'इससे पहले कि AI हमसे स्मार्ट बन जाए....' आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जनक ने गिनाए खतरे, सरकारों से लगाई गुहार

जेफ्री हिंटन को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जनक कहा जाता है। उन्होंने दुनिया भर की सरकारों से अपील की है कि यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएं कि समाज का नियंत्रण मशीन के हाथों में न चला जाए।

एएफपी की एक रिपोर्ट के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक ने कनाडा में एक कार्यक्रम के दौरान यह चिंता जाहिर की है। जेफ्री हिंटन टोरंटो यूनिवर्सिटी से ही जुड़े हुए हैं। उन्होंने कॉलिजन टेक कॉन्फ्रेस के दौरान अपनी यह भावाएं जाहिर की हैं।

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एआई पर छोड़ चुके हैं गूगल की जॉब
हिंटन ने पिछले महीने गूगल की जॉब छोड़ने की घोषणा करके सनसनी मचा दी थी। वह गूगल में एक दशक तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर काम कर चुके हैं। लेकिन जब उन्होंने चैटजीपीटी को देखा तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर खुलकर बोलने के लिए गूगल से निकलने का फैसला कर लिया।

'एआई कैसे कंट्रोल छीन सकता है, इसपर काम हो'
हिंटन ने अब कहा है, 'इससे पहले कि एआई हमसे स्मार्ट बन जाए, मुझे लगता है कि इसे विकसित करने वाले लोगों को यह समझने के लिए काफी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए कि ये कैसे कोशिश कर सकता है और कंट्रोल छीन सकता है। '

'एआई को संभालने के लिए करीब 100 स्मार्ट लोग लगे हैं'
वे बोले, 'इस समय बहुत ही स्मार्ट 99 लोग एआई को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं और एक बहुत ही स्मार्ट शख्स यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इसे हावी होने से कैसे रोका जाए और शायद आप और अधिक संतुलित बनाना चाहते हों।'

पता लगाना होगा कि इससे कैसे निपटा जाए- हिंटन
हिंटन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संभावित खतरों को गंभीरता से लेने को कहा है। हालांकि, उनके आलोचकों को लगता है कि वह चिंता को कुछ ज्यादा ही बता रहे हैं। वैसे इस वैज्ञानिक का कहना है, 'मुझे लगता है कि यह जरूरी है कि लोग समझें कि यह कोई विज्ञान की काल्पनिक कहानी नहीं है, यह केवल डर फैलाने के लिए नहीं है।' उन्होंने कहा है, 'यह सच में जोखिम है जिसके बारे में हमें जरूर सोचना चाहिए और हमें पहले ही पता लगाना होगा कि इससे कैसे निपटा जाए।'

इससे असमानता बढ़ सकती है-एआई के जनक
उनको लगता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से असमानता बढ़ सकती है। क्योंकि, इससे उत्पादकता बहुत बढ़ाई जा सकती है, जिससे अमीरों को फायदा हो सकता है, मजदूरों को नहीं। उनके मुताबिक, 'काम करने वाले लोगों के पास धन नहीं जाने वाला है। यह अमीरों को और ज्यादा अमीर बनाने जा रहा है, गरीब को नहीं। यह समाज के लिए बहुत ही बुरा है।'

फेक न्यूज का खतरा
उन्होंन चैटजीपीटी-स्टाइल बॉट्स के द्वारा बनाई गई फर्जी खबरों की ओर भी इशारा किया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि एआई से बने कटेंट इस तरह से पुख्ता हों, जैसे कि सेंट्रल बैंक बैंक नोटों पर वाटरमार्क लगाते हैं। उनका कहा है, 'कोशिश करना बहुत जरूरी है। उदाहरण के लिए हर फर्जी चीज को फर्जी चिन्हित करे। क्या हम तकनीकी रूप से ऐसा कर सकते हैं, मैं नहीं जानता।'

ज्यादातर लोग खतरे को लेकर नहीं दिखे अधिक चिंतित
यूरोपियन यूनियन अपने एआई ऐक्ट में ऐसी तकनीक पर विचार कर रहा है। हालांकि, जिस कॉन्फ्रेंस में जेफ्री हिंटन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जोखिम गिना रहे थे, वहां 30,000 से ज्यादा स्टार्टअप फाउंडर, इंवेस्टर और टेक्नोलॉजी पर काम करने वाले लोग भी जुटे हुए थे। इनमें से ज्यादातर आर्टिफिशियल इंटिलेजेंस के इस्तेमाल के बारे में सीखना चाहते थे, न कि इसके खतरों पर किसी तरह का भाषण सुनने को तैयार थे।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कुछ लोगों ने उनकी चिंताओं का मजाक भी बनाया। इसमें किसी के हवाले से यहां तक कहा गया कि इसके बारे में ज्यादा निराशाजनक बातें करना ऐसा ही लग रहा है, जैसे 'मंगल पर ज्यादा जनसंख्या पर बात करना।'

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