कनाडा का रिकॉर्ड तो पाकिस्तान जैसा ही खराब है, भारतीय ही नहीं पड़ोसियों के खून से भी 'रंगे' हैं हाथ

पाकिस्तान, भारतीयों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता का भी दुश्मन बना हुआ है, क्योंकि आतंकवाद का समर्थन उसकी व्यवस्थित नीति बन चुकी है। भारत में आतंकवादी घटनाओं के लिए जिम्मेदारों को पाकिस्तान डंके की चोट पर पनाह देता रहा है। तथ्य ये भी है कि अल-कायदा का सरगना और 9/11 का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन भी उसी की धरती पर आराम फरमाते हुए मारा गया।

अगर कनाडा का इतिहास और वहां की मौजूदा जस्टिन ट्रूडो सरकार की नीतियों और कारगुजारियों को देखें तो वह भी मानवता के खिलाफ नीतियों में पाकिस्तान वाला ही रवैया अपना रही है। फ्री स्पीच और लोकतंत्र का झुनझुना दिखाकर दुनिया की आंखों में धूल झोंकने की कोशिशें की जा रही हैं।

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आतंकवादी के लिए क्यों धड़कता है कनाडा का दिल?
खालिस्तानी आतंकी भारतीय नागरिक के हत्यारे हरदीप सिंह निज्जर के लिए कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अपनी संसद में जिस तरह से आंसू बहाए हैं, उससे आम भारतीय नागरिकों की जान को लेकर उनकी सोच का खुलासा हो गया है। वह एक घोषित आतंकवादी ही नहीं था, वह भारत में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देकर गलत तरीके से देश छोड़कर भागा हुआ अपराधी भी था।

अपनी गुनाह पर पर्दा डालने के फिराक में कनाडा
इतिहास गवाह है कि कनाडा का ऐसा दोहरा चरित्र पहली बार सामने नहीं आया है। निज्जर की हत्या को लेकर ट्रूडो सरकार सिर्फ 'आरोपों' के सहारे कनाडा की जमीन से चल रही भारत-विरोधी गतिविधियों पर पर्दा डालने की कोशिशों में लगी हुई है; जिसके खिलाफ भारत के पास पुख्ता सबूत हैं। अगर ट्रूडो सरकार आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत सरकार के साथ होती तो खुलेआम भारत को चुनौती देने वाले आतंकवादियों पर लगाम लगाने में कोताही नहीं बरतती।

कनाडा में आईएसआई एजेंटों की खालिस्तानियों के साथ डेटिंग!
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कुछ दिन पहले ही कनाडा के वैंकूवर में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के एजेंटों ने भारत-विरोधी एजेंडे को लेकर खालिस्तानी आतंकियों के साथ एक गोपनीय बैठक की है। खबरों के मुताबिक इस बैठक में सिख फॉर जस्टिस का सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू भी मौजूद था, जो भारत के खिलाफ आए दिन जहर उगलता रहता है। इस बैठक और ट्रूडो का वहां की संसद में दिए गए बयान की तारीख लगभग आसपास की ही मानी जा रही है।

भारत की बार-बार की चेतावनियों को नजरअंदाज करने की साजिश
1985 के विमान बम कांड में 329 लोगों के हत्यारों में अधिकतर कनाडा के नागरिक थे, जो कि लचर जांच प्रक्रिया की वजह से बरी किए जा चुके हैं। क्या कनाडा की नजर में एक आंतकी की जान की कीमत अनेकों बेकसूर भारतीय नागरिकों की जान से ज्यादा है। उसने अपनी जमीन से चल रहे ड्रग माफियाओं और आतंकियों के गिरोह पर आंखें मूंदे रखने की नीति अपना रखी है। भारत के बार-बार आगाह करने के बावजूद मानवता के दुश्मनों के खिलाफ उसकी सहानुभूति पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

पाकिस्तान वाला अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे कनाडा
कनाडा की सरकार किसी को राजनयिक शरण देने और आतंकियों को पनाह देने में फर्क करना भूल चुकी है। आज न कल कनाडा के हुक्कमरानों की इन गलतियों की सजा कनाडा के नागरिकों को भी भुगतनी पड़ सकती है, जैसा कि कई मौकों पर पाकिस्तान के नागरिक भी महसूस करने लगे हैं। जिन आतंकियों को पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ पाल पोसकर बड़ा किया, वह कई बार वहीं की आम जनता के लिए खतरा बनने लगे हैं।

भारतीय ही नहीं पड़ोसियों के खून से भी 'रंगे' हैं कनाडा के हाथ
भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के खिलाफ साजिश रचने वालों का समर्थन करके कनाडा कबतक आजादी और लोकतंत्र की दुहाई दे सकता है। तथ्य यह है कि सिर्फ खालिस्तानी आतंकवादियों को बढ़ावा देने में ही नहीं, कनाडा के हाथ तमिल युद्ध से लेकर यूक्रेन संघर्ष और बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति शेख मुजीबुर रहमान की हत्या तक से भी 'रंगे' हुए हैं।

इन तमाम घटनाओं की वजह से दुनिया भर में अनगिनत लोगों की जानें गई हैं और इतनी तबाही हुई है, जिसके आंकड़े जुटाने भी मुश्किल हैं। लोकतंत्र, सबको बोलने की स्वतंत्रता का ज्ञान कनाडा अपनी करतूतों को छिपाने के लिए उस भारत को देने की कोशिश कर रहा है, जो तमिल, पूर्व पाकिस्तानी, अफगानी और यहां तक कि लाखों रोहिंग्या मुसलमानों को आज भी शरण दे रहा है। (इनपुट- ईटी में पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज शरण के लेख से)

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