अल्पसंख्यकों के साथ एकजुटता दिखाने की कोशिश, मंदिर में दिवाली मनाएंगे पाकिस्तान के चीफ जस्टिस
पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एकजुटता का संदेश देने के लिए आज मंदिर में दिवाली मनाएंगे। इस मंदिर को पिछले साल कट्टरपंथियों ने जला दिया था।
इस्लामाबाद, नवंबर 08: पाकिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यकों को एकजुटता का संदेश देने और कट्टरपंथियों को सीखे देने के लिए पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस गुलजार अहमद आज दिवाली मनाने हिंदुओं के मंदिर में जाएंगे। पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस से दिवाली मनाने के लिए उस मंदिर को चुना है, जिसे पाकिस्तान के कुछ कट्टरपंथियों ने पिछले साल पूरी तरह से तोड़ दिया था।

मंदिर जाएंगे चीफ जस्टिस
अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के साथ एकजुटता दिखाने के लिए, पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश गुलजार अहमद सोमवार को खैबर पख्तूनख्वा के कराक इलाके में 'टेरी मंदिर' में दिवाली मनाएंगे, जिसे कट्टरपंथियों की भीड़ ने पिछले साल ध्वस्त कर दिया था। पाकिस्तान हिंदू काउंसिल की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, चीफ जस्टिस ऑफ पाकिस्तान गुलजार अहमद सोमवार को दोपहर 3 बजे दिवाली समारोह में हिस्सा लेंगे। आपको बता दें कि, ये मंदिर संत श्री परम हंस जी का है और मंदिर की स्थापना आजादी से पहले 1920 में की गई थी।

दिसंबर में हुआ था हमला
आपकी बता दें कि, पिछले साल दिसंबर में जमीयत उलेमा इस्लाम-फजल से जुड़े एक स्थानीय मौलवी के नेतृत्व में भीड़ ने मंदिर में तोड़फोड़ की थी। यह घटना जमीयत उलेमा इस्लाम-फजल की एक रैली के कुछ घंटों बाद हुई थी, जो मंदिर के पास में ही आयोजित की गई थी, जिसमें वक्ताओं ने कथित तौर पर उग्र भाषण दिए थे। उसके उकसावे के बाद भीड़ ने मंदिर में हमला कर दिया था और मंदिर में आग लगा दी थी। कट्टरपंथियों की भीड़ ने मंदिर को पूरी तरह से तोड़ दिया था और उसमें आग लगा दी थी। जिसके बाद पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने इमरान सरकार को जमकर फटकार लगाते हुए देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता जताई थी और सरकारी खर्चे पर मंदिर का निर्माण करने और आरोपियों से मंदिर निर्माण में आने वाला 3 करोड़ 30 लाख (पाकिस्तानी रुपये) वसूलने के आदेश दिए थे।

मंदिर पर हमले का लंबा इतिहास
पाकिस्तान सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि, घटना में शामिल 109 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले 1997 में मंदिर पर पहली बार हमला किया गया था और गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया गया था और पीएचसी के प्रमुख वंकवानी ने 2015 में शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था और पवित्र स्थान की मरम्मत करने और वार्षिक तीर्थयात्रा को फिर से शुरू करने के लिए मदद मांगी थी। वंकवानी ने पाकिस्तानी अखबार डॉन को बताया था कि, "उस समय स्थानीय मौलवी हिंदुओं के लिए एक धार्मिक सभा आयोजित करने में बाधा उत्पन्न कर रहे थे, जबकि श्री परमहंस जी के अनुयायियों ने उस स्थान पर मंदिर बनाने की कोशिश की, लेकिन इसकी अनुमति नहीं थी।" सुप्रीम कोर्ट द्वारा टेरी मंदिर को बहाल करने और संरक्षित करने के लिए प्रांतीय सरकार को निर्देश जारी करने के बाद पाकिस्तान हिंदू परिषद ने 2015 में वार्षिक मेला आयोजित करना शुरू किया।












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