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Hotan Air Base: लद्दाख के पास चीनी हॉटन एयरबेस का दूसरा रनवे भी एक्टिवेट, J-20 स्टील्थ उतारकर दिखाई थी ताकत

Hotan Air Base: लद्दाख की सीमा के पास चीन ने अपनी आक्रामकता को काफी ज्यादा बढ़ा दिया है और ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने हाल ही में भारत के पूर्वी लद्दाख क्षेत्र के पास स्थित हॉटन एयर बेस पर अपना दूसरा रनवे सक्रिय कर दिया है।

हॉटन एयरबेस को लेकर इस डेवलपमेंट की रिपोर्ट सबसे पहले प्रसिद्ध OSINT विश्लेषक डेमियन साइमन ने दी है, जो सोशळ मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर @detresfa_ नाम से एक्टिव हैं।

China activates 2nd runway of Hotan Air Base

डेमियन ने 8 अप्रैल को एयरबेस की सैटेलाइट तस्वीरें जारी की हैं, जिसमें दिखाया गया है, कि दूसरा रनवे चालू हो चुका है। उन्होंने रेखांकित करते हुए कहा है, कि इस एयरबेस में "ऑपरेशन पावर और प्रभावकारिता को बढ़ावा देने के मकसद से बुनियादी ढांचे में सुधार किया गया है।"

हॉटन एयरबेस पर दूसरा रनवे तैयार

भारत के कुछ डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है, कि इस रनवे का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद चीन इस क्षेत्र में और भी ज्यादा आसानी से सैनिकों और हथियारों की तैनाती कर सकता है, जिससे क्षेत्र में तनाव और भी ज्यादा बढ़ेगा।

इस एयरबेस को लेकर जो तस्वीरें सार्वजनिक हुई हैं, उनसे पता चलता है, कि फिलहाल रनवे चालू होने के बावजूद चीन ने बड़े हथियारों या फाइटर जेट्स की फिलहाल तैनाती नहीं की है। हालांकि, नये बने रनवे, पिछले रनवे की तुलना में ज्यादा लंबा दिखाई देता है। इसके अलावा, नए हॉटन रनवे के साथ नए एप्रन और सैन्य भवन भी बनाए गए हैं।

हॉटन रनवे को लेकर ये नया डेवलपमेंट भारत के लिए चौंकाने वाली बात नहीं है, क्योंकि भारतीय अधिकारियों को पहले से ही हॉटन में चल रहे निर्माण के बारे में जानकारी थी। पिछली सैटेलाइट तस्वीरों में हॉटन में एक अंडरग्राउंड ऑटोमेटिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का डेवलपमेंट भी दिखाया गया था।

China activates 2nd runway of Hotan Air Base

क्या कहते हैं भारत के डिफेंस एक्सपर्ट्स?

लेफ्टिनेंट जनरल राकेश शर्मा, जिन्होंने कारगिल, सियाचिन ग्लेशियर और पूर्वी लद्दाख की देखरेख करने वाली लद्दाख कोर की कमान संभाली थी, उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा है, कि "हॉटन एयरबेस, टकलामकन रेगिस्तान के तारिम बेसिन में है। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण हवाई क्षेत्र है! पूर्वी लद्दाख के सामने का क्षेत्र होटन क्षेत्र के अंतर्गत आता है!"

ऐसा माना जाता है, कि हॉटन एयर बेस का इस्तेमाल पीएलए वायु सेना (PLAF) की तरफ से संघर्ष की स्थिति में भारत के खिलाफ महत्वपूर्ण हवाई अभियान चलाने के लिए लॉन्च पैड के रूप में किया जाएगा। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में भारत और चीन के संबंधों में नरमी जरूर आई है, बावजूद इसके ड्रैगन की तैयारियों में कोई कमी नहीं आई है। चीन लगातार अपनी सैन्य तैयारियों को अपग्रेड कर रहा है।

साल 2020 में, चीन के PLAAF ने हॉटन एयर बेस पर सीमा पर बड़े पैमाने पर निर्माण किया था। इसके बाद से चीन ने एयरबेस पर कई फाइटर जेट और ड्रोन तैनात कर दिए हैं। उदाहरण के लिए, जून 2022 में, PLAAF ने हॉटन में लगभग दो दर्जन फ्रंटलाइन लड़ाकू विमान तैनात किए, जिनमें J-11 और J-20 स्टील्थ फाइटर जेट शामिल थे। इससे पता चलता है, कि संघर्ष की स्थिति में चीनी फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट्स को भारत के खिलाफ उतार सकता है।

उस समय सरकारी सूत्रों ने कहा था, कि "चीनी पहले वहां मिग-21 श्रेणी के लड़ाकू विमानों की टुकड़ियां रखते थे, लेकिन अब उनकी जगह अधिक सक्षम और सोफिस्टिकेटेड विमान और चीन का सबसे उन्नत पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ जेट J-20 तैनात कर चुका है।

चीनी वायु सेना ने पहली बार 2020 में संघर्ष के चरम स्थिति में अपने J-20 पांचवीं पीढ़ी के जेट को भारतीय क्षेत्र के करीब तैनात किया था। सरकारी सूत्रों के अनुसार, J-20 को कथित तौर पर चीन के झिंजियांग प्रांत में हॉटन एयरबेस से उड़ान भरते देखा गया था, जहां रणनीतिक बमवर्षक और अन्य लड़ाकू विमान भी तैनात थे।

हॉटन के अलावा, चीनी एयरफोर्स कथित तौर पर अन्य सीमावर्ती ठिकानों को ऑपरेशन और युद्ध के लिए तैयार करने के लिए काम कर रहा है। इन ठिकानों में कठोर शेल्टर होम, रनवे का विस्तार और अधिक संचालन करने के लिए ज्यादा जनशक्ति तैनात करके सुधार और उन्नत किया गया है।

पिछले साल सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला था, कि चीन ने हॉटन, नगारी गुंसा और ल्हासा में हवाई क्षेत्रों में अपने बुनियादी ढांचे का विस्तार कर लिया है। इन विस्तारों में ज्यादा से ज्यादा रनवे का निर्माण, लड़ाकू विमानों की सुरक्षा के लिए मजबूत आश्रय स्थल और LAC के पास ज्यादा सैन्य संचालन भवनों का निर्माण शामिल है।

हॉटन में दूसरे रनवे के निर्माण के अलावा, चीन पैंगोंग त्सो झील पर एक दूसरे पुल के निर्माण में भी लगा हुआ है, और इसका खुलासा भी सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ है। इस सभी सैन्य और सहायक बुनियादी ढांचे को बनाने का लक्ष्य, आक्रामक क्षमताओं का निर्माण करना और तत्काल सेना की तैनाती करना है।

चीन की आक्रामकता के खिलाफ भारत की क्या है तैयारी?

ऐसा नहीं है, कि सिर्फ चीन ही आक्रामक तैयारी कर रहा है। भारत भी लगातार सीमावर्ती क्षेत्र में इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास कर रहा है। जिसमें अरूणाचल प्रदेश में रणनीतिक तौर पर सुरंग का उद्घाटन भी शामिल है, जिसने ड्रैगन को बिलबिला कर रख दिया है।

अरूणाचल में भारत ने दुनिया की सबसे बड़ी सुरंग तैयार की है, जो डबल सेन सुरंग है, जिसे आधिकारिक तौर पर 9 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन किया था। इस सुरंग के जरिए तवांग और चीन की सीमा से लगे क्षेत्रों में भारतीय सेना फौरन पहुंच सकती है और इस सुरंग से भारत का ऑपरेशनल पावर और स्ट्रैटजिक गहराई बढ़ जाती है।

इस सुरंग की लंबाई करीब 12 किलोमीटर है, जिसमें 8 किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र को कवर किया गया है और इसकी लागत 8.25 अरब रुपये है। ये सुरंग 13,000 फीट (3,962 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है।

चूंकि चीन ने भी अरुणाचल प्रदेश राज्य पर अपना दावा ठोका हुआ है, लिहाजा चीनी अधिकारियों ने इस क्षेत्र को "चीन के क्षेत्र का स्वाभाविक हिस्सा" बताते हुए पीएम मोदी के सुरंग खोलने की निंदा की थी।

डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है, कि चीन ने दशकों से भारत की सीमा से सटे इलाकों में खतरनाक तरीके से इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास किया है और अब भारत सड़क और सुरंगों का निर्माण कर उस असंतुलन को ठीक करने की कोशिश कर रहा है। चीन ने अरूणाचल पर अपने दावे को मजबूत करने के लिए कई गांवों का निर्माण किया है, और भारत के लिए ये चिंता की बात है। हालांकि, अब भारत काफी तेजी से इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास कर रहा है, फिर भी चीनी असंतुलन खत्म करने में अभी कई साल और लगेंगे।

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