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BLA Attack: बलूच विद्रोहियों के हमले से दहला पाकिस्तान, 27 जवानों की मौत और कई घायल

BLA Attack: पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान शनिवार (31 जनवरी) एक बार फिर धमाकों और हमलों से दहल गया। बलूच अलगाववादी लड़ाकों ने एक ही समय में इस बार कई शहरों को निशाना बनाया है। इस अटैक में अब तक 27 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों की मौत की पुष्टि हुई है। पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है और सेना ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया है।

अधिकारियों के मुताबिक, बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के लड़ाकों ने प्रांतीय राजधानी क्वेटा समेत पसनी, मस्तुंग, नुश्की और ग्वादर जैसे अहम जिलों को निशाना बनाया। लगभग एक ही समय पर हुए इन हमलों में गोलीबारी, ग्रेनेड अटैक और आत्मघाती हमले की कोशिशें शामिल थीं।

BLA Attack

BLA Attack: एक साथ कई शहरों को बनाया निशाना

- सबसे ज्यादा नुकसान क्वेटा में हुआ, जहां 10 पुलिसकर्मियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।

- पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि जवाबी कार्रवाई में 37 उग्रवादियों को मार गिराया गया है और कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।

- अधिकारियों का कहना है कि हमलावरों का मकसद सुरक्षा ढांचे को नुकसान पहुंचाना था। पाकिस्तान की मीडिया बड़े नुकसान का दावा कर रही है।

बलूच लिबरेशन आर्मी ने ली हमलों की जिम्मेदारी

बलूच लिबरेशन आर्मी ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए कहा है कि आगे भी ऐसे धमाके होते रहेंगे। बलूच विद्रोहियों ने कहा कि यह कार्रवाई उनके घोषित 'ऑपरेशन हेरोफ' के दूसरे चरण का हिस्सा है। संगठन ने दावा किया कि उसका निशाना सैन्य ठिकाने, पुलिस प्रतिष्ठान और सरकारी ढांचा था। BLA लंबे समय से बलूचिस्तान की आजादी के नाम पर सशस्त्र संघर्ष चला रहा है।

हमले के बाद पूरे प्रांत में सुरक्षा सख्त

घटनाओं के बाद बलूचिस्तान के प्रमुख शहरों में आपात टीमें तैनात कर दी गई हैं। चेक पोस्ट बढ़ा दी गई हैं और संदिग्ध इलाकों में घर-घर तलाशी ली जा रही है। फिलहाल किसी नागरिक के हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, पाकिस्तान की स्थानीय मीडिया में जान-माल के नुकसान का दावा किया जा रहा है।

दशकों से सुलग रहा है बलूचिस्तान

बलूचिस्तान में अलगाववादी हिंसा दशकों पुरानी है। स्थानीय बलूच समुदाय केंद्र सरकार पर राजनीतिक उपेक्षा और संसाधनों के दोहन का आरोप लगाता रहा है। हाल के वर्षों में उग्रवादी समूहों ने चीनी परियोजनाओं, विदेशी कंपनियों और अन्य प्रांतों से आए नागरिकों को भी निशाना बनाया है। मार्च 2025 में उग्रवादियों द्वारा 450 यात्रियों से भरी ट्रेन के अपहरण की घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान इस संघर्ष की ओर खींचा था।

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