Bangladesh: सेना ने कर दिया था कर्फ्यू लगाने के आदेश को मानने से इनकार, शेख हसीना की सत्ता जान-बूझकर गिराई?
Bangladesh Crisis: बांग्लादेश में हिंसक उत्पात शेख हसीना के प्रधानंमत्री पद से 5 अगस्त को इस्तीफा देने के बाद भी रुक नहीं रहा है। सरकारी नौकरी में आरक्षण कोटा से उपजे बवाल के बाद आंदोलन शेख हसीना के तख्तापलट तक पहुंच गया। इस बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सेना ने सख्त कर्फ्यू लागू करने के लिए लोगों पर गोलियां चलाने की बात से साफ इनकार कर दिया था।
15 साल बांग्लादेश की कमान संभालने वालीं शेख हसीना के खिलाफ हुए उग्र विरोध प्रदर्शनों के बीच उनको अचानक देश छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ा। बांग्लादेश छोड़ने से एक रात पहले सेना प्रमुख ने अपने जनरलों के साथ बैठक की और फैसला किया कि आर्मी कर्फ्यू लागू करने के लिए नागरिकों पर गोली नहीं चलाएगी।

रॉयटर्स ने दो अधिकारियों के हवाले से बताया कि बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उल-जमान ने शेख हसीना ऑफिस से कहा कि सेना उन लोगों पर गोली चलाकर कर्फ्यू नहीं लगाएगी, जो विवादास्पद नौकरी कोटा प्रणाली को लेकर उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे थे।
रॉयटर्स की अब एक नई रिपोर्ट में इसे लेकर बड़ा दावा किया गया है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने यह जानकारी दो अधिकारियों के हवाले से दी है। इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक भारतीय अधिकारी के अनुसार सेना प्रमुख जनरल वकार-उल-जमान ने शेख हसीना के दफ्तर से संपर्क किया और प्रधानमंत्री को बताया कि उनके सैनिक कर्फ्यू को लागू करने में असमर्थ होंगे।
हसीना ने खो दिया था सेना का समर्थन
अधिकारी यह भी बताया कि उनका संदेश साफ था कि शेख हसीना को अब सेना का समर्थन नहीं रहा है। सेना के शीर्ष अधिकारियों के बीच ऑनलाइन बैठक और हसीना को साफ संदेश कि उन्होंने सेना का समर्थन खो दिया। यह अब तक की किसी रिपोर्ट में सामने नहीं आया था।
दरअसल, रॉयटर्स ने हसीना के शासन के अंतिम 48 घंटों को एक साथ जोड़ने के लिए पिछले हफ्ते की घटनाओं से परिचित दस लोगों से बात की, जिनमें चार सेवारत सेना अधिकारी और बांग्लादेश में दो अन्य जानकार सोर्स शामिल थे। उनमें से कई ने मामले की संवेदनशीलता के कारण नाम ना छापने की शर्त पर बात की।
सेना प्रमुख ने साफ कर दिया था इशारा
बांग्लादेश के तीन पूर्व वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि सेना प्रमुख जमान ने हसीना से समर्थन वापस लेने के अपने फैसले को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया, लेकिन विरोध प्रदर्शनों का स्तर और कम से कम 241 लोगों की मौत ने हसीना को किसी भी कीमत पर समर्थन देना असंभव बना दिया।
इस वजह से सेना प्रमुख पर पड़ा दबाव
रिटायर्ड ब्रिगेडियर जनरल एम सखावत हुसैन ने कहा कि सैनिकों के भीतर बहुत बेचैनी थी। शायद इसी वजह से सेना प्रमुख पर दबाव पड़ा, क्योंकि सैनिक बाहर हैं और वे देख रहे हैं कि क्या हो रहा है? भारतीय अधिकारी और मामले से परिचित दो बांग्लादेशी नागरिकों के अनुसार, जब स्थिति उनके कंट्रोल से बाहर हो गई, तो 76 वर्षीय नेता ने सोमवार सुबह देश छोड़ने का फैसला किया।












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