चरमपंथी संगठन SFJ के पंजाब से जुड़े फैसले को कनाडा ने किया किनारे, भारत ने की तारीफ
ओटावा। कनाडा ने चरमपंथी संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) के उस जनमत संग्रह को त्याग दिया है जिसमें भारत के राज्य पंजाब को एक अलग देश बनाने की मांग की जा रही थी। कनाडा के इस कदम का भारत ने स्वागत किया है। भारत ने उम्मीद जताई है कि जो कदम कनाडा ने उठाया है वैसा ही कदम फाइव आईस ग्रुप के दूसरे देश अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भी उठाएंगे। यह संगठन यूरोपियन देश जैसे जर्मनी और इटली में भी तेजी से सक्रिय है।

ट्रूडो और पीएम मोदी की फोन पर बात
पंजाब जनमत संग्रह 2020 के नाम से एसएफजे का यह जनमत संग्रह आया था। भारत का मानना है कि इसे त्यागने का जो कड़ा फैसला कनाडा ने लिया है वह बाकी पश्चिमी देशों के लिए एक उदाहरण है। उन्हें भी इस रास्ते पर चलने की कोशिश करनी चाहिए। सरकार के एक सीनियर ऑफिसर ने की मानें तो कनाडा ने वाकई एक बेहतरीन शुरुआत की है। कनाडा ने जो फैसला लिया है और उसकी इस मसले पर स्थिति बाकी देशों पर भी ऐसा फैसला लेने के लिए दबाव डालेगी। कनाडा के विदेश मंत्रालय जिसे ग्लोबल अफेयर्स कनाडा के नाम से जानते हैं उसकी तरफ से एक ई-मेल जारी किया गया है। इस ई-मेल में कहा गया है कि कनाडा भारत की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करता है। ऐसे में कनाडा की सरकार इस जनमत संग्रह को मान्यता नहीं देती है।
पंजाब के सीएम ने की तारीफ
वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने भी कनाडा की सरकार के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि कनाडा का उदाहरण बाकी देशों को इसी तरह का फैसला लेने के लिए प्रेरित करेगा। कनैडियन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अक्टूबर 2019 में फिर से चुनाव जीतकर सत्ता में वापसी की है। उनके दूसरे कार्यकाल के बाद से ही भारत और कनाडा के बीच आपसी संपर्क बढ़ा है। इसके बाद ट्रूडो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी जी7 समिट में मुलाकात की और हाल ही में दोनों की दो बार फोन पर बात भी हुई है।












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