यों हर साल बदल जाते हैं धनकुबेर

चीन के किसी दावे पर यकीन करना क्यों मुश्किल होता है, ये आप चीन के सबसे अमीर व्यक्तियों की लिस्ट को जानने के बाद जान जाएंगे। चीन के रईसों पर नजर रखने वालों का कहना है कि हर 3-4 साल में वहां अमीरों की लिस्ट बदल जाती है

China Billionaire Fraud: नई दिल्ली: चीन के किसी दावे पर यकीन करना क्यों मुश्किल होता है, ये आप चीन के सबसे अमीर व्यक्तियों की लिस्ट को जानने के बाद जान जाएंगे। चीन के रईसों पर नजर रखने वालों का कहना है कि हर 3-4 साल में वहां अमीरों की लिस्ट बदल जाती है. 2017 में चीन के रियल एस्टेट डेवलपर और एवरग्रेंड ग्रुप (Evergrande Group) के मालिक हुई का यान (Hui Ka Yan) सबसे ज्यादा अमीर थे। लेकिन एक साल बाद अलीबाबा ग्रुप के जैक मा (Jack Ma) चीन के नंबर वन अमीर बन गये। अब जैक मा भी सबसे ज्यादा अमीर होने के सिंहासन से उतर चुके हैं। उनकी जगह अब झोंग शानशान (Zhong Shanshan) ने ले ली है। शानशान पानी का बोतल बनाने वाली कंपनी नोंगफू स्प्रिंग (Nongfu Spring) के मालिक हैं।

CHINA RICH LIST

ब्लूमबर्ग बिलिनेयर इंडेक्स में वे इस समय दुनिया के छठे सबसे रईस है। उनकी कुल संपत्ति 88.9 अरब डॉलर है। उन्होंने लैरी पेज और वॉरेन बफेट को इस लिस्ट में पीछे छोड़ दिया है। इस तरह अमीरों की लिस्ट में बदलाव के कारण अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या चीन के अमीर सच में उतने अमीर हैं, जितना दावा किया जाता है?

चीन में अमीरों की लिस्ट बदल क्यों जाती है?

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के अमीरों की जिंदगी में ये भूचाल चीन की अर्थव्यवस्था में बार बार कम्युनिस्ट पार्टी के तानाशाही शासन और आदेश की वजह से होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। 2017 तक चीन के रियल स्टेट कारोबारी काफी तेजी के साथ अमीर होते जा रहे थे, लेकिन तभी शी जिनपिंग ने चीन में ड्रैकोनियन कॉर्पोरेट डेलिवर्जिंग कैम्पेन लॉन्च कर दिया। लेकिन, चीनी सरकार के इस कैम्पेन ने 2017 रियल एस्टेट डेवलपर और एवरग्रेंड ग्रुप की बैंड बजाकर रख दी। स्थिति ये हो गई कि एवरग्रेंड ग्रुप की स्थिति दिनोदिन खराब होने लगी और इसके अमीरों की लिस्ट में फिसलकर काफी नीचे आ गये।

इस बार शी जिनपिंग के निशाने पर जैक मा

चीन में एक बार फिर से राजनीतिक हवा बदल गई है, जिसकी चपेट में बड़े बड़े उद्योगपति आ रहे हैं। सबसे ज्यादा असर अलीबाबा ग्रुप (Alibaba Group) के मालिक जैक मा पर पड़ा है। चीनी राष्ट्रपति की नजर में जैक मा अपनी विश्वसनीयता बहुत हद तक खो चुके हैं। कुछ दिन पहले जैक मा 35 बिलियन डॉलर का IPO जारी करने वाले थे, लेकिन एन वक्त पहले चीन की सरकार ने उनके पल्बिक फंड रेजिंग पर रोक लगा दी। इस वजह से जैक मा की कंपनी को अरबों का नुकसान उठाना पड़ा। साथ ही करीब तीन महीने तक जैक मा खुद चीन में अज्ञातवास में रहे। इस वक्त चीन में फूड मार्केट का कारोबार आसमान पर चल रहा है।

JACK MA

संपत्ति और सच में जमीन आसमान का फर्क!

बात अगर शानशान की करें तो अगर वे अपनी पूरी संपत्ति बेच दें तो क्या उसकी वैल्यू जितना दावा किया जा रहा है, उतनी होगी? इसे समझने की जरूरत है। शानशान की कुल संपत्ति में 74 अरब डॉलर की हिस्सेदारी उनकी वाटर कंपनी में 84 फीसदी स्टेक के कारण है। आईपीओ जारी होने के बाद से इस कंपनी ने अब तक 180 फीसदी का रिटर्न दिया है। इसके कारण शेयर आसमान छू रहा है और उनकी संपत्ति बढ़ती जा रही है। अगर शानशान इस कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचकर धन इकट्ठा करना चाहें तो वे कितना फंड इकट्ठा कर पाएंगे?

ZHONG

रिपोर्ट के मुताबिक, नोंगफू स्प्रिंग का शेयर कोलैक्ट्रल लोन के लिए उतना ज्यादा क्रेडिबल नहीं माना गया है। हांगकांग आधारित फिलिप सिक्यॉरिटीज ग्रुप के मुताबिक, नोंगफू स्प्रिंग के लिए लोन टू वैल्यू रेशियो महज 50 फीसदी है। इसका मतलब अगर किसी के पास कंपनी का 1 लाख रुपए वैल्यू का शेयर है तो बैंक उस शेयर को गिरवी रखकर 50 हजार तक लोन ही उपलब्ध करवा रहे हैं। फिलिप सिक्यॉरिटीज का कहना है कि अगर हांककांग टायकून ली-का शिंग अपनी कंपनी CK Hutchison Holdings के शेयर को गिरवी रखना चाहें तो लोन टू शेयर रेशियो 80 फीसदी है। इसका मतलब 1 लाख रुपए के शेयर वैल्यू पर 80 हजार का लोन आसानी से मिल सकता है। इससे यह साफ होता है कि चाइनीज अमीर इसलिए इतने अमीर हैं, क्योंकि उनके पास कंपनी में अच्छी खासी हिस्सेदारी होती है और समय-समय पर उसके शेयर में ऐतिहासिक तेजी आती है।

ये सिर्फ चीन का प्रोपेगेंडा है?

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट और रैंकिंग में जितने चाइनीज अमीर हैं, उनके पास अपनी कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी है। यह क्लोजली हेल्ड कंपनीज होते हैं। ज्यादातर कंपनियों के लिए लोन-टू वैल्यू रेशियो काफी कम हैं। ऐसे तमाम कारणों से यह सवाल उठने लगा है कि क्या चीन के अमीर सच में अमीर हैं? इसके साथ ही सवाल उठते हैं कि आखिर चीन ने विश्व की अर्थव्यवस्था और खुले बाजार के साथ क्या क्या झूठ बोल रखा है? क्योंकि, इन तस्वीरों को देखने के बाद चीन के दावों पर यकीन करना कतई आसान नहीं है।

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