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सूर्य पर फिर से हुआ बड़ा धमाका, गुरुवार तक इस गति से पृथ्वी से टकराएगा CME,जारी हुआ अलर्ट

नई दिल्ली, 12 अप्रैल: सोमवार को सूरज की सतह पर एक और प्राकृतिक घटना हुई है, जिसका असर धरती पर भी महसूस किया जा सकता है। इस महीने सूर्य की गतिविधियां काफी बढ़ी हुई हैं। वहां जो विस्फोट हुआ है, उसकी वजह से एक बार फिर से धरती की और बहुत भयावह रफ्तार से कोरोनल मास इजेक्शन ( सीएमई) बढ़ रहा है, जिसके चलते भू-चुंबकीय तूफान पैदा होने की आशंका है। इसकी सूचना मिलते ही पावर सिस्टम को अलर्ट किया गया है और स्पेसक्राफ्ट को लेकर भी चेतावनी जारी की गई है।

गुरुवार को धरती से टकरा सकता है सीएमई

गुरुवार को धरती से टकरा सकता है सीएमई

सूरज की गतिविधियों में इस महीने फिर से तेजी आ रही है। सौर मंडल का सबसे चमकता सितारा इस वक्त अपने 11वें सौर चक्र में है। इस दौरान इसकी सतह पर एकबार फिर से विस्फोट हुआ है और उससे निकला कोरोनल मास इजेक्शन ( सीएमई) प्लाजमा और असीम ऊर्जा को सौर मंडल के भीतरी ग्रहों की ओर धकेले जा रहा है। यह कोरोनल मास इजेक्शन ( सीएमई) आने वाली गुरुवार तक धरती से टकरा सकता है।

429-575 किमी प्रति सेकंड की स्पीड

429-575 किमी प्रति सेकंड की स्पीड

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्पेस साइंसेज इन इंडिया (सीईएसएसआई) ने यह जानकारी दी है कि सूरज पर एक जगमाता कोरोनल मास इजेक्शन ( सीएमई) देखा गया है, जिसके चलते अंतरिक्ष में मौसम संबंधी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। इस सेंटर ने बताया है कि 14 अप्रैल को सीएमई 20,69,834 किलो मीटर प्रति घंटे की गति से धरती से टकरा सकता है। सीईएसएसआई ने ट्वीट करके बताया है, 'हमारा मॉडल एक पुख्ता संकेत दे रहा है कि 14 अप्रैल, 2022 को 429-575 किलो मीटर प्रति सेकंड की स्पीड से धरती के प्रभावित होने की बहुत ही ज्यादा संभावना है।'

'जी2-श्रेणी का भू-चुंबकीय तूफान पैदा हो सकता है'

'जी2-श्रेणी का भू-चुंबकीय तूफान पैदा हो सकता है'

यह कोरोनल मास इजेक्शन पुराने सनस्पॉट एआर2987 से निकला है, जो सीधे पृथ्वी की ओर बढ़ा था और इसे नासा के सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी ने रिकॉर्ड किया था। स्पेसवेदर डॉट कॉम ने इस विस्फोट के तत्काल बाद बताया कि विस्फोट स्थल से एक पूर्ण चमकता हुआ सीएमई उभरा था। एक्सपर्ट का कहना है कि 'इसके प्रभाव से जी2-श्रेणी का भू-चुंबकीय तूफान भड़क सकता है।'

भू-चुंबकीय तूफान किसे कहते हैं ?

भू-चुंबकीय तूफान किसे कहते हैं ?

आमतौर पर सीएमई के सूरज से पृथ्वी की कक्षा तक पहुंचने में कई दिन लग जाते हैं, लेकिन जब इसकी गति बहुत ही तीव्र होती है तो यह 18 घंटे तक में भी पहुंच सकता है। जब एक सीएमई पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराता है तो सौर हवाओं और धरती के वातावरण के बीच आमना-सामना होने की वजह से बहुत ही प्रभावी ऊर्जा का आदान-प्रदान होता है और इसकी वजह से धरती के चुम्बकमंडल में भारी गड़बड़ी पैदा हो सकती है। इसे ही भू-चुंबकीय तूफान कहते हैं।

सौर विकिरण तूफान की भी संभावना

सौर विकिरण तूफान की भी संभावना

नेशनल ओशीऐनिक एंड एटमोस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) के अधीन आने वाले अंतरिक्ष मौसम (स्पेस वेदर) ने इस घटना की पुष्टि की है और गुरुवार के लिए जी2-क्लास के भू-चुंबकीय तूफान की चेतावनी जारी की है, जिसकी वजह से बुधवार को ही सौर विकिरण तूफान की भी संवाभना बन सकती है।

अलर्ट में क्या है ?

इस बार एनओएए यह चेतावनी दी है कि इस प्राकृतिक घटना की वजह से उच्च अक्षांश पर स्थित पावर सिस्टम में वोल्टेज की गड़बड़ी देखने को मिल सकती है और इस तूफान की स्थिति ज्यादा देर तक बनी रही तो ट्रांसफरॉर्मर को भी नुकसान पहुंच सकता है। इसने स्पेसक्राफ्ट के लिए भी सुझाव दिया है कि इसे जमीनी कंट्रोल से तूफान की स्थिति के साथ अनुकूलन करना पड़ सकता है। (तस्वीरें प्रतीकात्मक)

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