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अमेरिका में 7 दिन रहे बिलावल भुट्टो, नहीं मिले विदेश मंत्री ब्लिंकन, क्या मोदी पर बोलना भारी पड़ा?

अमेरिका में एक सप्ताह रहकर भी भुट्टो से एंटनी ब्लिंकन का न मिलना पाकिस्तान के लिए काफी शर्मनाक बताया जा रहा है। पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक अब्दुल बासित ने इस मामले में पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार पर जमकर हमला बोला।

Bilawal Bhutto meeting cancel with antony blinken

Image: Oneindia

पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो को एक बार फिर से अपने ही देश में आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो को उनके देश में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से सीख लेने की सलाह दी जा रही है। इसके पीछे की मुख्य वजह बिलावल भुट्टो की अमेरिका में हुई भारी बेइज्जती है। दरअसल पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो के अमेरिका पहुंचे थे, वहां वह लगभग एक सप्ताह रुके रहे मगर अमेरिका के विदेश मंत्री ने उन्हें मिलने का समय तक नहीं दिया।

एस जयशंकर से सीख लेने की दी सलाह

एस जयशंकर से सीख लेने की दी सलाह

पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो की इस भारी बेइज्जती से देश में भारी हंगामा मच गया है। अमेरिका में एक सप्ताह रहकर भी भुट्टो से एंटनी ब्लिंकन का न मिलना पाकिस्तान के लिए काफी शर्मनाक बताया जा रहा है। पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक अब्दुल बासित ने इस मामले में पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार पर जमकर हमला बोला। अब्दुल बासित ने विदेश मंत्री को खूब सुनाते हुए, भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर की मिसाल भी दी। बासित ने कहा कि उन्‍हें जयशंकर से सीखना चाहिए कि कैसे अपनी बात को बिना डरे- हिचके और किसी के प्रभाव में आए बिना दुनिया के सामने रखना है

एक सप्ताह तक अमेरिका में रहे बिलावल भुट्टो

एक सप्ताह तक अमेरिका में रहे बिलावल भुट्टो

पूर्व राजनयिक अब्दुल बासित ने कहा कि बिलावल भुट्टो एक सप्ताह के लिए न्यूयॉर्क गए, वहां उन्होंने मीटिंग अटेंड की। ऐसे में अगर अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिकंन से मुलाकात नहीं फिक्स हो पाई थी, उन्हें राजधानी वॉशिंगटन डीसी जाना क्यों जरूरी था। उन्होंने आगे कहा कि हम हमेशा अपने आप को इतना क्यों गिरा देते हैं? अगर आपकी एंटनी ब्लिंकन से मुलाकात तक नहीं हो पा रही थी तो फिर फायदा क्या हुआ? ऐसी बात भी नहीं थी कि ब्लिंकन वहां मौजूद नहीं थे।

बिलावल से नहीं मिले एंटनी ब्लिकन

बिलावल से नहीं मिले एंटनी ब्लिकन

बासित ने आगे कहा कि वह तो वहीं थे, पूरे 7 दिन वह देश में ही रहे। समय की कही से कोई कमी नहीं थी। अब्दुल बासित ने आगे कहा कि पाकिस्तान की ओर से जो प्रेस रिलीज जारी की गई है, उसमें बताया गया कि बिलावल और एंटनी के बीच बातचीत हुई। हालांकि, यह कैसे हुआ, फोन पर हुआ या सीधे मुलाकात में हुआ, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। ये इसलिए किया गया ताकि लोगों को यह लगे कि अमेरिका में बिलावल की एंटनी ब्लिंकन से मुलाकात हुई है।

वाशिंगटन डीसी क्यों गए बिलावल भुट्टो?

वाशिंगटन डीसी क्यों गए बिलावल भुट्टो?

अब्दुल बासित ने आगे कहा कि जब एक-दूसरे की फेस-टू-फेस मुलाकात ही नहीं हुई तो वहां जाने की जरूरत ही क्या थी? फोन पर बात तो यहां पाकिस्तान से भी हो जानी थी। बासित ने आगे कहा कि बस आप न्यूयॉर्क चले जाते और वापस आ जाते, जैसे भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने किया था। आपको वाशिंगटन डीसी जाने की क्या जरूरत थी? अब्दुल बासित ने आगे कहा कि आप पाकिस्तान के विदेश मंत्री की हैसियत से वहां गए थे। आपका वहां विदेश मंत्री से मिलना पूरे पाकिस्तान के लिए जरूरी था।

क्या PM मोदी पर की गई टिप्पणी पड़ी भारी?

क्या PM मोदी पर की गई टिप्पणी पड़ी भारी?

सूत्रों की मानें तो भुट्टो का मकसद ब्लिंकन के साथ वन-टू-वन मीटिंग करना था। मगर ब्लिंकन की जगह उन्‍हें उनकी मीटिंग डिप्‍टी वेंडी शर्मन से कराई गई। भुट्टो ने पिछले दिनों संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विवादास्‍पद टिप्‍पणी की थी। इसके बाद से ही उन्‍हें काफी विरोध झेलना पड़ रहा है। ऐसे में यह भी कहा जा रहा है कि अमेरिका ने जानबूझकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री को एंटरटेन नहीं किया क्योंकि वे भारत को नाराज नहीं करना चाहते थे।

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