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Bangladesh Protest: दीपू का मर्डर-दिल्ली में VHP का प्रदर्शन, बांग्लादेश में एंबेसडर तलब, हिंसा के 10 दिन

Bangladesh Lynching Dipu Chandra Das Case Timeline: 2025 के अंतिम दिनों में भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। बांग्लादेश के मैमनसिंह में 27 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या और शव जलाने की क्रूर घटना ने दोनों देशों में आक्रोश फैला दिया। भारत में विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने 23 दिसंबर को दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया, जिस दौरान बैरिकेड्स तोड़े गए और पुलिस से झड़प हुई।

जवाब में बांग्लादेश ने भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को तलब कर अपनी मिशनों की सुरक्षा पर गहरी चिंता जताई। इस घटना ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और राजनयिक तनाव को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। आइए, पूरी घटना को विस्तार से समझते हैं...

Bangladesh Lynching Dipu Chandra Timeline

Dipu Chandra Das Murder: दीपू चंद्र दास की हत्या: क्या हुआ था?

दीपू चंद्र दास (उम्र 25-27 वर्ष) मैमनसिंह के भालुका इलाके में एक गारमेंट फैक्ट्री में मजदूर थे। 18 दिसंबर 2025 की रात को कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने (ब्लास्फेमी) के आरोप में सहकर्मियों ने उन्हें फैक्ट्री से बाहर निकालकर भीड़ के हवाले कर दिया। भीड़ ने उन्हें बुरी तरह पीटा, पेड़ से लटकाया और फिर शव पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी।

  • जांच में खुलासा: शुरुआती जांच में ब्लास्फेमी के कोई ठोस सबूत नहीं मिले। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फैक्ट्री में कामकाजी विवाद (वर्कप्लेस डिस्प्यूट) से उपजा था। सहकर्मियों ने जानबूझकर उन्हें भीड़ को सौंप दिया।
  • बांग्लादेश सरकार का रुख: अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइजर मोहम्मद युनूस ने हत्या की निंदा की और 10-12 लोगों की गिरफ्तारी की घोषणा की। उन्होंने कहा, 'नए बांग्लादेश में ऐसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं।'
  • प्रतिक्रिया: भारत में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने इसे 'अत्यंत चिंताजनक' बताया। निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए।

Delhi VHP Protest: दिल्ली में VHP का प्रदर्शन- बैरिकेड्स तोड़े, पुलिस हिरासत

23 दिसंबर को VHP और बजरंग दल के सैकड़ों कार्यकर्ता चाणक्यपुरी में बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर जमा हुए। प्रदर्शनकारी 'हिंदू रक्त की एक-एक बूंद का हिसाब चाहिए' जैसे नारे लगा रहे थे और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के खिलाफ न्याय की मांग कर रहे थे।

  • पुलिस ने भारी सुरक्षा व्यवस्था की थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की, जिससे झड़प हुई।
  • कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
  • इसी तरह के प्रदर्शन कोलकाता, हैदराबाद और असम में भी हुए। सिलीगुड़ी में बांग्लादेश वीजा सेंटर में तोड़फोड़ की घटना हुई।

बांग्लादेश का जवाब: भारतीय उच्चायुक्त को तलब, वीजा सेवाएं निलंबित

बांग्लादेश विदेश मंत्रालय ने 23 दिसंबर को भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को तलब कर भारत में अपने मिशनों पर 'हमलों' और 'धमकियों' पर गहरी चिंता जताई।

  • बांग्लादेश ने दिल्ली (20 दिसंबर प्रदर्शन) और सिलीगुड़ी (22 दिसंबर तोड़फोड़) की घटनाओं को 'अस्वीकार्य' बताया।
  • कहा गया कि ये कृत्य राजनयिक कर्मियों की सुरक्षा और आपसी सम्मान को खतरे में डालते हैं।
  • भारत सरकार से जांच, रोकथाम और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
  • परिणाम: दिल्ली और सिलीगुड़ी में वीजा सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए निलंबित। (कोलकाता, मुंबई आदि में जारी)

भारत ने बांग्लादेशी मीडिया की 'भ्रामक प्रोपेगैंडा' की निंदा की और कहा कि प्रदर्शन छोटा व शांतिपूर्ण था, कोई सुरक्षा खतरा नहीं।

Bangladesh Violence Timeline: 10 दिनों में बढ़ा तनाव- टाइमलाइन

  • 14 दिसंबर: बांग्लादेश ने शेख हसीना के बयानों पर भारतीय उच्चायुक्त को तलब किया।
  • 18 दिसंबर: दीपू चंद्र दास की हत्या।
  • 19 दिसंबर: बांग्लादेश में हिंसा, भारत में आक्रोश।
  • 20 दिसंबर: भारत ने अल्पसंख्यकों पर हमलों पर चिंता जताई; दिल्ली में पहला प्रदर्शन।
  • 22 दिसंबर: सिलीगुड़ी में तोड़फोड़; बांग्लादेश ने वीजा सेवाएं निलंबित कीं।
  • 23 दिसंबर: दिल्ली में VHP प्रदर्शन; बांग्लादेश ने भारतीय उच्चायुक्त को तलब किया।

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति और चुनाव

यह तनाव शेख हसीना (Sheikh Hasina) की सरकार गिरने (2024) के बाद से चला आ रहा है। अंतरिम सरकार के तहत अल्पसंख्यकों (खासकर हिंदुओं) पर हमलों में वृद्धि की शिकायतें हैं। 12 फरवरी 2026 को चुनाव होने हैं, जिसमें BNP प्रमुख खालिदा जिया (BNP Chief Khaleda Zia) की वापसी और अन्य पार्टियां मैदान में हैं। भारत लगातार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता जता रहा है।

ये घटनाएं दोनों देशों के संबंधों को और जटिल बना रही हैं। राजनयिक स्तर पर बातचीत जारी है, लेकिन अल्पसंख्यक सुरक्षा और आपसी सम्मान प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। क्या यह तनाव चुनाव तक और बढ़ेगा? आपका क्या विचार है? कमेंट्स में बताएं!

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