Ram Mandir Chanda Chori: 14 दिन न्यायिक हिरासत में 8 आरोपी, ओवैसी बोले- मुसलमान रखते तो गोली मार देते
Ram Mandir Chanda Chori: श्री राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन का मामला अब पूरे देश में तूफान बन गया है। 8 आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। यानी अगली सुनवाई 13 जुलाई तक जेल में रहेंगे। अयोध्या के वकीलों ने फैसला लिया है कि कोई भी इस केस का बचाव नहीं करेगा। सुप्रीम कोर्ट में CBI जांच की मांग वाली याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया गया।
उधर, चंपत राय ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने व बयान दर्ज कराने के बाद अयोध्या छोड़कर दिल्ली निकल गए। वहीं, AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने बिजनौर में बड़ा बयान दिया। कहा कि ट्रस्ट में मुसलमान को रखते तो, फिर उसे गोली मार देते। मामला ही खत्म हो जाता। यह विवाद सिर्फ चंदा चोरी का नहीं, बल्कि राम भक्ति, विश्वास और राजनीति का मुद्दा बन गया है। आइए पूरी कहानी विस्तार से समझते हैं...

8 आरोपी न्यायिक हिरासत में: क्या हुआ कोर्ट में?
29 जून को अयोध्या की एंटी-करप्शन कोर्ट में 8 आरोपियों को पेश किया गया। पुलिस ने रिमांड नहीं मांगी। स्पेशल जज रजत वर्मा ने सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी। कौन-कौन हैं आरोपी आइए नाम जानें...
आरोपी:
- - अविनाश शुक्ला
- - अनुकल्प मिश्रा
- - लवकुश मिश्रा
- - मनीष कुमार यादव
- - करुणेश पांडे
- - राम शंकर मिश्रा
- - सुभाष श्रीवास्तव
- - रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव
इन सभी आरोपियों के पास से 79.85 लाख रुपए जब्त किए गए हैं। ये सभी मंदिर में चढ़ावे की गिनती और संभालने के काम से जुड़े थे। पुलिस बैंक खातों की जांच कर रही है। SBI अयोध्या ब्रांच से स्टेटमेंट लिए गए।
अयोध्या वकीलों का बड़ा फैसला: 'कोई केस नहीं लड़ेगा'
अयोध्या के वकीलों ने फैजाबाद बार एसोसिएशन की बैठक में प्रस्ताव पास किया कि चढ़ावा चोरी के आरोपियों का कोई वकील बचाव नहीं करेगा। उल्लंघन पर 5 लाख रुपये का जुर्माना। सभी वकीलों ने बहिष्कार किया है।
मांगें ये हैं कि चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव तीन दिन में अयोध्या छोड़ें। नहीं माने तो पूरे शहर की घेराबंदी। इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई। वकीलों ने CBI जांच के लिए हाई कोर्ट जाने का भी फैसला किया। 2005 के आतंकी हमले के समय भी वकीलों ने ऐसा ही बहिष्कार किया था।
VHP का बचाव: 'ट्रस्ट ने खुद जांच की और FIR दर्ज कराई'
विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर ट्रस्ट का पूरा समर्थन किया। VHP अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि ट्रस्ट ने आंतरिक जांच की, 80 लाख रुपये बरामद किए और SIT गठन की मांग की।
VHP के मुख्य तर्क हैं कि चंपत राय और अनिल मिश्रा ने निष्पक्ष जांच के लिए स्वेच्छा से इस्तीफा दिया। ट्रस्ट ने SIT रिपोर्ट के आधार पर पहली FIR दर्ज कराई। 8 लोगों को तुरंत गिरफ्तार किया गया। VHP ने AAP के अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पूर्व PMs का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद इस्तीफा नहीं दिया, जबकि चंपत राय ने दिया।
सुप्रीम कोर्ट में CBI जांच की याचिका: सुनवाई टली
वकील अनूप अवस्थी की याचिका में CBI जांच की मांग की गई। सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच (जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू) ने तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा, 'आसमान नहीं टूट पड़ेगा... इतनी जल्दी क्या है?' मामले को गर्मियों की छुट्टियों के बाद सूचीबद्ध किया जाएगा। याचिका में ट्रस्ट के कामकाज में अनियमितताओं की CBI-led SIT से जांच और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई थी।
राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक: 11 जुलाई से पहले 6 जुलाई को
ट्रस्ट की 11 जुलाई वाली बैठक अब 6 जुलाई को अयोध्या में होगी। जगह मणि रामदास छावनी की बजाय कारसेवक पुरम हो सकती है। पूछताछ में चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव से बयान दर्ज किए गए। इसके बाद, चंपत राय दिल्ली चले गए।
SBI का खुलासा: तीन महीने पहले ही चेतावनी दी थी
SBI सूत्रों का दावा है कि बैंक ने तीन महीने पहले ही चढ़ावे गिनने वाले स्टाफ बदलने की सिफारिश की थी, लेकिन ट्रस्ट ने इजाजत नहीं दी। बैंक को गड़बड़ी का अंदेशा था।
पूरा विवाद कैसे शुरू हुआ?
13 जून को UP सरकार ने SIT गठित की। SIT की रिपोर्ट पर 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया। ट्रस्ट ने 80 लाख रुपये बरामद किए। चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया। अब सवाल यह उठते हैं कि चढ़ावे की गिनती में कितनी गड़बड़ी हुई? बड़े अधिकारियों की भूमिका क्या? पैसा कहां-कहां गया?
राम मंदिर का महत्व और विश्वास का संकट
राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं का आस्था का केंद्र है। चढ़ावा लाखों भक्तों की भक्ति है। गबन के आरोप से भावनाएं आहत हुई हैं। VHP और ट्रस्ट का कहना है कि जांच हो रही है और दोषियों को सजा मिलेगी। विपक्ष इसे BJP की नाकामी बता रहा है।
राम मंदिर चंदा चोरी का मामला सिर्फ कानूनी नहीं, भावनात्मक और राजनीतिक भी है। लाखों भक्तों का विश्वास बनाए रखने के लिए पूरी पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच जरूरी है। 8 आरोपियों की 14 दिन की हिरासत, वकीलों का बहिष्कार और CBI की मांग, यह विवाद जल्द शांत होने वाला नहीं लगता।













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