कनाडा में प्रदर्शनकारियों पर ग्रेनेड का इस्तेमाल, पीएम जस्टिन ट्रूडो ने लोकतंत्र को जूतों से कुचला?
कनाडा में सरकार की वैक्सीन नीति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पर बैठे आंदोलनकारियों के हूंकार ने प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के तख्त को हिला दिया है और अब प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए मानो पुलिस को पूरी आजादी दे दी गई है।
ओटावा, फरवरी 20: भारतीय लोकतंत्र पर नजर रखने वाले कनाडा के प्रधानमंत्री ने अपने देश के प्रदर्शनकारियों पर हथगोले चलवा दिए हैं। भारत सरकार को लोकतंत्र की नसीहत देने वाले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो अपने देश में तीन हफ्ते भी प्रदर्शन बर्दाश्त नहीं कर पाए और आंदोलन को कुचलने के लिए हर तानाशाही तरीका इस्तेमाल कर रहे हैं। किसी लोकतांत्रिक देश के हालिया इतिहास में ये पहला मौका है, जब आंदोलनकारियों पर कोई सरकार ग्रेनेड का इस्तेमाल करे।

प्रदर्शनकारियों पर थर्ड डिग्री
अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडाई पुलिस ने शनिवार को ओटावा शहर में आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारियों की राजधानी को खाली करने के लिए काली मिर्च स्प्रे और स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया है। सरकार ने नाकाबंदी के एक हिस्से को हटाने और शुक्रवार को 100 से अधिक गिरफ्तारियां करने के बाद, शनिवार सुबह 47 और गिरफ्तारियां की हैं। वहीं, जस्टिन ट्रूडो की पुलिस ने संसद और प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने नाकाबंदी के मुख्य हिस्से को तितर-बितर करने के लिए काफी तेजी से प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
सैकड़ों लोगों को गिरफ्तारियां
ये वो कनाडा है, जिसका लोकतंत्र के इंडेक्स में शीर्ष 10 में स्थान है, लेकिन इसी कनाडा में भारत विरोधी खालिस्तानी रहते हैं और इसी कनाडा में लोकतंत्र को सरकार अपने जूतों की नोक के नीचे कुचल रही है। ये वही कनाडा है, जिसने भारत को किसान आंदोलन के दौरान, जब प्रदर्शन लाल किला तक पहुंच गया था, तब लोकसतंत्र की दुहाई देते हुए संयम बरतने की नसीहत दी थी और ये वही कनाडा है, जो 20 दिन भी अपने यहां एक शांति पूर्वक आंदोलन कर रहे आंदोलनकारियों को झेल नहीं पाया। खुद को लोकतंत्र का अगुवा कहने वाले इन देशों के 'दोगलेपन' पर हंसा जाए या रोया जाए... ये लोगों को तय करना चाहिए।

आंदोलनकारियों को आखिरी मौका
कनाडा में सरकार की वैक्सीन नीति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पर बैठे आंदोलनकारियों के हूंकार ने प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के तख्त को हिला दिया है और अब प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए मानो पुलिस को पूरी आजादी दे दी गई है। कनाडा की पुलिस खुलेआम ट्वीटर पर आंदोलनकारियों को चेतावनी देती है, लाउडस्पीकर पर धमकी देती है, आंदोलन स्थल पर स्टन ग्रेनेड फेंकती है और उस कैमिकल का इस्तेमाल करती है, जिससे शरीर पर खुजली होती है, लेकिन कनाडा में लोकतंत्र के सुरक्षित होने का सर्टिफिकेट देने वाली एजेंसियां आंखों पर काला पट्टी बांधे हुए हैं। सर्टिफिकेट बांटने वालों को भारत तो दिखता है, लेकिन वो प्रधानमंत्री नहीं दिखता है, जो प्रदर्शन शुरू होते ही अज्ञात जगह पर फरार हो जाता है।
पुलिस का बल प्रदर्शन
कनाडा में प्रदर्शन की अगुवाई करने वाले 'फ्रीडम कॉनवे' ने कहा कि, पुलिस ने जिस तरह से थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया है, उसे देखकर उन्होंने ट्रक ड्राइवर्स को पीछे हटने के लिए कह दिया है। क्योंकि पुलिस ने ट्रक ड्राइवर्स को चारों तरफ से घेर लिया था और दर्जनों ट्रकों को पुलिस बलपूर्वक अपने साथ लेकर चली गई। चश्मदीदों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस ने कई गाड़ियों को पूरी तरह से तोड़ दिया। पुलिस ने जिस बर्बर तरीके को अपनाया, उसे देखकर प्रदर्शनकारियों की संख्या नाटकीय तौर पर कम हो गई। रिपोर्ट के मुताबित, अब कुछ सौ प्रदर्शनकारी ही प्रदर्शनस्थल पर जुटे हुए हैं, बाकी सभी को वहां से तितर-बितर कर दिया गया है।

ऐसे हटाया जाता है आंदोलन
कनाडा पुलिस ने दावा किया कि, प्रदर्शनकारियों ने धुएं के कनस्तर फेंके थे और कनाडा की संसद के सामने जो ट्रक पहुंचे थे, उनके पास जैसे ही पुलिस पहुंची, वो वहां से भाग गये। ओटावा पुलिस ने कहा है कि, उन्होंने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल नहीं किया है। अलजीजरा की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ सौ प्रदर्शनकारी ही अब धरना स्थल पर मौजूद हैं, लेकिन उन्हें वहां से खदेड़ने के लिए हजारों पुलिसकर्मी मौजूद हैं। प्रदर्शनकारियों ने पीछे हटने के लिए थोड़ा विरोध किया, लेकिन पुलिस ने काफी आसानी के साथ उन्हें वहां से खदेड़ दिया है। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, आंदोलन की अगुवाई करने वाले कई मुख्य आयोजकों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और कईयों को खदेड़ दिया गया है।

''बंद करो बर्बरता''
शनिवार को, आयोजकों ने ट्विटर पर कहा कि वे "ओटावा में पुलिस प्रशासन द्वारा सत्ता के दुरुपयोग की इन तस्वीरों को देखकर स्तब्ध हैं" और इसलिए "हमारे ट्रक ड्राइवरों को आगे की क्रूरता से बचने के लिए पार्लियामेंट हिल से जाने के लिए कहा है"। आपको बता दें कि, प्रदर्शनकारी शुरू में ट्रक ड्राइवरों के लिए सीमा पार से COVID-19 वैक्सीन जनादेश को समाप्त करना चाहते थे, लेकिन नाकाबंदी धीरे-धीरे सरकार और प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो के खिलाफ प्रदर्शन में बदल गई। वहीं, जस्टिन ट्रूडो सरकार की बर्बरता को लेकर 37 साल की एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा कि, यह एक आंदोलन की शुरुआत है, अंत नहीं। महिला ने कहा कि, "हम सिर्फ अपने घर में वापस नहीं जा रहे हैं और ना ही अब हम और डरेंगे। हम सब ट्राइब हैं और हम एक साथ रहेंगे, हमारा प्रदर्शन एक साथ चलेगा और हम हमेशा एक दूसरे के साथ खड़े रहेंगे।''












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