चीन में हफ्ते में 3 घंटे ही Online games खेल पाएंगे बच्चे, जानिए क्यों लिया इतना सख्त फैसला

सिंगापुर, 31 अगस्त: चीन में बच्चों के ऑनलाइन गेम्स पर बहुत ही सख्त फैसला लिया गया है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की सरकार ने तय कर दिया है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चे हफ्ते में 3 घंटे से ज्यादा ऑनलाइन गेम्स नहीं खेल पाएंगे। शायद चीन का यह पहला ऐसा फैसला होगा, जो भारत के करोड़ों माता-पिताओं को भी भा रहा होगा। हालांकि, ऑनलाइन गेम की दुनिया में चीन को विश्व में बादशाहत हासिल है, लेकिन फिर भी उसने इसको तरजीह न देते हुए बच्चों के भविष्य को देखते हुए यह फैसला लिया है।

हफ्ते में 3 घंटे ही ऑनलाइन गेम खेल पाएंगे बच्चे

हफ्ते में 3 घंटे ही ऑनलाइन गेम खेल पाएंगे बच्चे

चीन ने सोमवार को देश के करोड़ों बच्चों और किशोरों के ऑनलाइन गेम पर बहुत ही कड़ा रुख अपनाया है। शी जिनपिंग की सरकार ने स्कूल वाले दिनों में ऑनलाइन वीडियो गेम पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। अब चीन में 18 साल से कम उम्र के बच्चे सिर्फ शुक्रवार, वीकेंड और सरकारी छुट्टियों के दिन ही ऑनलाइन गेम्स खेल सकेंगे और वो भी हर दिन सिर्फ एक घंटा। चीन के नेशनल प्रेस एंड पब्लिकेशन एडमिनिस्ट्रेशन ने जो नया नियम जारी किया है, उसके बाद सोमवार से गुरुवार तक 18 से कम उम्र के लोगों के लिए ऑनलाइन गेम पर पूरी तरह से पाबंदी रहेगी और बाकी तीन दिनों में भी वह सिर्फ रात के 8 बजे से लेकर 9 बजे तक ही गेम खेल सकेंगे।

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    युवा आबादी की गेमिंग की लत छुड़ाने की पहल

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    चीन की सरकार ने ऑनलाइन गेम कंपनियों के लिए जो घोषणी की है, उसके मुताबिक सभी वीडियो गेम को नेशनल प्रेस एंड पब्लिकेशन एडमिनिस्ट्रेशन के एंटी-एडिक्शन सिस्टम से जुड़ना होगा। नया नियम बुधवार से लागू होगा और सभी यूजर्स के लिए यह जरूरी होगा कि वह सरकार की ओर से जारी पहचान पत्र का इस्तेमाल करते हुए अपने असली नाम से ही रजिस्टर करें। नए नियम इस बात की ओर इशारा करता है कि चीन किस हद तक अपनी युवा आबादी में गेमिंग की लत पर अंकुश लगाने और भविष्य के लिए अपने वर्कफोर्स तैयार करने का इरादा रखता है।

    चीन ने ऑनलाइन गेम बैन करने का फैसला क्यों लिया ?

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    चीन की सरकार की ओर से कहा गया है कि यह फैसला नाबालिगों में बढ़ रही सामाजिक बुराइयों की वजह से लिया गया है, जिसमें उनका स्कूलों और और पारिवारिक जिम्मेदारियों से ध्यान भटकना शामिल है। नए नियमों के बारे में चीन सरकार की ओर कहा गया है कि 'हाल ही में कई माता-पिता ने शिकायत की है कि कुछ युवाओं और बच्चों में गेम की लत उनकी सामान्य पढ़ाई, जीवन और मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रही है।' इसके मुताबिक माता-पिताओं ने 'और ज्यादा पाबंदियां और नाबालिगों के लिए ऑनलाइन गेमिंग सर्विस को घटाने की मांग की थी।'

    चीन में माता-पिता फैसले की कर रहे हैं तारीफ

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    चीन के इस फैसले पर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की सोच का बहुत ज्यादा असर लगता है। मसलन, न्यूयॉर्क टाइम्स से दक्षिण चीन के शेंझेंग के एक कंपनी की वर्कर सिली फेंग ने कहा है कि 'कुछ किशोर अपने माता-पिता के अनुशासन को सुनने के लिए नहीं तैयार होते, और यह नीति उन्हें नियंत्रित कर सकती है।' इनकी भी 10 साल की एक बेटी है। उन्होंने कहा कि 'मैं समझती हूं कि यह एक सही नीति है......इससे लगता है कि सरकार हमारे लिए हमारे बच्चों के बारे में सोचती है।'

    चीन में अभी तक क्या नियम था ?

    चीन में अभी तक क्या नियम था ?

    चीन में 2019 से यह नियम लागू था कि बच्चे ज्यादातर दिनों में रोजाना 1.5 घंटे तक ऑनलाइन गेम खेल सकते हैं। लेकिन, चीन सरकार के इस सख्त फैसले से उसके मोबाइल गेम के सबसे बड़े कारोबार को बहुत बड़ा झटका लग सकता है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक हॉन्ग कॉन्ग के यूओबी के हियान के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर स्टीवन लेयुंग ने कहा है, 'तीन घंटे हर हफ्ते बहुत ही कम है। इस तरह की नीति टेसेंट पर भी नकारात्मक प्रभाव डालेगी।....मैंने सोचा था कि इस तरह के कदम धीरे-धीरे उठाए जाएंगे, न कि अचानक से एकबार रोक दिया जाएगा।' ((ऊपर की तस्वीरें-प्रतीकात्मक))

    चीन ने भारत के लिए भी पेश की नजीर

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    चीन के इस नए नियम से वहां की ऑनलाइन गेम क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टेनसेंट समेत कई बड़ी वीडियो गेम डेवलपर कंपनियां भी प्रभावित होंगी, जिन्होंने पोकेमॉन यूनाइट, लीग ऑफ लेजेंड्स और फोर्टनाइट जैसे ब्लॉकबस्टर वीडियो गेम बनाए हैं। हालांकि, चीन सरकार के इस फैसले से वीडियो गेम की दुनिया में चीन की वैश्विक बादशाहत को झटका भी लग सकता है। आमतौर पर चीन में जो कुछ भी होता है, वह भारत के हित में शायद ही कभी नजर आता है, लेकिन यह फैसला ऐसा है, जिसे यहां भी काफी सराहना मिल सकती है।

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