ऑस्ट्रेलिया ने इजरायल को दिया जोर का झटका, यरुशलम से छीनी राजधानी की मान्यता, जानें क्यों बदला फैसला?
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वॉन्ग ने कहा कि राजधानी का दर्जा तब तक अंतिम नहीं माना जाना चाहिए जब तक कि फलीस्तीनी लोगों के साथ शांतिवार्ता पूरी नहीं हो जाती।
Setback for Israel on Jerusalem: ऑस्ट्रेलिया में लेबर पार्टी की सरकार ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए पश्चिमी यरुशलम (Jerusalem) को इजरायल (Israel) की राजधानी मानने से इंकार कर दिया। सरकार ने चार साल पहले यरुशलम को दी गई मान्यता वापस ले ली है। ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वॉन्ग ने कहा कि राजधानी का दर्जा तब तक अंतिम नहीं माना जाना चाहिए जब तक कि फलीस्तीनी लोगों के साथ शांतिवार्ता पूरी नहीं हो जाती। सरकार ने इस फैसले को इजरायल और फिलिस्तीन के बीच शांति वार्ता के हिस्से के रूप में बताया है।
Pic- penny wong twitter

पिछली सरकार के फैसले को पलटा
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वॉन्ग ने कहा कि सरकार किसी भी शांति वार्ता के हिस्से के रूप में हल किए जाने वाले मामले के रूप में यरुशलम की अंतिम स्थिति पर विचार करना चाहती है। हमारे लिए शांति और सुरक्षा जरूरी है। हम उस दृष्टिकोण का समर्थन नहीं करेंगे जो शांति की संभावना को कमजोर करता है। पेनी वॉन्ग ने कहा कि हम इजरायल-फिलिस्तान द्विराष्ट्र सिद्धांत को मानते हैं। हम एकतरफा किसी भी बदलाव का समर्थन नहीं करेंगे। इसलिए पिछली सरकार के फैसले को आधिकारिक तौर पर पलटा जा रहा है।
चुनाव जीतने के मकसद से लिया फैसला
इससे पहले साल 2017 में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा मान्यता दिए जाने के बाद ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने भी साल 2018 में इजरायल की राजधानी के रूप में पश्चिम यरुशलम को मान्यता दी थी। पेनी वॉन्ग ने कहा कि 2018 में पिछली सरकार का यरुशलम को राजधानी मानने का फैसला सनक से भरा हुआ था। वॉन्ग ने कहा था कि पिछली सरकार ने वेंटवर्थ उपचुनाव जीतने के मकसद से विदेश नीति के साथ राजनीति की और ऐसा फैसला लिया। ऑस्ट्रेलिया सरकार का कहना है कि इस मुद्दे को इजरायल और फिलीस्तीन के बीच शांति वार्ता के रूप में सुलझाया जाना चाहिए।
कई दशकों से है विवाद
बतादें कि यरुशलम को लेकर कई विवाद हैं। अमेरिका जहां यरुशलम को इजरायल की राजधानी मानता है वहीं संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इसको दोनों देशों की राजधानी बना देना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र यरुशलम पर इजरायली कब्जे को अवैध मानता है। कई अन्य देशों का कहना है कि ये फिलिस्तीन का क्षेत्र है जिस पर इजरायल ने अवैध कब्जा किया हुआ है। ब्रिटेन यरुशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता नहीं देता है। ब्रिटेन इजरायल द्वारा कब्जा किए गए यरुशलम के क्षेत्र को गैरकानूनी बताता है। ब्रिटेन का कहना है कि इजरायल ने पूर्वी और जोर्डन ने पश्चिमी यरुशलम पर कब्जा किया हुआ है जो कि अवैध है।
कई देश देते हैं मान्यता
रूस पश्चिमी यरुशलम को इजरायल और पूर्वी यरुशलम को फिलिस्तीन की राजधानी के तौर पर मान्यता देता है। इसके साथ फ्रांस भी यरुशलम को इजरायल की राजधानी नहीं मानता है। फ्रांस भी यूएन की तरह ही यरुशलम को दोनों ही देशों की राजधानी बनाने का मत देता है। ब्राजील पूर्वी यरुशलम को इजरायल की राजधानी मानता है। द. कोरिया, डेनमार्क हैं जो कि यरुशलम को इजरायल की राजधानी मानते हैं वहीं, तुर्की जिसके संबंध इजरायल से अपेक्षाकृत बेहतर रहे हैं वह भी यरुशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर स्वीकार नहीं करता है।
डोनाल्ड ट्रम्प ने 2016 में किया था वादा
सबसे पहले 2017 में अमेरिका ने यरुशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता दी थी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2016 में ये वादा किया था। उनके इस फैसले का कई देशों ने विरोध किया। इन दशों में तुर्की, सउदी अरब, इजिप्ट, जॉर्डन, फ्रांस, चीन, रूस, ब्रिटेन जैसे देश शामिल थे। यूएन में इसकी निंदा भी की गई थी। भारत ने भी भारत ने खुद को अमेरिका के फैसले से अलग करते हुआ कहा था कि इसराइल की राजधानी के रूप में इस विषय पर स्वतंत्र रुख होगा। बतातें कि भारत दुनिया का पहला गैर-अरब मुल्क है जिसने फिलीस्तीन को मान्यता दी है।
पहली बार 2017 में यरुशलम को मिली मान्यता
यरुशलम को इजरायल और फिलिस्तीन दोनों ही जगह के लोग पवित्र मानते हैं और उस पर अपना दावा जताते हैं। दोनों के बीच इसे लेकर काफी लंबे वक्त से संघर्ष चल रहा है। इजरायल हमेशा से यरुशलम को अपनी राजधानी बताता रहा है, वहीं फिलिस्तीन का दावा है कि पूर्वी यरुशलम आने वाले वक्त में बनने वाले फिलिस्तीन राज्य की राजधानी है। यरुशलम 1948 में राज्य बना, तब से 2017 तक किसी भी देश ने इसे इजरायल की राजधानी का दर्जा नहीं दिया था।
इजरायल ने ऑस्ट्रेलिया की आलोचना की
इजरायल के पीएम यायर लैपिड ने मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया के फैसले की तीखी आलोचना की। लैपिड ने इस कदम को जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया। लैपिड ने कहा कि हम सिर्फ आशा कर सकते हैं कि ऑस्ट्रेलिया की सरकार इन मसलों को अधिक गंभीरता और पेशेवर रूप से लेगी। इजरायली पीएम के ऑफिस द्वारा जारी बयान में कहा गया कि यरुशलम इजरायल की शाश्वत और संयुक्त राजधानी है, और ऑस्ट्रेलिया के इस फैसले से कुछ भी नहीं बदलेगा। वहीं इजरायल के विदेश मंत्रायल ने औपचारिक विरोध दर्ज कराने के लिए ऑस्ट्रेलिया के राजदूत को तलब किया है।
फिलिसतीन ने ऑस्ट्रेलियाई सरकार का किया स्वागत
इस बीच फिलिस्तीन ने ऑस्ट्रेलिया के इस कदम की सराहना की है। फिलिस्तीनी प्राधिकरण के नागरिक मामलों के मंत्री हुसैन अल शेख ने ट्विटर पर कहा कि वे ऑस्ट्रेलिया के यरुशमल के संबंध में लिए गए फैसले और अंतराष्ट्रीय वैधता के मुताबिक दो-राष्ट्र समाधान के लिए उनके आह्वान का स्वागत करते हैं।
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