Indian Navy को जल्द मिलेगी तीसरी पंडुब्बी INS Aridhaman, चीन-पाकिस्तान की अभी से बढ़ी टेंशन
Indian Navy को अपनी तीसरी पनडुब्बी आईएनएस अरिदमन (INS Aridhaman) मिलने वाली है। भारत लंबे अरसे से इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में लगा हुआ जो अब लगभग पूरा हो चुका है। इस पनडुब्बी के कमीशन होने के बाद भारत के पास कुल तीन सबमरीन हो जाएंगी।
INS Aridhaman (S-4) ने गहरे समुद्र में अपने फाइनल टेस्ट को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इसे अप्रैल और मई 2026 के बीच भारतीय नौसेना में शामिल किए जाने की संभावना है। यह सिर्फ एक नई पनडुब्बी का शामिल होना नहीं है, बल्कि यह भारत की रक्षा ताकत में बड़ा अपग्रेड है। यह उपलब्धि 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत हासिल की गई है, जिसमें लगभग 75 प्रतिशत भारतीय सामान का इस्तेमाल किया गया है। यानी इस पनडुब्बी के निर्माण में ज्यादातर तकनीक और उपकरण भारत में ही बनाए गए हैं।

कहां बनाई गई सबमरीन?
इस सबमरीन को विशाखापत्तनम में स्थित शिप बिल्डिंग सेंटर में 'एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वेसल (एटीवी)' प्रोजेक्ट के तहत बनाया गया है। INS अरिदमन, न्यूक्लियर एनर्जी से चलने वाली अन्य बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों (SSBN) जैसे INS अरिहंत और INS अरिघाट की तुलना में एक अपग्रेडेड वर्जन है। इसका वजन लगभग 7,000 टन है, जो अपने लेवल के सभी प्रमुख जहाजों से लगभग 1,000 टन अधिक भारी है। दरअसल ऐसा माना जाता है कि जितने ज्यादा वजन की सबमरीन होगी, उतनी बेहतर होगी।
130 मीटर लंबा डिज़ाइन और 83 मेगावाट का रिएक्टर
INS अरिदमन का वजन अधिक होने का कारण इसका लगभग 130 मीटर लंबा पतवार (हुल) डिज़ाइन है, जिसे ज्यादा मिसाइलें ले जाने के लिए तैयार किया गया है। यह सबमरीन 83 मेगावाट के उन्नत दबाव वाले हल्के पानी के न्यूक्लियर रिएक्टर से चलती है। इस रिएक्टर की वजह से इसे लंबे देर तक चलाया जा सकता है, यानी इसे बार-बार ईंधन भरने की जरूरत नहीं पड़ती। यह सबमरीन पानी के अंदर 24 समुद्री मील तक की निरंतर गति बनाए रख सकती है, जो इसे लंबे समय तक गश्त करने में सक्षम बनाती है।
दोगुनी मारक क्षमता वाला वर्टिकल लॉन्च सिस्टम
अरिदमन का सबसे बड़ा अपग्रेड इसका वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (वीएलएस) है। जहां पिछली पनडुब्बियों में केवल चार लॉन्च ट्यूब थे, वहीं अरिदमन में आठ लॉन्च ट्यूब दिए गए हैं। इससे इसकी मारक क्षमता दोगुनी हो जाती है। इसे 3,500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली आठ K-4 मिडिल रेंज की बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस किया जा सकता है। वैकल्पिक रूप से इसमें 24 K-15 'सागरिका' छोटी दूरी की मिसाइलें भी लगाई जा सकती हैं। यह विकल्प इसे अलग-अलग रणनीतिक परिस्थितियों में उपयोगी बनाता है।
क्या है K-4 मिसाइल?
K-4 मिसाइल का इंडीग्रेशन भारत की लंबी दूरी की रेजिस्टेंस पावर को और मजबूत करता है। इसका मतलब है कि इंडियन नेवी बंगाल की खाड़ी जैसे सुरक्षित समुद्री क्षेत्रों में रहते हुए भी रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बना सकती है। अरिदमन का कमीशन होना भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। यह भारत की 'नो फर्स्ट यूज' नीति के तहत समुद्र-आधारित न्यूक्लियर रेजिस्टेंस कैपेसिटी को और मजबूत बनाता है।
तीन SSBN का बेड़ा क्यों है जरूरी?
Naval Expert Lt. Cdr. अविनाश कुमार के मुताबिक, समुद्र में लगातार निगरानी बनाए रखने के लिए कम से कम तीन SSBN पनडुब्बियों का बेड़ा जरूरी माना जाता है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि हर समय कम से कम एक पनडुब्बी गश्त पर तैनात रहे। INS अरिदमन में Advance Acoustic Silencing Technology और लेटेस्ट इंडियन मेड सोनार सिस्टम लगाया गया है। ये टेक्नोलॉजी इसे बेहद शांत (स्टील्थ) और दुश्मन की नजर से बचाकर चलने में सक्षम बनाती है। यही कारण है कि इसे भारत की न्यूक्लियर त्रिमूर्ति का सबसे लचीला और सुरक्षित एलिमेंट माना जा रहा है।
चीन और पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती
चीन और पाकिस्तान जैसे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों के लिए INS अरिदमन एक बड़ी रणनीतिक चुनौती पेश करती है। इस सबमरीन को स्पीड से ज्यादा स्टील्थ को प्राथमिकता देकर डिजाइन किया गया है। इसकी गहरे पानी में गुप्त रूप से नेविगेट करने की क्षमता इसे निगरानी और युद्ध की स्थिति में सटीक हमले करने के लिए बेहद कारगर बनाती है। इसका मतलब है कि यह पनडुब्बी तेज रफ्तार से ज्यादा 'भूत-जैसी' मौजूदगी पर भरोसा करती है। यानी, दुश्मन को पता भी न चले और यह अपने मिशन को अंजाम दे सके।
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